प्रशासनिक ढांचे में महिला कलेक्टरों की बढ़ती हिस्सेदारी, हिंदी बेल्ट में एमपी सबसे आगे

Sourabh Bhatnagar | Apr 21, 2026, 08:52 IST
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देश में महिलाओं को 33% आरक्षण का कानून लागू करने का इंतजार हो रहा है। इस मुद्दे पर खूब हंगामा भी हो रहा है। हालांकि, जब बात प्रशासनिक ढांचे में महिलाओं की भूमिका की होती है, तो यहां भी महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने में राज्य पीछे नजर आते हैं।

    समझें क्या है पूरा मामला:

    1. देशभर में महिला कलेक्टरों की हिस्सेदारी बढ़ रही है।
    2. मध्यप्रदेश में महिला कलेक्टरों का आंकड़ा 31% तक पहुंचा है।
    3. दक्षिणी राज्यों में यह आंकड़ा 35-39% के बीच है।
    4. हिंदी पट्टी में मध्य प्रदेश इस मामले में सबसे आगे है।
    5. यूपी, झारखंड जैसे राज्यों में महिला कलेक्टरों की संख्या कम है।

    महिला कलेक्टरों की बढ़ती संख्या: MP का 31% आंकड़ा

    आज (21 अप्रैल) सिविल सेवा दिवस है। इस खास मौके पर हम आपके साथ एक खास खबर शेयर कर रहे हैं।



    देश में प्रशासनिक ढांचे में महिलाओं की हिस्सेदारी अब बढ़ रही है। खासकर, महिला कलेक्टरों की संख्या में कई राज्यों ने उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।



    मध्य प्रदेश ने इसमें सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है। प्रदेश में 55 जिलों में से 17 जिलों की जिम्मेदारी महिला कलेक्टरों के पास है, जो कि कुल 31% का आंकड़ा है। यह आंकड़ा न केवल हिंदी पट्टी के राज्यों में, बल्कि देशभर में एक बड़ी मिसाल पेश करता है।



    दक्षिणी राज्यों में महिला कलेक्टरों का दबदबा

    दक्षिण भारत के राज्यों में महिला कलेक्टरों की संख्या काफी बढ़ी है। तेलंगाना में महिला कलेक्टरों का आंकड़ा 39% तक पहुंच चुका है, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है। इसके बाद तमिलनाडु (38%) और केरल (36%) जैसे राज्य आते हैं। यह राज्य प्रशासन में महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने में अग्रणी साबित हो रहे हैं। इन राज्यों में महिलाओं को अवसर देने की दिशा में काफी सुधार हुआ है।



    राज्यमहिला कलेक्टरों की हिस्सेदारी (%)
    तेलंगाना39%
    तमिलनाडु38%
    केरल36%
    आंध्र प्रदेश35%
    सिक्किम33%
    कर्नाटक32%
    मध्यप्रदेश31%
    मेघालय27%
    मिजोरम27%
    पश्चिम बंगाल26%
    बिहार18%
    उत्तर प्रदेश16%
    हरियाणा18%
    गुजरात18%
    झारखंड16%
    ओडिशा8%

    हिंदी पट्टी में मध्यप्रदेश का नेतृत्व

    हिंदी पट्टी के राज्यों में मध्यप्रदेश ही वह राज्य है, जिसने महिला कलेक्टरों की हिस्सेदारी 30% के पार की है। बाकी राज्य, जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार, इस मामले में काफी पीछे हैं। उत्तर प्रदेश में महिला कलेक्टरों की संख्या केवल 16% है, जबकि बिहार में यह आंकड़ा और भी कम है। इन राज्यों में प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है।



    UP और झारखंड में कमी

    उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में महिला कलेक्टरों की संख्या बहुत कम है। उत्तर प्रदेश में महिला कलेक्टरों की हिस्सेदारी महज 16% है। यही स्थिति झारखंड में भी है, जहां यह आंकड़ा भी 16% ही है। इन राज्यों में महिलाओं को अधिक अवसर देने की आवश्यकता है, ताकि प्रशासन में उनका योगदान और अधिक बढ़ सके।



    इन 17 जिलों की कमान महिला अफसर के हाथ

    यदि हम नक्शे पर नजर डालें, तो उज्जैन संभाग (Division) में महिला कलेक्टरों की संख्या सबसे अधिक है। उज्जैन संभाग के सात में से चार जिलों और इंदौर संभाग के आठ में से तीन जिलों की कमान महिलाओं के हाथ में है। वहीं, सागर संभाग के छह में से तीन जिलों और जबलपुर संभाग के नौ में से तीन जिलों की कमान महिला अफसरों को मिली है।



    इसके अलावा ग्वालियर, चंबल, रीवा और शहडोल संभाग में एक-एक महिला आईएएस कलेक्टर की कमाल संभाल रही है। हालांकि, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में वर्तमान में एक भी महिला कलेक्टर नहीं है।



    क्र.सं.संभागजिलामहिला कलेक्टर का नाम
    1.इंदौरखरगोन आईएएस भव्या मित्तल
    2.बड़वानी आईएएस जयति सिंह
    3.आलीराजपुर आईएएस नीतू माथुर
    4.उज्जैनरतलाम आईएएस मीशा सिंह
    5.शाजापुरआईएएस ऋजु बाफना
    6.आगर मालवाआईएएस प्रीति यादव
    7.मंदसौरआईएएस अदिति गर्ग
    8.ग्वालियरग्वालियरआईएएस रुचिका चौहान
    9.चंबलश्योपुरआईएएस शीला दाहिमा
    10.रीवामैहरआईएएस बिदिशा मुखर्जी
    11.सागर
    सागरआईएएस प्रतिभा पाल
    12.पन्नाआईएएस ऊषा परमार
    13.निवाड़ीआईएएस जमुना भिड़े
    14.शहडोलउमरियाआईएएस राखी सहाय
    15.जबलपुरनरसिंहपुरआईएएस रजनी सिंह
    16.सिवनी आईएएस नेहा मीना
    17.डिंडोरीआईएएस अंजू पवन भदौरिया


    यह खबर क्यों जरूरी है?

    यह खबर प्रशासन में महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी को दर्शाती है। महिला कलेक्टरों की संख्या बढ़ने से यह स्पष्ट होता है कि महिलाएं प्रशासनिक जिम्मेदारियों को निभाने में सक्षम हैं। इस खबर से यह भी जाहिर होता है कि कुछ राज्य इस दिशा में धीमी गति से काम कर रहे हैं, जबकि कुछ राज्य इसे प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है और समाज में समानता की दिशा में कदम बढ़ता है।



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