IAS के खिलाफ महिला कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, गुलाबी कपड़ों में दफ्तर पहुंचकर जताया विरोध
Ashish Bhardwaj | May 20, 2026, 12:10 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में आईएएस डॉ. समित शर्मा के खिलाफ महिला कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। ये महिला कर्मचारी सहकारिता सचिव और रजिस्ट्रार डॉ. समित की महिलाओं की छुट्टियों को लेकर की गई टिप्पणी का विरोध कर रही हैं।
News In Short
यह विरोध डॉ. समित की महिलाओं की छुट्टियों को लेकर की गई टिप्पणी पर है।
विरोध में महिला कर्मचारी गुलाबी रंग के कपड़े (पिंक ड्रेस) पहनकर दफ्तर पहुंचीं।
महिला कर्मियों ने अपनी इस मुहिम को पिंक फॉर रेस्पेक्ट का नाम दिया।
आईएएस ने वीसी के दौरान कहा था कि महिलाएं बहाने बनाकर छुट्टियां लेती हैं।
News In Detail
बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी गुलाबी रंग के कपड़े (पिंक ड्रेस) पहनकर दफ्तर पहुंचीं और अपना विरोध दर्ज कराया। महिला कर्मियों ने इस मुहिम को पिंक फॉर रेस्पेक्ट (सम्मान के लिए गुलाबी) का नाम दिया है। इस पूरे मामले को लेकर एसोसिएशन ऑफ राजस्थान को-ऑपरेटिव सबऑर्डिनेट सर्विसेज ने सीधे मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मामले में निष्पक्ष हस्तक्षेप और आवश्यक कार्रवाई की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा विवाद?
एसोसिएशन और महिला कर्मचारियों का आरोप है कि सचिव ने वीसी के दौरान कहा, महिलाएं बहाने बनाकर छुट्टियां लेती हैं। कभी मैटरनिटी लीव (मातृत्व अवकाश), कभी चाइल्ड केयर लीव (संतान देखभाल अवकाश) तो कभी अबॉर्शन लीव (गर्भपात अवकाश)... इधर, एसोसिएशन के पदाधिकारी तो आ रहे हैं।
महिला कर्मचारियों का कहना है कि सचिव ने यहां तक सवाल उठा दिया कि अबॉर्शन लीव खुशी से कौन लेता है? इस टिप्पणी से आहत महिला कर्मियों का तर्क है कि कोई भी महिला स्वेच्छा से अबॉर्शन जैसी दर्दनाक शारीरिक और मानसिक स्थिति का सामना नहीं करना चाहती।
ऐसी संवेदनशील और कानूनी रूप से प्रदत्त छुट्टियों पर इस तरह का उपहास उड़ाना महिला गरिमा, उनके मातृत्व और मातुल सम्मान के सीधे खिलाफ है। इसी के विरोध में महिलाओं ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।
प्रशासनिक पदों पर महिलाओं की मजबूत स्थिति
राज्य में करीब 8 कलेक्टर, 7 एसपी (SP) समेत 500 से अधिक महिला अधिकारी कार्यरत हैं, जिनमें आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS) और आरएएस (RAS) अधिकारी शामिल हैं।
गृह, स्वास्थ्य, खान-पेट्रोलियम, बिजली, कार्मिक, पर्यटन, वित्त-खनन और कृषि जैसे सबसे महत्वपूर्ण विभागों की कमान महिला अफसरों के हाथ में है।
आठ जिलों में कलेक्टर तो सात जिलों में एसपी की जिम्मेदारी महिलाएं संभाल रही हैं। इसके अलावा दो संभागों में आयुक्त का पद भी महिलाओं के पास है। केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर तैनात महिला अधिकारी भी बेहद प्राइम पोस्ट पर काम कर रही हैं। ऐसे में महिला कर्मचारियों के प्रति ऐसी टिप्पणी को प्रशासनिक हलकों में भी बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है।
आईएएस डॉ. समित का पक्ष
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर सहकारिता विभाग के सचिव डॉ. समित शर्मा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया है। उन्होंने इसे एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए कहा कि बैठक में किसी भी प्रकार की अभद्र या गलत टिप्पणी नहीं की गई थी।
डॉ. समित के अनुसार मंत्री के निर्देशानुसार हमने विभाग में सभी कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी (Biometric Attendance) की व्यवस्था लागू की है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि कर्मचारी समय पर दफ्तर आएं, जिससे हमारे बैंकों में आने वाले उपभोक्ताओं और आम जनता को समय से सभी सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
सचिव ने आरोप लगाया कि कुछ कर्मचारी और संगठन बायोमेट्रिक हाजिरी की इस व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं। वे नहीं चाहते कि किसी भी तरह की बायोमेट्रिक निगरानी लागू हो, ताकि वे अपनी मर्जी से दफ्तर आ-जा सकें। यही कारण है कि इस व्यवस्था को रोकने या प्रभावित करने के लिए उनकी एक सामान्य प्रशासनिक चर्चा को गलत रूप देकर उछाल जा रहा है।
आगे की स्थिति
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