जिला परिषद में 189 अभ्यर्थी बने फर्जी एलडीसी, 65 पन्नों की जांच रिपोर्ट ने खोले राज
News In Short
- राजस्थान में सरकारी नौकरियों में धांधलियों का एक और बड़ा मामला सामने आया।
- भरतपुर जिला परिषद में कनिष्ठ लिपिक भर्ती में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं उजागर।
- हाईलेवल जांच टीम की रिपोर्ट में 189 अभ्यर्थियों का चयन गलत पाया गया।
- नौकरी के समय दस्तावेजों के सत्यापन में अधिकारियों ने घोर लापरवाही बरती।
- इस घोटाले की जांच एसओजी से कराने की कड़े शब्दों में अनुशंसा की गई है।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में सरकारी नौकरियों में धांधलियों का एक और बड़ा मामला सामने आया है। भरतपुर जिला परिषद द्वारा वर्ष 2013 में की गई कनिष्ठ लिपिक (एलडीसी) भर्ती में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं उजागर हुई हैं।
राज्य स्तरीय 13 सदस्यीय हाईलेवल जांच टीम ने 65 पन्नों की गोपनीय जांच रिपोर्ट में इस पूरे घोटाले की पोल खोल कर रख दी है। रिपोर्ट के अनुसार नियमों को ताक पर रखकर करीब 189 ऐसे अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया, जो इस पद के योग्य ही नहीं थे।
जांच कमेटी ने इस पूरे मामले में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार और मिलीभगत की पुष्टि करते हुए पूरी रिपोर्ट पंचायती राज विभाग के शासन सचिव को सौंप दी है। साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पूरे घोटाले की जांच एसओजी (Special Operations Group - SOG) से कराने की कड़े शब्दों में अनुशंसा की गई है।
दस्तावेज जांच में बरती गई घोर लापरवाही
जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों ने जानबूझकर नियमों की अनदेखी की। अभ्यर्थियों के शैक्षणिक और अनुभव संबंधी दस्तावेजों (Documents) के सत्यापन में घोर लापरवाही बरती गई। अधिकारियों द्वारा न तो भर्ती के दौरान उचित निगरानी रखी गई और न ही प्रमाण पत्रों की बारीकी से जांच की गई।
जांच टीम ने पाया कि कई अभ्यर्थियों ने चयन पाने के लिए पूरी तरह से फर्जी और संदिग्ध शैक्षणिक व अनुभव प्रमाण पत्र लगाए थे। कमेटी ने अब इन सभी दोषियों और फर्जीवाड़ा करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की है।
गड़बड़ियों का पूरा लेखा-जोखा (आंकड़ों की नजर से)
जांच रिपोर्ट में सिलसिलेवार ढंग से उन सभी कमियों और फर्जीवाड़े का ब्योरा दिया गया है, जिसके दम पर अपात्र लोग सरकारी नौकरी हथियाने में कामयाब रहे। गड़बड़ियों की सूची इस प्रकार है:
49 अभ्यर्थी (दोहरा अनुभव): ऐसे 49 अभ्यर्थी पाए गए जिन्होंने एक ही समय अवधि के दौरान दो अलग-अलग जगहों का अनुभव प्रमाण पत्र आवेदन के साथ संलग्न कर दिया, जो व्यावहारिक रूप से असंभव है।
08 अभ्यर्थी (बिना काम किए अनुभव): इन 8 अभ्यर्थियों ने कभी धरातल पर काम ही नहीं किया, लेकिन सांठगांठ करके अनुभव प्रमाण पत्र हासिल कर लिया।
02 अभ्यर्थी (संदिग्ध अनुभव): इनके अनुभव प्रमाण पत्रों की सत्यता पूरी तरह संदिग्ध पाई गई है।
01 अभ्यर्थी (लापता रिकॉर्ड): एक अभ्यर्थी ऐसा मिला जिसके शैक्षणिक दस्तावेजों का कोई भी डेटा संबंधित विभाग की वेबसाइट या रिकॉर्ड पर उपलब्ध ही नहीं है।
04 अभ्यर्थी (संदिग्ध मार्कशीट): इन 4 अभ्यर्थियों की 12वीं कक्षा की अंकतालिकाएं (मार्कशीट) पूरी तरह संदिग्ध और फर्जी प्रतीत होती हैं।
21 अभ्यर्थी (अमान्य कंप्यूटर योग्यता): तकनीकी योग्यता के नाम पर इन 21 अभ्यर्थियों ने ऐसे कंप्यूटर सर्टिफिकेट लगाए जो पूरी तरह अमान्य थे।
50 अभ्यर्थी (ओवरलैप अवधि): इन अभ्यर्थियों की अनुभव अवधि अन्य कार्यों या शैक्षणिक सत्रों के साथ ओवरलैप (एक ही समय में दो काम) हो रही थी।
17 अभ्यर्थी (मेरिट से बाहर): ये वो अभ्यर्थी थे जो चयन सूची की मूल मेरिट लिस्ट से बाहर हो चुके थे, लेकिन बैकडोर एंट्री के जरिए इन्हें नौकरी दे दी गई।
21 अभ्यर्थी (कट-ऑफ से कम अंक): इनके प्राप्तांक निर्धारित कट-ऑफ मार्क्स से भी कम थे, फिर भी इन्हें चयनित घोषित कर दिया गया।
16 अभ्यर्थी (बिना कट-ऑफ नौकरी): ये अभ्यर्थी बिना किसी वैध कट-ऑफ प्रक्रिया को पार किए सीधे नौकरी पाने में सफल रहे।
अन्य जिलों में भी फैला फर्जी डिग्री का मकड़जाल
यह मामला सिर्फ भरतपुर तक ही सीमित नहीं है। राज्य स्तरीय टीम फिलहाल जिलावार तरीके से कनिष्ठ लिपिक भर्ती-2013 के दस्तावेजों की स्क्रूटनी कर रही है। जांच में सामने आया है कि जयपुर जिला परिषद और अलवर में भी कई लिपिक फर्जी पाए गए हैं।
अलवर जिला परिषद ने संदिग्ध दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। वहीं, बीकानेर में तो इससे भी बड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया, जहां वर्ष 2017 में ही 49 फर्जी लिपिकों की सेवाएं समाप्त की जानी थीं, लेकिन रसूख और ढिलाई के चलते उन्हें अब तक नहीं हटाया गया। इस पर शासन सचिव ने कड़ी नाराजगी जताते हुए बीकानेर जिला परिषद से अब तक कार्रवाई न होने पर जवाब तलब किया है।
प्रशासन का पक्ष
इस पूरे मामले पर भरतपुर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जुगल सिंह का कहना है कि लिपिक भर्ती की यह 65 पन्नों की जांच रिपोर्ट अभी आधिकारिक रूप से मेरे पास नहीं पहुंची है। जैसे ही राज्य सरकार की ओर से हमें इस संबंध में निर्देश या रिपोर्ट प्राप्त होगी, दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त से सख्त एक्शन लिया जाएगा।
एक तरफ जहां प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवा दिन-रात मेहनत कर पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं के दौर से गुजर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों और जालसाजों की मिलीभगत का यह खेल तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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