न्याय के लिए भगवान से लगाई गुहार, मंदिर में पढ़कर सुनाया ज्ञापन
समझें क्या है पूरा मामला
- भीलवाड़ा प्रसूता मौत मामले में न्याय की मांग को लेकर युवाओं ने पदयात्रा निकाली।
- सर्व समाज ने प्रशासन की जगह भगवान चारभुजा नाथ के दरबार में अर्जी लगाई।
- एमजी हॉस्पिटल में तीन प्रसूताओं सहित पांच महिलाओं की मौत से आक्रोश बढ़ा है।
- प्रदर्शनकारियों ने दोषी डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर कार्रवाई की मांग की।
- 450 साल पुराने मंदिर में लोगों ने सच सामने लाने और न्याय की प्रार्थना की।
इंसाफ के लिए आम तौर पर लोग पुलिस, प्रशासन या अदालतों के चक्कर काटते हैं। लेकिन राजस्थान के भीलवाड़ा में शनिवार सुबह एक अलग ही नजारा देखने को मिला।
यहां बहुचर्चित प्रसूता मौत मामले में न्याय के लिए लोगों ने किसी अफसर का दरवाजा नहीं खटखटाया। इसके बजाय वे सीधे भगवान की शरण में पहुंच गए।
5 मौतों से दहला पूरा शहर
पिछले दिनों भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय यानी एमजी हॉस्पिटल (MG Hospital) में कथित लापरवाही की खबर सामने आई थी। बताया जा रहा है कि इस दौरान तीन प्रसूताओं सहित कुल 5 महिलाओं की जान चली गई।
इन मौतों ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। जब पीड़ित परिवारों और सर्व समाज के युवाओं को प्रशासनिक अधिकारियों से न्याय की उम्मीद धुंधली पड़ती दिखी, तो उन्होंने आंदोलन का एक अनूठा रास्ता चुना।
सड़कों पर गूंजे मौत का हिसाब मांगने के नारे
दोषी डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर कार्रवाई की मांग को लेकर युवाओं ने भीमगंज थाने से एक विशाल न्याय पदयात्रा शुरू की। यह पदयात्रा जब शहर के गुलमंडी बाजार से गुजरी, तो पूरा इलाका प्रदर्शनकारियों के नारों से गूंज उठा।
युवाओं ने अस्पताल प्रशासन और गायनिक विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान बहनों को न्याय दिलाने और मांओं की मौत का हिसाब मांगने से जुड़े नारे भी लगाए गए।
भगवान के चरणों में रखी अर्जी
इस पूरे आंदोलन का सबसे भावुक पल तब आया, जब यह पदयात्रा शहर के 450 साल पुराने ऐतिहासिक श्री चारभुजा नाथ बड़े मंदिर पहुंची। युवाओं ने यहां किसी नेता या अधिकारी को नहीं, बल्कि सीधे भगवान चारभुजा नाथ को अपना ज्ञापन पढ़कर सुनाया।
सर्व समाज ने भगवान के श्रीचरणों में एक प्रार्थना-पत्र अर्पित किया। उन्होंने सामूहिक रूप से गुहार लगाई कि जिम्मेदार अधिकारियों को सद्बुद्धि मिले।
लोगों ने यह भी प्रार्थना की कि इस पूरे मामले का सच जल्द सबके सामने आए। साथ ही उनकी मांग है कि लापरवाह दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले और पीड़ित परिवारों को न्याय मिले।
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