भूमि हड़पने का आरोप, पावर ऑफ अटॉर्नी के दुरुपयोग की जांच, ईडी ने तलब किए किसान
Jageshwar prasad | May 31, 2026, 20:19 IST
Photograph: (the sootr)
जयपुर के किसानों ने आरोप लगाया है कि रियल एस्टेट डेवलपर्स ने पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी से उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि हड़प ली है। प्रवर्तन निदेशालय ने मामले की जांच के लिए कई किसानों को 3 जून को बयान दर्ज कराने के लिए तलब किया है।
News In Short
- जयपुर के किसानों ने लगाया रियल एस्टेट डेवलपर्स पर जमीन हड़पने का आरोप।
- किसानों कहना है कि डेवलपर्स ने पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग किया।
- ईडी ने मामले की जांच के लिए कई किसानों को बयान दर्ज कराने के लिए तलब किया।
- किसानों का कहना है कि उन्होंने 2005 में जमीन कानूनी रूप से बेची थी।
- प्रवर्तन निदेशालय पिछले दो दशकों के स्वामित्व रिकॉर्ड और पावर ऑफ अटॉर्नी की जांच कर रहा है।
News In Short
किसानों ने क्या कहा?
एक किसान ने कहा कि उनके परिवार ने 2005 में लगभग 1.82 हेक्टेयर भूमि पिंकसिटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. को बेची थी और पूरा भुगतान बैंकिंग चैनलों के माध्यम से प्राप्त किया था।
पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग
एक अन्य किसान मदन बलाई को भी एजेंसी ने मामले में तलब किया है। गांववालों से बिक्री दस्तावेज और अन्य बैंकिंग लेन-देन प्रस्तुत करने को कहा गया है।
भूमि माफिया नेटवर्क से जुड़ा मामला
अधिकारी पिछले दो दशकों में किए गए स्वामित्व रिकॉर्ड, सरेंडर डीड और पावर ऑफ अटॉर्नी की पड़ताल कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में धोखाधड़ी का पैटर्न साफ नजर आ रहा है और कई किसानों के साथ इसी तरह की गड़बड़ी की गई है।
रेरा में भी दर्ज है शिकायत
आरोप है कि परियोजना को झूठे दस्तावेज के आधार पर पंजीकृत किया गया और विवादों व मुकदमों को छिपाया गया। शिकायत में पंजीकरण रद्द करने और फोरेंसिक ऑडिट जैसी कार्रवाई की मांग भी की गई है।
300 से अधिक प्राथमिकी दर्ज
अब क्या होगा?
किसानों को उम्मीद है कि इस जांच से उन्हें न्याय मिलेगा और उनकी जमीन वापस दिलाई जाएगी। फिलहाल सभी की नजरें तीन जून पर टिकी हैं, जब किसान ईडी के सामने पेश होंगे और अपने दस्तावेज जमा करेंगे। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।
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