पूर्वी-पश्चिमी राजस्थान को जोड़ेगा नया एक्सप्रेस-वे, 7 घंटे का सफर होगा 3 घंटे में

Ashish Bhardwaj | Sept 07, 2026, 11:09 IST
भरतपुर-ब्यावर
राजस्थान में भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का निर्माण शुरू होगा। 277 किमी लंबे इस हाईवे पर 8,656 करोड़ रुपए खर्च होंगे, 6 जिलों को फायदा मिलेगा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • भरतपुर-ब्यावर एक्सप्रेस-वे से 7 घंटे का सफर 3 घंटे में होगा।
  • 277 किमी लंबा 4 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनेगा।
  • 8,656 करोड़ रुपए की लागत से बदलेगी कनेक्टिविटी।
  • 6 जिलों से गुजरेगा नया एक्सप्रेस-वे, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर।
  • 210 गांवों की जमीन से बनेगा राजस्थान का नया कॉरिडोर।

राजस्थान में पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच तेज आवागमन के लिए भरतपुर ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह 277 किलोमीटर लंबा 4 लेन एक्सप्रेस-वे जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जिलों से गुजरेगा। इस पर करीब 8,656 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके लिए 210 गांवों की करीब 2,600 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी।



7 घंटे का सफर घटकर होगा 3 घंटे

इस एक्सप्रेस-वे के बनने से फागी से राजस्थान-उत्तर प्रदेश सीमा के बीच यात्रा का समय भी काफी कम हो जाएगा। अभी जो सफर करीब 7 घंटे में पूरा होता है, वह घटकर करीब 2.5 से 3 घंटे रहने का अनुमान है।



भरतपुर-ब्यावर एक्सप्रेस-वे एक्सेस कंट्रोल्ड होगा और इस पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा रखी जाएगी। इस परियोजना पर कुल मिलाकर करीब 8,656 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।



भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे


परियोजना में क्या-क्या बनेगा

इस परियोजना के तहत 30 छोटे-बड़े पुल, रेललाइन पर चार आरओबी (ROB – Road Over Bridge), सात फ्लाईओवर, 10 इंटरचेंज और वाहनों के लिए 179 छोटे-बड़े अंडरपास बनाए जाएंगे।



यह एक्सप्रेस-वे ब्यावर-किशनगढ़ क्षेत्र को भरतपुर से जोड़ते हुए अमृतसर-जामनगर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे, एनएच-448 और एनएच-21 के बीच आर्थिक गलियारे को मजबूत करेगा। इससे बढ़ती औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच एनएच-48 और एनएच-21 पर यातायात का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।



करौली में सबसे ज्यादा असर, सवा लाख लोग प्रभावित

करौली जिले में एक्सप्रेस-वे की लंबाई 58.8 किलोमीटर होगी। करौली, नादौती, हिंडौन, श्रीमहावीरजी और सूरौठ तहसीलों के 49 गांवों में 2,256 खसरों की जमीन ली जाएगी।



इसमें 637.64 हेक्टेयर निजी भूमि और 35.42 हेक्टेयर सरकारी भूमि शामिल है। इससे करौली जिले में 26,539 परिवारों के करीब 1,06,156 लोग प्रभावित होंगे। परियोजना के लिए करीब 7,122 पेड़ों की कटाई भी प्रस्तावित है। इस परियोजना को लेकर अंतिम सामाजिक समाघात निर्धारण रिपोर्ट पहले ही जारी हो चुकी है।



90 मीटर चौड़ा होगा कॉरिडोर

एक्सप्रेस-वे का कॉरिडोर करीब 90 मीटर चौड़ा होगा और इसकी ऊंचाई 2.5 से 7 मीटर तक रहेगी। इस परियोजना से राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच माल और यात्री परिवहन के लिए एक नया वैकल्पिक मार्ग मिलेगा।



किन्हें मिलेगा सीधा फायदा

भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनने से जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जैसे जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रा के समय और ईंधन खर्च दोनों में कमी आने की उम्मीद है।



इस एक्सप्रेस-वे से मौजूदा सड़कों और हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव भी घटेगा। किसानों को अपनी कृषि उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी। साथ ही लॉजिस्टिक्स, उद्योग, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलने से रोजगार और निवेश के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। इससे पूर्वी राजस्थान के शहरों और गांवों का आर्थिक विकास भी तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।



FAQ

  1. भरतपुर-ब्यावर एक्सप्रेस-वे कितना लंबा होगा?
    यह एक्सप्रेस-वे 277 किलोमीटर लंबा होगा और 4 लेन का होगा। यह जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जिलों से होकर गुजरेगा।
  2. भरतपुर-ब्यावर एक्सप्रेस-वे परियोजना पर कितना खर्च आएगा?
    इस परियोजना पर करीब 8,656 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसमें 5,231 करोड़ रुपए सिविल कार्य पर और 2,640 करोड़ रुपए भूमि अवाप्ति पर खर्च होंगे।
  3. भरतपुर-ब्यावर एक्सप्रेस-वे से क्या फायदा होगा?
    इससे फागी से उत्तर प्रदेश सीमा तक का सफर 7 घंटे से घटकर करीब 3 घंटे रह जाएगा। इससे यात्रा का समय, ईंधन खर्च और मौजूदा सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा।

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