कटारिया के कार्यक्रम से दोनों मंत्रियों ने बनाई दूरी, जानिए क्या रही इसकी वजह

Ashish Bhardwaj | Jun 23, 2026, 20:28 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के अलवर में संघ से जुड़े एक कार्यक्रम में वहां के दोनों मंत्रियों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। राजनीतिक गलियारों में इसे आपसी धड़ेबंदी से जोड़कर देखा जा रहा है।

ऐसे समझें पूरा मामला

  • श्री सुन्दर सिंह जी भंडारी चैरिटेबल ट्रस्ट ने अलवर में व्याख्यान माला का आयोजन किया।
  • कार्यक्रम में पंजाब के गवर्नर गुलाबचंद कटारिया और स्पीकर वासुदेव देवनानी आए।
  • इस कार्यक्रम से अलवर के दोनों मंत्रियों भूपेंद्र यादव और संजय शर्मा ने दूरी बनाई।
  • दोनों मंत्रियों की अनुपस्थिति को स्थानीय भाजपा में गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है।

Alwar: ​सियासत में जब दिग्गज जुटते हैं तो नजरें इस बात पर भी टिकी होती हैं कि मंच पर कौन चमका और कौन पर्दे के पीछे खिसक गया। कुछ ऐसा ही नजारा राजस्थान के अलवर शहर में देखने को मिला।



मौका था श्री सुन्दर सिंह जी भंडारी चैरिटेबल ट्रस्ट उदयपुर द्वारा आयोजित व्याख्यान माला एवं विशिष्टजन सम्मान समारोह का। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से जुड़े इस आयोजन में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और वरिष्ठ प्रचारक शंकर लाल ने शिरकत की।



इस समागम में अलवर के दोनों कद्दावर मंत्री भूपेंद्र यादव और राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। राजनीति के जानकारों का कहना है कि मंत्रियों की यह ग़ैर-हाज़िरी सिर्फ एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि अलवर भाजपा में चल रही गहरी धड़ेबंदी का सीधा नतीजा है।





संघ का अलवर कार्यक्रम


​कटारिया का सालाना कार्यक्रम

दरअसल, यह आयोजन हर साल पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की सरपरस्ती में होता है। वे हर वर्ष इसके लिए प्रदेश के किसी नए शहर को चुनते हैं। इस बार बारी अलवर की थी।



बड़े चेहरों की मौजूदगी के कारण इस कार्यक्रम का सियासी और सामाजिक वजन बेहद खास था। लेकिन, जैसे ही मंत्रियों के आने के कयासों पर पानी फिरा, मंच की चर्चाएं ग्राउंड की गुटबाजी की ओर मुड़ गईं।



​पॉलिटिकल गलियारों में चर्चा आम है कि अलवर भाजपा इस समय दो मजबूत धड़ों में बंटी हुई है। इस पूरे कार्यक्रम की कमान पूर्व विधायक बनवारी लाल सिंघल और उनके करीबियों के हाथों में थी।



सिंघल के इस धड़े को स्थानीय राजनीति में राज्य के वन मंत्री संजय शर्मा का कट्टर विरोधी माना जाता है। बस, यही अंतर्विरोध इस बड़े समागम पर भी भारी पड़ गया।



​व्यस्तता का बहाना या अपनों से किनारा?

​आयोजन से जुड़े लोगों का दावा है कि कार्यक्रम का न्योता दोनों ही मंत्रियों को बेहद सलीके से भेजा गया था, लेकिन दोनों के न आने की अपनी-अपनी वजह सामने आईं।



​केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से जुड़े लोगों ने पुष्टि की कि दिल्ली में पहले से तय जरूरी व्यस्तताओं के कारण वे इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने अपनी असमर्थता पहले ही जता दी थी।



​सबसे ज्यादा हैरानी संजय शर्मा की अनुपस्थिति को लेकर रही। चर्चा है कि धुर विरोधी बनवारी लाल सिंघल के हाथ में कमान होने की वजह से संजय शर्मा ने ऐन वक्त पर अपना रूट बदल लिया।



वे कार्यक्रम के दिन अलवर में रहने के बजाय रणथंभौर के जंगलों में चले गए, जहां उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ लंबी बैठक की। हालांकि, उनके समर्थकों का तर्क है कि यह बैठक पहले से तय थी।



​मंत्रियों की गैरमौजूदगी में भी आए लोग

भले ही दोनों मंत्रियों ने कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी, लेकिन इसके बावजूद आयोजन में स्थानीय भाजपा नेताओं का जमावड़ा रहा। मंच से लेकर दीर्घा तक भाजपा और संघ के स्थानीय दिग्गज दिखे।


​


कार्यक्रम में भाजपा विधायक महंत बालक नाथ, विधायक सुखवंत सिंह और विधायक रमेश खींची


उपस्थित रहे। इनके अलावा डेयरी चेयरमैन नितिन सांगवान, भाजपा के जिला अध्यक्ष अशोक गुप्ता, उत्तर अलवर के जिला अध्यक्ष महासिंह चौधरी, पूर्व विधायक जयराम जाटव, मंगल राम कोली और मामन सिंह यादव की मौजूदगी रही।



​भले ही मंच से राष्ट्रवाद, सेवा और सुंदर सिंह भंडारी जी के विचारों की गंगा बही, लेकिन चर्चा सिर्फ इस बात पर रही कि दोनों मंत्रियों ने आखिर क्यों बनाई दूरी।



ये खबर भी पढे़:-

राजस्थान CET की तारीख घोषित, जानें क्या-क्या बदले नियम



गधे-घोड़ों की तरह बिक रहे MLA-MP, गहलोत ने भ्रष्टाचार पर सरकार को घेरा



RPS सत्य प्रकाश मीणा को किया APO, महिलाओं से अभद्रता का आरोप



8 प्रसूताओं की जिंदगी से खेलने वाली 25 दवाओं पर रोक, AIIMS को भेजी रिपोर्ट



Tags:
  • RSS
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
  • भूपेंद्र यादव
  • गुलाबचंद कटारिया
  • संजय शर्मा