राम मंदिर ट्रस्ट भंग कर योगी को बनाएं नया अध्यक्ष, गहलोत ने की मांग

Mukesh Sharma | Jul 07, 2026, 21:35 IST
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गहलोत ने ट्रस्ट भंग करने और योगी को अध्यक्ष बनाने की मांग की
राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। उन्होंने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को नए ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाने का सुझाव भी दिया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर नई दिल्ली में पूर्व सीएम गहलोत की प्रेस कॉन्फ्रेंस।
  • सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच और मौजूदा ट्रस्ट को भंग करने की मांग।
  • गहलोत का बड़ा सुझाव, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संभालें नए ट्रस्ट की कमान।
  • राजस्थान सरकार ने कानूनी अड़चनें दूर कर मंदिर के लिए भिजवाया था पवित्र पत्थर।

राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने राममंदिर चोरी की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में करवाने व मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग की है। गहलोत ने नया ट्रस्ट बनाकर यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ को उसका अध्यक्ष बनने का सुझाव भी दिया है।



गहलोत ने राम मंदिर में करोडों रुपए की चोरी के मामले में मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की।



जनता के साथ विश्वासघात

गहलोत ने कहा कि राम मंदिर निर्माण में राजस्थान के भरतपुर जिले के बंसी पहाड़पुर के पत्थरों के ऐतिहासिक योगदान का ज़िक्र किय।



उन्होंने कहा कि राजस्थान के लोगों का इस मंदिर से बेहद गहरा और पवित्र भावनात्मक लगाव है। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तमाम कानूनी अड़चनों को दूर कर मंदिर निर्माण के लिए लीगल तरीके से पत्थर भिजवाया था।



ऐसे में इतने पवित्र स्थान पर करोड़ों रुपये के चढ़ावे की कथित चोरी होना देश की आम जनता के भरोसे के साथ एक बड़ा विश्वासघात है।



चंपत राय और नृपेंद्र मिश्रा ने किया था संपर्क

गहलोत ने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू होने के समय भरतपुर के बंसी पहाड़पुर इलाके में बड़े पैमाने पर अवैध खनन चल रहा था। यही पत्थर मंदिर के लिए ले जाया जा रहा था।



उस समय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और उनके सहयोगी दिनेश मुझसे जयपुर में आकर मिले थे।



मैंने उनसे साफ शब्दों में कहा था कि आप राम मंदिर जैसा पवित्र और ऐतिहासिक काम करने जा रहे हैं। इसलिए इस महान कार्य में किसी भी तरह के अवैध पत्थर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।



वहां केवल लीगल माइनिंग का प्रमाणित पत्थर ही ले जाना चाहिए। ताकि मंदिर की पवित्रता पर कोई आंच न आए।



मिलकर दूर कराई थी फॉरेस्ट लैंड की अड़चन

गहलोत ने बताया कि बंसी पहाड़पुर का वह मुख्य माइनिंग एरिया वन्यजीव और वन विभाग की सीमा में आता था। इसलिए वहां से कानूनी रूप से पत्थर निकालना लगभग असंभव था।



यह मामला इतना गंभीर था कि बात सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच गई। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव और राम मंदिर ट्रस्ट के भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने मुख्यमंत्री कार्यालय राजस्थान से संपर्क साधा।



गहलोत ने कहा कि हमने पूरे मामले की गंभीरता को समझा। जनभावनाओं का आदर किया। राज्य सरकार की ओर से उस पूरे क्षेत्र को फॉरेस्ट लैंड की केटेगरी से बाहर निकालने की सिफारिश केंद्र को भेजी।



राम मंदिर का मामला होने के कारण फाइलों को बहुत तेजी से क्लियर करवाया। वरना जिन प्रशासनिक कामों में बरसों लग जाते हैं,उसे उनकी सरकार ने आसानी से पूरा करवाकर कानूनी तरीके से पत्थर उपलब्ध कराया। उस वक्त ट्रस्ट की ओर से हमें धन्यवाद भी दिया गया था।



पवित्र काम में चोरी, देश के साथ विश्वासघात

बंसी पहाड़पुर के पत्थरों की इस कानूनी लड़ाई का हवाला देते हुए गहलोत ने वर्तमान में चल रहे दान चोरी विवाद पर बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया।



उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि जिस मंदिर के लिए पूरे देश के लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई से दान दिया। राजस्थान सरकार ने हर कानूनी नियम में ढिलाई देकर पत्थर भिजवाया। आज उसी पवित्र कार्य के चढ़ावे में इतनी बड़ी वित्तीय हेराफेरी के आरोप लग रहे हैं।



गहलोत ने कहा कि इस घटना ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (BJP-RSS) के चाल, चरित्र और चेहरे को बेनकाब कर दिया है। आज देश के हर राज्य, हर गांव और हर घर में इस गबन की चर्चा हो रही है, जिसने करोड़ों सनातनियों की आस्था को गहरी ठेस पहुंचाई है।



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