विधायक पुत्री के प्रमाण-पत्र जांचने हॉस्पिटल पहुंची SOG, फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट का है मामला

Ashish Bhardwaj | Apr 22, 2026, 16:28 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान एसओजी ने ब्यावर के भाजपा विधायक की पुत्री के फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र मामले की जांच शुरू कर दी है। दस्तावेजों की जांच के लिए एसओजी ब्यावर के अमृत कौर चिकित्सालय में पड़ताल कर रही है।

News In Short

  • ब्यावर विधायक पुत्री कंचन चौहान के दिव्यांग प्रमाण पत्र की जांच एसओजी ने शुरू की।
  • एसओजी ने ब्यावर के चिकित्सालय में दिव्यांग प्रमाण पत्र से जुड़े दस्तावेजों की जांच की।
  • दिव्यांग प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़े की शिकायतों के बाद मामला एसओजी के पास पहुंचा।
  • प्रदेशभर में दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने वालों की जांच जारी है।
  • विधायक पुत्री के मामले ने पूरे प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं को जन्म दिया है।

News In Detail

राजस्थान के ब्यावर विधायक शंकर सिंह रावत की पुत्री कंचन के फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र की जांच की जा रही है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की टीम ने ब्यावर के राजकीय अमृत कौर चिकित्सालय में पहुंचकर दस्तावेजों की पड़ताल की। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने के समय क्या कोई अनियमितताएं की गई थीं। जिन चिकित्सकों ने यह प्रमाण पत्र जारी किया, उनकी भूमिका क्या थी।



एसओजी कर रही है जांच

एसओजी टीम ने ब्यावर के राजकीय अमृत कौर चिकित्सालय में दिव्यांग प्रमाण पत्र से जुड़े सभी रिकॉर्ड की गहन जांच की। उन्होंने अस्पताल में दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया, संबंधित चिकित्सा बोर्ड की जानकारी और प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की। एसओजी की कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था ताकि कोई अप्रत्याशित हस्तक्षेप न हो।



पीएमओ कार्यालय में जांच

एसओजी की टीम सीधे पीएमओ (प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर) कार्यालय पहुंची, जहां उन्होंने दिव्यांग प्रमाण पत्र से संबंधित दस्तावेजों और अहम् दस्तावेजों की जांच की। टीम ने कई दस्तावेजों की मांग की, जिनकी गहन जांच की जाएगी।


प्रारंभिक स्तर पर ही इस प्रमाण पत्र में अनियमितताओं की शिकायतें आई थीं। इसके बाद एसओजी ने मामले को अपने हाथ में लिया और अब इसकी गहन जांच कर रही है।



प्रदेशभर में हो रही जांच

राज्यभर में दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्त कर्मचारियों के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। एसओजी टीम ने इस मामले में ब्यावर के अमृत कौर चिकित्सालय के रिकॉर्ड की भी जांच की। अस्पताल में दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए गठित बोर्ड, प्रक्रिया, जांच के तरीकों और अन्य पहलुओं की जानकारी ली गई। जांच के दौरान पीएमओ कार्यालय में आवाजाही कम रही, और एसओजी के आने से पहले मंत्रालयिक विंग ने सारे वाहन हटा दिए थे ताकि जांच प्रक्रिया बाधित न हो।



विधायक की पुत्री का मामला

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दिव्यांगता प्रमाण पत्र से संबंधित शिकायतें विधायक शंकरसिंह रावत की पुत्री तहसीलदार कंचन से जुड़ी हुई थीं। कंचन के प्रमाण पत्र का मामला प्रदेशभर में खासा चर्चा में था। हालांकि, जांच टीम ने अभी तक यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है कि उन्होंने किन-किन फाइलों की जांच की है, लेकिन इस प्रकरण का पूरे राज्य में गहनता से परीक्षण किया जा रहा है।



SOG कर रही है हर पहलू की जांच

इस मामले में जांच के दौरान एसओजी के अधिकारियों का ध्यान कई प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित है। इनमें दिव्यांग प्रमाण पत्र का सही तरीके से जारी होना, किस तारीख को और किस चिकित्सक द्वारा जारी किया गया, प्रमाण पत्र जारी करने से पहले कौन-कौन सी जांच की गई, और जांच किस लैब में की गई जैसी जानकारी शामिल हैं। प्रदेशभर में उन सभी व्यक्तियों की जांच हो रही है जिन्होंने दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी।



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