मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर रिटायर्ड टीचर से 80 लाख की ठगी, दो साल बाद आरोपी फलोदी से गिरफ्तार
Jageshwar prasad | Oct 09, 2026, 12:57 IST
सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस ने दो साल बाद डिजिटल अरेस्ट आरोपी को फलोदी से गिरफ्तार किया।
सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस ने फलोदी में एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जिसके खिलाफ महिला टीचर द्वारा 80 लाख रुपए की साइबर ठगी के लिए शिकायत दर्ज कराई गई थी। 14 नवंबर 2024 को दी गई शिकायत के बाद, पुलिस ने आरोपी के बैंक खाते और ठगी में उसकी भूमिका की जांच की और उसे आरोपी पाया।
अजमेर निवासी रिटायर्ड महिला टीचर को डिजिटल अरेस्ट कर 80 लाख रुपए की साइबर ठगी के मामले में सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की टीम ने दो साल बाद एक आरोपी को फलोदी से गिरफ्तार किया है।
मामले की जांच के दौरान कॉल डिटेल्स, वाट्सएप चैट, बैंक खातों के स्टेटमेंट, केवाईसी दस्तावेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। इससे आरोपी की भूमिका सामने आई।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने ठगी की रकम ट्रांसफर करवाने के लिए अपना बैंक खाता मुहैया करवाया था। उसके खाते में करीब 2.10 लाख रुपए की रकम ट्रांसफर हुई। इस मामले में पुलिस ने उसे फलोदी से गिरफ्तार किया है।
एडीजी (साइबर क्राइम) वीके सिंह (VK Singh) ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अजमेर की रिटायर्ड महिला टीचर को डिजिटल अरेस्ट कर 80 लाख रुपए की साइबर ठगी करने के मामले में फलोदी निवासी बजरंग को गिरफ्तार किया है।
आरोपी बजरंग ने अपने परिचित संदीप को अपना बैंक का खाता, एटीएम कार्ड और मोबाइल सिम मुहैया करवाया। बदले में उसने कमीशन के तौर पर पांच हजार रुपए लिए।
महिला टीचर से हुई 80 लाख रुपए की ठगी की रकम में से 2,10,474 रुपए 26 नवंबर 2024 को उसके अकाउंट में जमा करवाई गई। इस रकम को उसने उसी दिन एटीएम और यूपीआई के जरिए निकाल लिया। पुलिस की जांच में साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने में आरोपी की भूमिका सामने आने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
अजमेर निवासी रिटायर्ड महिला टीचर ने 14 नवंबर 2024 को एक मुकदमा दर्ज करवाया था। इसमें उन्होंने बताया कि उनके पास एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने अपने आप को पुलिस की साइबर विंग का अधिकारी बताया।
उसने कहा कि परिवादी के आधार कार्ड से 25 खातों में रुपए जमा करवाए गए हैं। इनका संबंध मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। कॉल करने वाले ने डराकर उनसे बैंक खातों और उनमें जमा रकम की जानकारी ली। लगातार वीडियो कॉल के जरिए निगरानी रखी गई। इसके बाद क्राइम ब्रांच में गिरफ्तारी का डर दिखाया गया।
सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के एसएचओ आरपीएस गजेंद्र शर्मा ने जानकारी दी। उनके मुताबिक आरोपियों के कहने पर पीड़िता ने 80 लाख रुपए की रकम उनके बताए बैंक खातों में जमा करवाई। इसके बाद उनसे और रकम की डिमांड की गई।
आरोपियों ने 80 लाख रुपए आरटीजीएस (RTGS – Real Time Gross Settlement) के जरिए म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर करवाए। इसके बाद ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों और हवाला चैनल के जरिए आगे ट्रांसफर कर गिरोह के लोगों तक पहुंचाया गया।
अब पुलिस इस मामले में सीडीआर (CDR – Call Detail Record) और बैंक ट्रांजेक्शन के मनी ट्रेल की जांच में जुटी है। ठगी की रकम किन बैंक खातों में ट्रांसफर हुई और इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं, इसे लेकर तहकीकात जारी है।
पुलिस का मानना है कि यह एक बड़े गिरोह का मामला है। इसमें और भी लोग शामिल हो सकते हैं। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) के नाम पर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। आम लोग इन ठगों के जाल में फंस जाते हैं। इस मामले में रिटायर्ड टीचर को डराया-धमकाया गया और 80 लाख रुपए ठग लिए गए।
इससे साफ है कि लोगों को साइबर ठगी के प्रति सतर्क रहना चाहिए। किसी भी अनजान कॉल पर अपनी बैंक जानकारी नहीं देनी चाहिए। पुलिस या किसी भी एजेंसी के नाम पर डराने वाले कॉल से बचना चाहिए। ऐसे मामलों में तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करनी चाहिए।
मामले की जांच के दौरान कॉल डिटेल्स, वाट्सएप चैट, बैंक खातों के स्टेटमेंट, केवाईसी दस्तावेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। इससे आरोपी की भूमिका सामने आई।
साइबर ठगी आरोपी की क्या थी भूमिका?
एडीजी (साइबर क्राइम) वीके सिंह (VK Singh) ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अजमेर की रिटायर्ड महिला टीचर को डिजिटल अरेस्ट कर 80 लाख रुपए की साइबर ठगी करने के मामले में फलोदी निवासी बजरंग को गिरफ्तार किया है।
साइबर ठगी आरोपी ने खाता दिया, कमीशन लिया
महिला टीचर से हुई 80 लाख रुपए की ठगी की रकम में से 2,10,474 रुपए 26 नवंबर 2024 को उसके अकाउंट में जमा करवाई गई। इस रकम को उसने उसी दिन एटीएम और यूपीआई के जरिए निकाल लिया। पुलिस की जांच में साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने में आरोपी की भूमिका सामने आने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
कैसे हुई ठगी?
उसने कहा कि परिवादी के आधार कार्ड से 25 खातों में रुपए जमा करवाए गए हैं। इनका संबंध मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। कॉल करने वाले ने डराकर उनसे बैंक खातों और उनमें जमा रकम की जानकारी ली। लगातार वीडियो कॉल के जरिए निगरानी रखी गई। इसके बाद क्राइम ब्रांच में गिरफ्तारी का डर दिखाया गया।
म्यूल खातों का इस्तेमाल
आरोपियों ने 80 लाख रुपए आरटीजीएस (RTGS – Real Time Gross Settlement) के जरिए म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर करवाए। इसके बाद ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों और हवाला चैनल के जरिए आगे ट्रांसफर कर गिरोह के लोगों तक पहुंचाया गया।
आगे की जांच जारी
पुलिस का मानना है कि यह एक बड़े गिरोह का मामला है। इसमें और भी लोग शामिल हो सकते हैं। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
लगातार बढ़ रहे हैं डिजिटल अरेस्ट के मामले
इससे साफ है कि लोगों को साइबर ठगी के प्रति सतर्क रहना चाहिए। किसी भी अनजान कॉल पर अपनी बैंक जानकारी नहीं देनी चाहिए। पुलिस या किसी भी एजेंसी के नाम पर डराने वाले कॉल से बचना चाहिए। ऐसे मामलों में तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करनी चाहिए।
ओबीसी केस में आज फैसला संभावित, हाईकोर्ट की डबल बैंच में केस लिस्ट, लाखों अभ्यर्थियों की टिकी निगाहें
By Sanjay Gupta
कांग्रेस रामभरोसे, चापलूसी मेरे खून में नहीं...पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने फिर उठाए सवाल, नेतृत्व पर साधा निशाना
By Jageshwar prasad
एमपी में बच्चों को बेहतर शिक्षा देना पड़ा भारी, स्कूल किया अच्छा तो थमा दिया नोटिस
By Manya Jain
डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के OSD पर एक करोड़ लेने का आरोप, 930 करोड़ की ठगी के आरोपी के बयान से मचा हड़कंप
By Sourabh Bhatnagar
6 सीबीआई अफसरों के खिलाफ दर्ज होगी आपराधिक शिकायत, दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
By Arun Tiwari
जयपुर पुलिस की हिरासत में मरा ऋतुराज नाबालिग निकला, जन्म प्रमाण पत्र में 2009 की जन्मतिथि दर्ज
By Jageshwar prasad
आज रायपुर दौरे पर सीएम विष्णु देव साय: साइबर जागृति से लेकर करमा रितिर-2026 कार्यक्रम में होंगे शामिल
By Harrison Masih