लिपिक भर्ती में फर्जीवाड़े की जांच में सुस्ती क्यों, गृह सचिव ने DGP से मांगी रिपोर्ट
News In Short
- अलवर जिला परिषद में फर्जी भर्तियों का बड़ा मामला सामने आया।
- तीन साल में तीन थानेदार बदलने के बावजूद जांच शून्य रही।
- गृह सचिव ने डीजीपी को कार्रवाई रिपोर्ट मांगी।
- जयपुर और दौसा पुलिस ने मामले में तेजी दिखाई, अलवर पुलिस सुस्त।
- अब सवाल उठ रहे हैं कि अलवर पुलिस मामले को क्यों ठंडे बस्ते में डाल रही है।
News In Detail
राजस्थान में इन दिनों सरकारी नौकरियों में उजागर हो रहे फर्जीवाड़ों को लेकर ताबड़तोड़ कार्रवाई हो रही है। लेकिन अलवर से सामने आई तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। अलवर जिला परिषद में लिपिकों की फर्जी भर्तियों को लेकर अलवर पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। पुलिस की इस सुस्ती को सरकार ने अब गंभीरता से लिया है।
गृह सचिव ने की दखलअंदाजी
भर्तियों में फर्जीवाड़े की सुस्त जांच को देखते हुए गृह विभाग ने इस मामले में सीधा हस्तक्षेप किया है। गृह विभाग के उप सचिव एलआर मीणा ने डीजीपी को पत्र लिखकर अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
SOG ने पकड़ा था बड़ा फर्जीवाड़ा
इस पूरे फर्जीवाड़े के खेल का खुलासा तब हुआ जब स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने जांच में अलवर जिला परिषद की लिपिक भर्तियों में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी थी। SOG ने 4 अगस्त 2023 को अलवर के अरावली विहार थाने में पहला केस दर्ज हुआ। इसमें दो शिक्षक, एक लिपिक और एक अज्ञात व्यक्ति आरोपी बने।
तीन साल में थाने में तीन एसएचओ (SHO) बदल गए, लेकिन जांच कहीं नहीं बढ़ी। शिकायतकर्ता को कोर्ट तक जाना पड़ा। कोर्ट ने पुलिस से जवाब मांगा तो पुलिस ने जिम्मेदारी जिला परिषद पर डाल दी।
दूसरे जिलों से अलवर पुलिस पीछे
जयपुर और दौसा की जिला परिषदों में लिपिकों की भर्ती में हुए फर्जीवाड़े की ाजचं को लेकर वहां की पुलिस ने गंभीरता दिखाई है। जयपुर बनीपार्क थाना ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। दौसा पुलिस भी तेजी से जांच में लगी हुई है।
वहीं अलवर पुलिस अब तक सुस्त है। यही सवाल उठता है कि अलवर पुलिस किस दबाव में मामले को ठंडे बस्ते में डाल रही है। गृह सचिव के पत्र के बाद पुलिस महकमे में हलचल हो गई है।
क्या था पूरा मामला
अलवर जिला परिषद में 2017 में लिपिक भर्ती की गई थी। लेकिन भर्ती में फर्जीवाड़ा सामने आया था। इस फर्जीवाड़े में नियमों की अनदेखी की गई की गई थी। योग्य उम्मीदवारों का चयन प्राथमिकता के आधार पर नहीं किया गया था। जांच में सामने आया था की फर्जी दस्तावेज के आधार पर नौकरी पा ली गया थी।
FAQ
- अलवर की जिला परिषद में लिपिक भर्ती घोटाले की जांच की क्या स्थिति है?
अलवर में इस भर्ती फर्जीवाड़े की जांच सुस्त चल रही है। तीन साल में तीन एसएचओ बदल चुके हैं, लेकिन जांच अब तक अधूरी है। - अलवर जिला परिषद भर्ती घोटाले में सरकार ने क्या कदम उठाए?
सरकार की तरफ से गृह सचिव कार्यालय ने डीजीपी को पत्र लिखकर अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। - जिला परिषद भर्ती घोटाले में दूसरे जिलों की पुलिस ने कैसे कार्रवाई की?
जयपुर और दौसा पुलिस ने फर्जी भर्तियों में तेजी दिखाई, आरोपियों को गिरफ्तार किया और पूछताछ (Interrogation) शुरू की।
ये खबर भी पढे़:-
राहुल गांधी पहुंचे पुष्कर, चिंतन शिविर में कांग्रेसियों को देंगे जीत का मंत्र
क्यों हल्की आंधियां भी दिल्ली-एनसीआर तक ले जा रही हैं राजस्थान की धूल, जानिए पूरा कारण
सरकारी खर्च पर बने डॉक्टरों ने नहीं दी सेवा, 50 करोड़ जुर्माना भी अटका
कैंटीन मैनेजर को पीटने और यूरिन पिलाने के आरोप, तीन पुलिसकर्मी लाइन हाजिर