सरकारी खर्च पर बने डॉक्टरों ने नहीं दी सेवा, 50 करोड़ जुर्माना भी अटका
Jageshwar prasad | Jun 01, 2026, 11:53 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान सरकार की सर्विस बॉण्ड नीति विफल हुई है। सरकारी खर्च पर पढ़े 216 विशेषज्ञ डॉक्टरों ने न तो दो साल की अनिवार्य सेवा दी और न ही 25-25 लाख रुपए का जुर्माना भरा। सरकार 50 करोड़ से अधिक की वसूली भी नहीं कर पाई।
News In Short
- राजस्थान में डॉक्टरों की सर्विस बॉण्ड नीति सरकार के लिए नाकाम साबित हुई।
- सरकारी खर्च पर पढ़े डॉक्टर न तो दो साल सेवा दे रहे और न ही जुर्माना भर रहे।
- 200 से अधिक डॉक्टरों पर 50 करोड़ रुपए से ज्यादा का जुर्माना बनता है।
- 2021 बैच में 44 प्रतिशत डॉक्टरों ने जॉइनिंग नहीं दी थी, 2022 में यह आंकड़ा 25 प्रतिशत रहा।
- सरकार अब सर्विस बॉण्ड की अवधि को दो साल से घटाकर एक साल करने की तैयारी कर रही है।
News In Detail
बॉण्ड की शर्तों के मुताबिक, सरकारी मेडिकल कॉलेजों से एमडी, एमएस, डीएम और एमसीएच करने के बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों को दो साल तक सरकारी अस्पतालों में अनिवार्य सेवाएं देनी होती हैं। लेकिन ये विशेषज्ञ लापता हैं। ये न तो दो साल की अनिवार्य सेवाएं दे रहे हैं और न ही इसके बदले 25 लाख रुपए का जुर्माना भर रहे हैं।
25% डॉक्टरों ने नहीं दी जॉइनिंग
2021 में तो स्थिति और भी गंभीर थी
सरकार ने 650 सीटें बढ़ाईं, फिर भी सिस्टम खाली
संबंधित डॉक्टरों और अफसरों के अनुसार, पहली बार सबको सीटें आवंटित की गई हैं, क्योंकि इससे पहले मेडिकल छात्र यह बहाना बनाते आ रहे थे कि चिकित्सा विभाग उन्हें खाली जगह नहीं बता पा रहा है।
सरकारी मेहरबानी और डॉक्टरों की लापरवाही
सेवाकाल घटाकर एक साल करने की तैयारी
कानूनी एक्सपर्ट की सलाह
फिलहाल सरकार इस मामले में क्या फैसला लेती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। लेकिन तब तक ये 216 डॉक्टर लापता हैं और सरकार को 50 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है।
FAQ
- राजस्थान के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पास आउट विशेषज्ञ डॉक्टरों पर सर्विस बॉण्ड नीति के तहत वर्तमान में क्या शर्तें लागू हैं?
शर्तों के अनुसार, डॉक्टरों को 2 साल तक सरकारी अस्पतालों में अनिवार्य विधिक सेवाएं देनी होंगी या इसके बदले ₹25 लाख का जुर्माना देना होगा। - विधिक सलाहकारों के अनुसार बॉण्ड की शर्तों का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों पर क्या कार्रवाई की जा सकती है?
विधिक विशेषज्ञों के अनुसार, उनके खिलाफ न्यायालय में अवमानना का केस चलाया जा सकता है और उनकी संपत्तियां तक कुर्क की जा सकती हैं।
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