राजस्थान में संवैधानिक संकट, पंचायत-निकाय चुनावों में देरी पर गहलोत का कड़ा प्रहार

Mukesh Sharma | Apr 08, 2026, 12:53 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने पंचायत—निकाय चुनावों में हो रही देरी पर प्रदेश की भजनलाल सरकार को घेरा। उन्होंने अनुच्छेद 243 का हवाला देते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या और अदालती आदेशों की अवहेलना बताया।

News In Short

  • गहलोत ने राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव में हो रही देरी के लिए सरकार को घेरा।
  • गहलोत ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 243E और 243U की अवहेलना।
  • उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सुनियोजित प्रहार बताया।
  • गहलोत बोले, चुनाव सरकार की इच्छा नहीं, बल्कि बाध्यकारी संवैधानिक जिम्मेदारी
  • हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना संवैधानिक विघटन है

News In Detail

राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने प्रदेश में पंचायत-निकाय चुनावों में हो रही देरी को संवैधानिक संकट करार दिया है। उन्होंने अनुच्छेद 243 का हवाला देते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या और अदालती आदेशों की घोर अवहेलना बताया। गहलोत ने बुधवार सुबह एक लंबी सोशल मीडिया पोस्ट करके राजस्थान की भजनजाल सरकार को घेरा।



उन्होंने आरोप लगाया है कि राजस्थान में पिछले एक साल से अधिक समय से पंचायतों और नगरीय निकायों के चुनाव नहीं कराए गए हैं, जो सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 243E, 243U और 243K का उल्लंघन है। यह प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सुनियोजित प्रहार है।



सरकार की इच्छा का विषय नहीं

पूर्व सीएम गहलोत ने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा है कि अनुच्छेद 243-E और 243-U के तहत पंचायतों और निकायों का कार्यकाल 5 वर्ष तय है। समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है।



राज्य निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संस्था है। चुनाव कराना सरकार की मर्जी पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह एक संवैधानिक दायित्व है। एक साल से अधिक समय तक प्रशासकों की नियुक्ति रखना जनता के मताधिकार को कुचलने जैसा है।



वन स्टेट-वन इलेक्शन तो बहाना

पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि परिसीमन, पुनर्गठन और वन स्टेट वन इलेक्शन जैसे तर्क केवल चुनाव टालने के बहाने हैं। उन्होंने 2021 के विकास किशनराव गवली मामले का हवाला देते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि प्रशासनिक कारण चुनाव टालने का वैध आधार नहीं हो सकते।



हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी

गहलोत ने याद दिलाया कि राजस्थान हाईकोर्ट ने नवंबर 2025 में बार-बार चुनाव कराने के निर्देश दिए, लेकिन सरकार ने हर बार इन्हें नजरअंदाज किया। अदालत ने 439 याचिकाओं पर निर्णय देते हुए 14 अप्रैल 2026 की अंतिम समय सीमा तय की थी। सुप्रीम कोर्ट का सरकार की अपील खारिज किए जाने के बाद भी सरकार ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई।



यह स्पष्ट संवैधानिक विघटन

पूर्व सीएम ने कहा है कि जब कोई सरकार बार-बार संविधान की मूल भावना और अदालती निर्देशों की अवहेलना करती है तो वह संवैधानिक ​विघटन जैसी स्थिति होती है। गहलोत ने 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के तहत विकेंद्रीकरण और स्थानीय स्वशासन और जनता की भागीदारी को कुचलने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।



राजस्थान की जनता चुप नहीं बैठेगी

गहलोत ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि राजस्थान की जनता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलते हुए चुपचाप स्वीकार नहीं करेगी। लोकतंत्र केवल सत्ता चलाने का माध्यम नहीं है बल्कि संविधान के प्रति जवाबदेही है।



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