अजमेर में फिर महिला मेयर की बारी, नहीं होगा कोई जातिगत बंधन
समझें क्या है पूरा मामला
- अजमेर नगर निगम मेयर सीट फिर महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुई।
- इस बार सीट सामान्य महिला वर्ग के खाते में गई।
- जिले के 9 निकायों में अध्यक्ष पदों का आरक्षण तय हुआ।
- पुष्कर एससी और सरवाड़ ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित।
- अब नगर निकाय वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया होगी।
अजमेर सहित जिले के 9 नगर निकायों में अध्यक्ष, सभापति और मेयर पद के लिए आरक्षण की लॉटरी गुरुवार को जयपुर में निकाली गई। इस लॉटरी में अजमेर नगर निगम की मेयर सीट एक बार फिर महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुई है, लेकिन इस बार बिना किसी जातिगत बंधन के।
अजमेर मेयर पद पर बड़ा बदलाव
पिछली बार भी अजमेर की मेयर एक महिला ही थीं, लेकिन वह सीट एससी (SC) वर्ग के लिए आरक्षित थी। इस बार यह सीट सामान्य महिला वर्ग के लिए तय हुई है, यानी अब किसी भी वर्ग की महिला मेयर बन सकेगी।
किसे मिला कैसा आरक्षण
लॉटरी के अनुसार पुष्कर नगर परिषद अध्यक्ष पद को एससी वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं सरवाड़ नगर पालिका अध्यक्ष पद ओबीसी (OBC) वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है।
किशनगढ़, केकड़ी, नसीराबाद, सावर, पीसांगन और टांटोटी की सीटें अनारक्षित वर्ग में रही हैं। गौरतलब है कि पिछले चुनाव में अजमेर निगम की मेयर सीट सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित थी, लेकिन उस पर ओबीसी वर्ग के धर्मेंद्र गहलोत मेयर बने थे।
वार्डों का आरक्षण अभी बाकी
इस लॉटरी में सिर्फ निकाय प्रमुखों के पदों का आरक्षण तय हुआ है। अब आगे जिलों में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं के वार्डों के आरक्षण की लॉटरी अलग से निकाली जाएगी।
वार्ड आरक्षण की यह प्रक्रिया कलेक्टर स्तर पर होगी, जिसमें एससी, एसटी, ओबीसी और महिला आरक्षण के आधार पर अलग-अलग वार्डों का निर्धारण किया जाएगा।
अजमेर नगर निगम का पुराना इतिहास
2021 में हुए पिछले नगर निगम चुनाव में मेयर पद एससी महिला वर्ग के लिए आरक्षित था। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी ब्रजलता हाड़ा को 61 और कांग्रेस की द्रोपदी कोली को 19 मत मिले थे। उस समय निगम में भाजपा के 48, कांग्रेस के 18, रालोपा का 1 और निर्दलीय 13 पार्षद थे।
अजमेर नगर निगम में इससे पहले 1990 में भाजपा के रतनलाल यादव, 1995 में भाजपा के वीर कुमार, 2000 में भाजपा की अनिता भदेल और 2005 में भाजपा के धर्मेंद्र गहलोत सभापति बने थे। साल 2010 में कांग्रेस के कमल बाकोलिया सीधे चुनाव से मेयर बने, हालांकि उस समय बोर्ड भाजपा का था। इसके बाद 2015 में भाजपा के धर्मेंद्र गहलोत मेयर बने थे।
जिले की अन्य निकायों में क्या रहा नतीजा
किशनगढ़ नगर परिषद का अध्यक्ष पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित था। पिछले चुनाव में भाजपा के दिनेश सिंह राठौड़ ने कांग्रेस के प्रदीप अग्रवाल को हराया था। भाजपा को 36 और कांग्रेस को 24 मत मिले थे।
केकड़ी नगरपालिका में अध्यक्ष पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित था। कांग्रेस के कमलेश कुमार साहू ने भाजपा के मिश्रीलाल को हराया था। कमलेश को 24 और मिश्रीलाल को 16 मत मिले थे।
सरवाड़ नगर पालिका में अध्यक्ष पद सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित था। कांग्रेस प्रत्याशी छगन कंवर राठौड़ को 17 और भाजपा प्रत्याशी शारदा देवी माली को 8 मत मिले थे।
पुष्कर नगर परिषद में अध्यक्ष पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित था। भाजपा के कमल पाठक ने निर्दलीय रविकांत पाराशर को हराया था। कमल पाठक को 13 और कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को 12 मत मिले थे।
नसीराबाद नगर पालिका में अध्यक्ष पद सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित था। यहां दिलचस्प घटनाक्रम हुआ - निर्दलीय शारदा मितलवाल पहले अध्यक्ष बनीं, लेकिन बाद में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास होने के बाद भाजपा की अनिता मित्तल अध्यक्ष बनीं।
तीन ग्राम पंचायतें बनीं नई नगर पालिका
अजमेर जिले की तीन ग्राम पंचायतों को नगर पालिका का दर्जा दिया गया है। सावर ग्राम पंचायत, जहां विश्वजीत सिंह शक्तावत सरपंच थे, वहां सामान्य वर्ग का आरक्षण तय हुआ है। टांटोटी में, जहां ओमप्रकाश डूंगरवाल सरपंच थे, वहां भी सामान्य वर्ग का आरक्षण रहेगा। वहीं पीसांगन में, जहां मंजू देवी सरपंच थीं, वहां सामान्य महिला वर्ग का आरक्षण तय हुआ है।
FAQ
- अजमेर नगर निगम मेयर पद इस बार किस वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है?
इस बार अजमेर मेयर पद सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है। पिछली बार यह सीट एससी महिला वर्ग के लिए थी। - पुष्कर और सरवाड़ में किस वर्ग को मिला आरक्षण?
पुष्कर नगर परिषद अध्यक्ष पद एससी वर्ग के लिए और सरवाड़ नगर पालिका अध्यक्ष पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है। - राजस्थान में वार्डों का आरक्षण कब तय होगा?
निकाय प्रमुखों के पदों का आरक्षण तय हो चुका है। वार्डों के आरक्षण की लॉटरी अलग से कलेक्टर स्तर पर बाद में निकाली जाएगी।
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