जिसे बताया था नालायक, रिटायरमेंट के बाद उसे फिर से मिली नियुक्ति , किसकी शह पर मेहरबानी?

Ashish Bhardwaj | May 21, 2026, 17:16 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में अलवर की यूआईटी में विवादों में रहे एक्सईएन कुमार संभव अवस्थी की बैकडोर एंट्री हो गई है। उन्हें रिटायरमेंट के बाद फिर से एक साल के लिए नियुक्ति दी गई है। वे अलवर के एक मंत्री के करीबी हैं।

Alwar: राजस्थान में अलवर के नगर विकास न्यास (यूआईटी अलवर) में नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को उपकृत करने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यूआईटी से हाल ही में सेवानिवृत्त हुए एक्सईएन (अधिशासी अभियंता) कुमार संभव अवस्थी को स्वायत्त शासन विभाग ने रिटायरमेंट के बाद फिर से पे माइनस पेंशन नीति के तहत एक साल के लिए नियुक्ति दे दी है।



अवस्थी ने इस आदेश की प्रतिलिपि यूआईटी सचिव को सौंप दी है। वे अगले एक वर्ष तक दोबारा संस्थान में अपनी सेवाएं देंगे। यूआईटी सचिव स्नेहल धायगुड़े ने पुष्टि की है कि नियमानुसार उन्हें कार्य सौंपा जाएगा।



​लेकिन इस पुनर्नियुक्ति ने प्रशासनिक गलियारों में एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है-आखिर स्वायत्त शासन विभाग उस अधिकारी पर इतना मेहरबान क्यों है, जिसके खिलाफ खुद यूआईटी की सचिव ने बेहद गंभीर और नकारात्मक रिपोर्ट शासन को भेजी थी? यह पोस्टिंग किसके इशारे पर और किस राजनीतिक दबाव में की गई है, इसे लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं।





avasthi_page-0001


​जब सचिव की रिपोर्ट में खुला था कारनामों का चिट्ठा

​इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में जाएं तो यूआईटी सचिव स्नेहल धायगुड़े ने कुछ समय पहले शासन उप सचिव को एक बेहद तल्ख और तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजी थी।



इस रिपोर्ट में एक्सईएन कुमार संभव अवस्थी के सेवा विस्तार के प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसे सर्वथा अनुचित बताया गया था।



​सचिव ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट में लिखा था कि अवस्थी का व्यवहार न केवल आम जनता, बल्कि उच्चाधिकारियों और अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ भी अशिष्ट और अशोभनीय है।



सबसे गंभीर आरोप यह था कि अवस्थी अपनी सर्विस रिकॉर्ड बुक स्वयं के पास रखते थे और संस्थापन शाखा के आधिकारिक रिकॉर्ड्स, जैसे सीएल (आकस्मिक अवकाश) रजिस्टर के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ करते थे।



रिपोर्ट में स्पष्ट टिप्पणी थी कि उक्त अधिकारी में एक जिम्मेदार पद पर बने रहने के लिए वांछित मूल विशेषताओं और योग्यताओं का नितांत अभाव है।



​ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जिस अधिकारी को विभाग की स्थानीय मुखिया नालायक और अनुशासनहीन मान रही थीं, उसे रिटायरमेंट के बाद वापस लाने के पीछे कौन सी अदृश्य ताकत काम कर रही थी?





2-2025-12-23-17-02-46




3-2025-12-23-17-02-46


पदोन्नति और वेतनमान पर भी गहराया था विवाद

अवस्थी का विवादों से पुराना नाता रहा है। वह मूल रूप से एईएन (सहायक अभियंता) के पद पर थे, लेकिन लंबे समय से एक्सईएन का वेतन उठा रहे थे। साल 2021 में उन्हें अस्थाई आधार पर एक्सईएन का चार्ज दिया गया था।



मार्च 2022 में जब नियमित पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक हुई, तो जारी सूची में कुमार संभव अवस्थी का नाम ही गायब था, जिसके चलते उनका पदोन्नति आदेश निरस्त हो गया था। इसके बावजूद वे एक्सईएन का वेतन पाते रहे।



​मई 2025 के एक आदेश के अनुसार अप्रैल 2024 से उन्हें सहायक अभियंता (AEN) के पद पर ही माना गया था। अप्रैल 2025 की स्थाई वरिष्ठता सूची में उनका नाम 77वें नंबर पर था। यूडीएच जयपुर ने भी हाईकोर्ट के आदेशों के आलोक में इनकी सेवा अवधि बढ़ाने को लेकर तथ्यात्मक टिप्पणी मांगी थी। इसमें साफ कहा गया था कि इन्हें विस्तार देना जनहित और प्रशासनिक दृष्टि से कतई सही नहीं होगा।



​संजय के पत्र और इशारे का खेल!

इस पूरे मामले में राजनीतिक रसूख और पैरवी की बू साफ आ रही है। इससे पहले वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा को पत्र लिखकर अवस्थी की जमकर तारीफों के पुल बांधे थे।



मंत्री ने पत्र में लिखा था कि अवस्थी का व्यवहार उत्कृष्ट श्रेणी का है और उन्होंने अलवर शहर के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं तैयार की हैं। मंत्री ने तो उन्हें एसई (अधीक्षण अभियंता) का अतिरिक्त चार्ज देने तक की सिफारिश कर डाली थी।



​दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन वन मंत्री ने यह सिफारिशी पत्र लिखा, ठीक उसी दिन यूआईटी सचिव का कड़ा विरोध दर्ज कराने वाला पत्र भी शासन के पास पहुंच गया था। तब तो सेक्रेटरी के जवाब के बाद मामले को दबा दिया गया, लेकिन अब रिटायरमेंट के ठीक बाद बैकडोर एंट्री कराकर स्वायत्त शासन विभाग ने उन्हें एक साल का सेवा विस्तार दे दिया।





1-2025-12-23-17-02-46


​जनता पूछ रही सवाल

​प्रशासनिक हलकों में चर्चा गर्म है कि जब स्थानीय प्रशासन और विजिलेंस की रिपोर्ट अधिकारी के ट्रैक रिकॉर्ड को खराब बता रही थी, तो किन आकाओं के इशारे पर इस पुनर्नियुक्ति की फाइल को हरी झंडी दिखाई गई?



क्या अलवर यूआईटी में करोड़ों के विकास कार्यों और फाइलों के खेल को मैनेज करने के लिए इस चहेते अधिकारी की वापसी कराई गई है? रोचक बात यह है कि वन मंत्री संजय शर्मा अलवर शहर के रहने वाले हैं। अवस्थी मंत्री के करीबी बताए जाते हैं।



इस फैसले ने राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस और पारदर्शिता की नीति पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।



ये भी पढे़:-

​देश के गोल्ड लोन मार्केट में दक्षिण का दबदबा, पर राजस्थान भी बढ़ा रहा है कदम



रफ्तार के कहर ने बुझाया घर का इकलौता चिराग, मां पूछ रहीं- मेरे बेटे का क्या कसूर था?



अपराधी को पकड़ने के लिए सबूत चाहिए, तंत्र-मंत्र नहीं, हाई कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा?



NEET पेपर लीक पर सियासी घमासान, डोटासरा बोले- धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें





Tags:
  • संजय शर्मा
  • सेवानिवृत्त
  • झाबर सिंह खर्रा
  • एक्सईएन कुमार संभव अवस्थी
  • यूआईटी अलवर