युवराज को मात देकर युवा बाघ अधिराज ने हथियाई खिवनी जंगल की सल्तनत
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश के देवास जिले में खिवनी अभयारण्य है।
- यहां 10 साल के बाघ युवराज को युवा बाघ अधिराज ने हराया दिया है।
- वर्चस्व की लड़ाई में युवराज के पंजे और पैर बुरी तरह घायल हो गए है।
- भोपाल की वन विभाग टीम ने बिना हाथी के उसे रेस्क्यू किया है।
- युवराज खिवनी में सात बाघों के कुनबे का जनक है।
देवास जिले के खिवनी अभयारण्य (Khiwni Wildlife Sanctuary) से वन्यजीव इतिहास की एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। अभयारण्य के अल्फा मेल यानी इलाके के मुखिया बाघ को एक युवा और फुर्तीले प्रतिद्वंद्वी ने उसी के घर में चुनौती देकर खदेड़ दिया। दस साल के बाघ युवराज को अधिराज नाम के युवा बाघ ने टेरिटोरियल फाइट (Territorial Fight) यानी वर्चस्व की जंग में शिकस्त दे दी है।
कैसे हुई टेरिटोरियल फाइट?
वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक वर्चस्व की लड़ाई में बाघ हमेशा एक-दूसरे के पंजों को निशाना बनाते हैं। इससे प्रतिद्वंद्वी शिकार नहीं कर पाता। उम्रदराज होने के कारण युवराज युवा बाघ की फुर्ती का मुकाबला नहीं कर सका। लड़ाई में उसके नाखून टूट गए। उसके पैर डैमेज हो गए। वह लड़खड़ाते हुए चलने लगा और शिकार करने में अक्षम हो गया। अब खिवनी के जंगल पर अधिराज का आधिपत्य हो गया है।
शुक्रवार, 26 जून को वन विभाग (Van Vibhag) की गश्त टीम को युवराज लहूलुहान हालत में लड़खड़ाते हुए मिला। उसके अगले पैरों पर नाखूनों के ताजा जख्म थे। यह देखकर टीम सतर्क हो गई और तुरंत भोपाल मुख्यालय को सूचना दी।
बिना हाथी के हुआ रेस्क्यू
शनिवार, 27 जून सुबह रेस्क्यू का खाका बना। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि खिवनी में रेस्क्यू के लिए हाथी मौजूद नहीं था। आमतौर पर हिंसक बाघों को हाथी की पीठ पर बैठकर बेहोश किया जाता है। हाथी की ऊंचाई से डॉक्टर सुरक्षित रहते हैं।
इस स्थिति में वन विभाग भोपाल के सीनियर डॉक्टर अतुल गुप्ता और खिवनी अभयारण्य की दो टीमें मैदान में उतरीं। टीम ने घायल बाघ को चारों तरफ से घेरकर निशाने पर लेने की कोशिश की। यह बेहद जोखिम भरा काम था।
डॉ. अतुल गुप्ता ने बंदूक का एयर प्रेशर सटीक सेट किया। सही कोण यानी एंगल से युवराज के पिछले हिस्से की मुख्य मांसपेशी को निशाना साधा। करीब चार घंटे के इस जोखिम भरे ऑपरेशन के बाद युवराज को बेहोश किया गया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने उसका प्राथमिक उपचार किया और उसे सुरक्षित रूप से भोपाल शिफ्ट कर दिया गया है। अब वहां उसका बेहतर इलाज हो रहा है।
खिवनी में सात बाघों का कुनबा
खिवनी अभयारण्य में आज जो सात बाघों का पूरा कुनबा फल-फूल रहा है, वह दरअसल युवराज और मीराश यानी बाघिन की ही देन है। इन दोनों की जोड़ी ने खिवनी को नई पहचान दिलाई। आज युवराज उसी जंगल से विस्थापित हो गया जिसे उसने बसाया था।
युवराज खिवनी अभयारण्य के इतिहास का एक अहम हिस्सा है। उसके बिना इस अभयारण्य की कहानी अधूरी है। इसीलिए वन विभाग की टीम ने इतने जोखिम के बाद भी उसे बचाने की पूरी कोशिश की।
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