विजयपुर सीट पर सुप्रीम सुनवाई आज, बरकरार रहेगी मल्होत्रा की विधायकी या रामनिवास बनेंगे MLA?
मध्यप्रदेश की राजनीति का केंद्र आज (19 मार्च) देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट बनने वाला है। श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट के भविष्य को लेकर आज फैसले की घड़ी हो सकती है। सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा अपनी विधायकी बचाने में सफल होंगे या फिर भाजपा के रामनिवास रावत विधायक के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे।
दोपहर तक फैसले की उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट में आज दोपहर तक इस हाई-प्रोफाइल मामले में अहम फैसला आने की संभावना है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की डबल बेंच में सुना जाएगा। सूची के अनुसार, इस केस को सुनवाई के लिए 8वें नंबर पर लिस्ट किया गया है। इससे माना जा रहा है कि दोपहर तक तस्वीर साफ हो सकती है।
हाईकोर्ट का कड़ा रुख: क्यों रद्द हुआ था निर्वाचन?
विवाद की जड़ ग्वालियर हाईकोर्ट का वह ऐतिहासिक फैसला है, जिसमें मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया गया था। 9 मार्च को जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया ने पाया कि मल्होत्रा ने उपचुनाव के नामांकन के दौरान अपने आपराधिक मामलों की सही जानकारी साझा नहीं की थी।
रिकॉर्ड के अनुसार, मल्होत्रा पर 6 क्रिमिनल केस दर्ज थे, लेकिन उन्होंने केवल 4 का जिक्र किया। 2 केस छिपाने को कोर्ट ने चुनावी नियमों का गंभीर उल्लंघन माना और दूसरे नंबर पर रहे रामनिवास रावत को विजेता घोषित कर दिया।
15 दिन की मोहलत और स्टे की चुनौती
ग्वालियर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते समय मुकेश मल्होत्रा को कानूनी विकल्प तलाशने के लिए 15 दिन का समय दिया था। यह समयसीमा 24 मार्च को समाप्त हो रही है।
अपनी कुर्सी बचाने के लिए मल्होत्रा को 20 मार्च तक सुप्रीम कोर्ट से स्टे ऑर्डर लाना अनिवार्य है। यदि आज सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा देता है, तो मल्होत्रा की विधायकी सुरक्षित रहेगी, अन्यथा रामनिवास रावत के शपथ ग्रहण का रास्ता साफ हो जाएगा।
सियासी सफर: जब दोनों दिग्गजों ने बदली थी राह
विजयपुर की राजनीति में मुकेश मल्होत्रा और रामनिवास रावत, दोनों का कद काफी बड़ा है। रोचक तथ्य यह है कि दोनों ने ही चुनाव से पहले पाला बदला था। पूर्व राज्यमंत्री मुकेश मल्होत्रा ने 2 मई 2024 को प्रियंका गांधी की उपस्थिति में कांग्रेस का हाथ थामा था।
इससे पहले 2023 के विधानसभा चुनाव में वे निर्दलीय लड़े थे और 45 हजार वोट हासिल कर अपनी ताकत दिखाई थी। वहीं, क्षेत्र के 70 हजार से ज्यादा सहरिया आदिवासी वोटों के गणित ने इस पूरी लड़ाई को और भी दिलचस्प बना दिया है।
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