जेडीसी और जोन उपायुक्त के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी: पुलिस कमिश्नर को 12 अक्टूबर को पेश करने के निर्देश
Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 09, 2026, 17:17 IST
भूखंड कब्जे पर गिरफ्तारी वारंट
जिला उपभोक्ता आयोग-2 ने जेडीसी और जोन उपायुक्त-9 के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। आयोग ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिए हैं कि दोनों अधिकारियों को 12 अक्टूबर को पेश किया जाए। यह आदेश कृष्णा के अवमानना प्रार्थना पत्र पर सुनवाई में दिया गया।मामला जेडीए की निलय कुंज आवास योजना में लॉटरी से मिले भूखंड के कब्जे का है।
जिला उपभोक्ता आयोग-2 ने जेडीसी और जोन उपायुक्त-9 के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। आयोग ने पुलिस कमिश्नर को दोनों अधिकारियों को 12 अक्टूबर को पेश कराने के निर्देश दिए हैं। आदेश कृष्णा के अवमानना प्रार्थना पत्र पर सुनवाई में दिया गया। परिवादी को निलय कुंज योजना में लॉटरी से भूखंड मिला था, पर कब्जा नहीं मिला। 2016 में आयोग ने परिवादी के पक्ष में फैसला दिया था। जेडीए की अपील राज्य और राष्ट्रीय आयोग में भी नहीं टिकी।
जेडीसी और जोन उपायुक्त-9 गिरफ्तारी वारंट का मामला सामने आया है। जिला उपभोक्ता आयोग-2 ने इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ वारंट जारी किए हैं। आयोग ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिए हैं कि दोनों को 12 अक्टूबर को पेश किया जाए। यह आदेश कृष्णा के अवमानना प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान दिया गया। मामला जेडीए की निलय कुंज आवास योजना से जुड़ा है। परिवादी का कहना है कि आयोग के आदेश के बाद भी उसे भूखंड का कब्जा नहीं मिला।
परिवादी ने जेडीए की निलय कुंज आवास योजना में आवेदन किया था। उसे लॉटरी से भूखंड आवंटित हुआ था। लेकिन तय समय पर भूखंड का कब्जा नहीं दिया गया। इसके बाद परिवादी ने 2012 में जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद पेश किया। परिवाद यानी उपभोक्ता आयोग में दी जाने वाली शिकायत। सवाल यह है कि आयोग के फैसले के बाद भी कब्जा क्यों नहीं मिला?
आयोग ने 2016 में परिवादी के पक्ष में फैसला दिया। उसने जेडीए को निर्देश दिए कि वह परिवादी को कब्जा पत्र जारी करे। जेडीए ने इस आदेश के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में अपील की। दोनों जगह जिला उपभोक्ता आयोग का आदेश बरकरार रहा। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग जेडीए अपील खारिज करने जैसी स्थिति सोर्स में इसी रूप में लिखी है कि आदेश बरकरार रहा। परिवादी का कहना है कि इसके बावजूद जेडीए ने आज तक उसे भूखंड का कब्जा नहीं दिया।
आदेश की पालना न होने पर परिवादी ने 2020 में आयोग में अवमानना प्रार्थना पत्र दायर किया। अवमानना यानी आदेश न मानना। प्रार्थना पत्र में परिवादी ने कहा कि उसे लॉटरी में जो भूखंड मिला था, उसे जेडीए ने किसी दूसरे व्यक्ति को आवंटित कर दिया। इसके बाद उसे दूसरा भूखंड देने का आश्वासन दिया गया। वह भूखंड भी किसी दूसरे को आवंटित कर दिया गया।
परिवादी का कहना है कि फिर उसे निलय कुंज योजना फेज-2 में भूखंड आवंटित किया गया। आरोप है कि जेडीए ने इस प्लॉट की चौड़ाई कम करके क्षेत्रफल घटा दिया। इस वजह से परिवादी को असल कब्जा नहीं मिला। ये बातें परिवादी के प्रार्थना पत्र के आधार पर लिखी गई हैं। इन पर जेडीए का जवाब सोर्स में नहीं है।
अवमानना प्रार्थना पत्र की सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग-2 ने जेडीसी और जोन उपायुक्त-9 के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए। आयोग ने पुलिस कमिश्नर को दोनों अधिकारियों को 12 अक्टूबर को पेश करने के निर्देश दिए। सोर्स में दोनों अधिकारियों के नाम नहीं हैं। वारंट किस दिन जारी हुआ, यह भी नहीं बताया गया है।
अब नजर इस पर रहेगी कि 12 अक्टूबर को दोनों अधिकारी आयोग के सामने पेश होते हैं या नहीं। यह भी देखना होगा कि जेडीए इस आदेश पर क्या रुख अपनाता है और परिवादी को भूखंड का कब्जा मिलता है या नहीं।
यह खबर क्यों जरूरी है:
आम लोग जेडीए की योजनाओं में लॉटरी से भूखंड मिलने की उम्मीद करते हैं। अगर आवंटन के बाद भी कब्जा न मिले, तो वे उपभोक्ता आयोग का रास्ता अपनाते हैं। इस मामले में परिवाद 2012 में दायर हुआ था और आयोग का आदेश 2016 में आया था। उसके बाद भी कब्जा न मिलने की बात कही जा रही है। अधिकारियों के खिलाफ वारंट यह दिखाते हैं कि आयोग अपने आदेशों की पालना को गंभीरता से लेता है। यह मामला सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही का सवाल उठाता है।
FAQs:
जेडीसी और जोन उपायुक्त-9 गिरफ्तारी वारंट का मामला सामने आया है। जिला उपभोक्ता आयोग-2 ने इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ वारंट जारी किए हैं। आयोग ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिए हैं कि दोनों को 12 अक्टूबर को पेश किया जाए। यह आदेश कृष्णा के अवमानना प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान दिया गया। मामला जेडीए की निलय कुंज आवास योजना से जुड़ा है। परिवादी का कहना है कि आयोग के आदेश के बाद भी उसे भूखंड का कब्जा नहीं मिला।
निलय कुंज आवास योजना जेडीए में परिवादी को क्या मिला था?
2016 के आदेश में आयोग ने क्या कहा था?
जेडीए भूखंड कब्जा नहीं दिया अवमानना : 2020 में क्या हुआ?
परिवादी का कहना है कि फिर उसे निलय कुंज योजना फेज-2 में भूखंड आवंटित किया गया। आरोप है कि जेडीए ने इस प्लॉट की चौड़ाई कम करके क्षेत्रफल घटा दिया। इस वजह से परिवादी को असल कब्जा नहीं मिला। ये बातें परिवादी के प्रार्थना पत्र के आधार पर लिखी गई हैं। इन पर जेडीए का जवाब सोर्स में नहीं है।
गिरफ्तारी वारंट और 12 अक्टूबर को पेश करने के निर्देश
अब आगे क्या?
यह खबर क्यों जरूरी है:
आम लोग जेडीए की योजनाओं में लॉटरी से भूखंड मिलने की उम्मीद करते हैं। अगर आवंटन के बाद भी कब्जा न मिले, तो वे उपभोक्ता आयोग का रास्ता अपनाते हैं। इस मामले में परिवाद 2012 में दायर हुआ था और आयोग का आदेश 2016 में आया था। उसके बाद भी कब्जा न मिलने की बात कही जा रही है। अधिकारियों के खिलाफ वारंट यह दिखाते हैं कि आयोग अपने आदेशों की पालना को गंभीरता से लेता है। यह मामला सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही का सवाल उठाता है।
FAQs:
- जिला उपभोक्ता आयोग-2 ने जेडीसी और जोन उपायुक्त-9 के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट क्यों जारी किया?
जिला उपभोक्ता आयोग-2 ने जेडीसी और जोन उपायुक्त-9 के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट इसलिए जारी किया क्योंकि वे आयोग के आदेश का पालन नहीं कर रहे थे, जिसके तहत उन्हें निलय कुंज योजना में भूखंड का कब्जा देने का निर्देश दिया गया था। - 12 अक्टूबर को जेडीसी और जोन उपायुक्त-9 को आयोग के सामने पेश होने का क्या महत्व है?
12 अक्टूबर को जेडीसी और जोन उपायुक्त-9 को आयोग के सामने पेश होने का महत्व इस बात में है कि आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि उसके आदेशों का पालन हो रहा है और यदि अधिकारी पेश नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। - आयोग के 2016 के आदेश के बावजूद भूखंड का कब्जा क्यों नहीं मिला?
आयोग के 2016 के आदेश के बावजूद भूखंड का कब्जा नहीं मिला क्योंकि जेडीए ने आदेश का पालन नहीं किया और परिवादी का आरोप है कि जेडीए ने उसे आवंटित भूखंड को किसी और को दे दिया था।
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