पॉश सोसायटी बनी साइबर ठगों का अड्डा, अमेरिका-कनाडा तक किया डिजिटल अरेस्ट
समझें क्या है पूरा मामला
- भिवाड़ी में साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश, 3 आरोपी गिरफ्तार।
- विदेशी नागरिकों से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करते थे ठगी।
- पुलिस ने 7 लैपटॉप, 4 मोबाइल और स्कॉर्पियो कार जब्त की।
- दो फ्लैट तोड़कर बनाया था फर्जी कॉल सेंटर।
- अमेरिका, कनाडा और अफ्रीका के लोगों से 96 लाख की ठगी उजागर।
सुनील जैन@अलवर
भिवाड़ी में पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह अमेरिका, कनाडा और अफ्रीका के लोगों को निशाना बना रहा था। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
आरोपी भिवाड़ी की आशियाना टाउन सोसायटी में गुमनाम तरीके से रह रहे थे। यहीं से वे विदेशी नागरिकों को फोन करके ठगते थे। शुरुआती जांच में करीब 96 लाख रुपये की ठगी सामने आई है। पुलिस को शक है कि यह रकम और भी ज्यादा हो सकती है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से 7 लैपटॉप और 4 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। साथ ही एक स्कॉर्पियो-एन कार भी जब्त की गई है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री की वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद शुरू हुए साइबर अपराध अभियान के तहत हुई।
कैसे मिली पुलिस को सुराग
पुलिस टीम इलाके में गश्त और चेकिंग कर रही थी। तभी टीम को सूचना मिली कि कुछ लोग सोसायटी में छिपकर साइबर ठगी कर रहे हैं। सूचना जुटाकर पुलिस ने कार्रवाई की।
दो फ्लैट तोड़कर बनाया ऑपरेशन सेंटर
जांच में पता चला कि आरोपियों ने दो फ्लैटों की दीवार तोड़ दी थी। इन्हें मिलाकर एक बड़ा ऑपरेशन सेंटर बना लिया गया था। यहां हाई-स्पीड इंटरनेट, राउटर, यूपीएस (UPS – Uninterruptible Power Supply) और हेडफोन लगे थे। कई लैपटॉप की मदद से पूरा कॉल सेंटर चलाया जा रहा था।
आरोपी अंग्रेजी में धाराप्रवाह बात करते थे। वे खुद को अमेरिका के न्याय विभाग या साइबर सुरक्षा एजेंसी का अधिकारी बताते थे। इसी तरीके से वे लोगों का भरोसा जीतते थे।
डिजिटल अरेस्ट से डराकर वसूलते थे पैसे
गिरोह के सदस्य विदेशी नागरिकों को फोन करते थे। वे कहते थे कि उनका नाम चाइल्ड पोर्नोग्राफी या साइबर हैकिंग जैसे मामलों में आया है। इसके बाद फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजकर उन्हें डराया जाता था।
पीड़ितों को डिजिटल अरेस्ट में रखकर भारी रकम वसूली जाती थी। गिरोह का मुख्य निशाना बुजुर्ग लोग थे। खासकर वे जिन्हें तकनीक की कम जानकारी थी।
VPN और नकली नंबर से छिपाते थे पहचान
आरोपी वीपीएन (VPN – Virtual Private Network) और विदेशी वर्चुअल नंबर का इस्तेमाल करते थे। इससे उनकी असली लोकेशन पता नहीं चल पाती थी। काम के बाद वे अपने डिवाइस से डेटा डिलीट कर देते थे।
ठगी से मिले डॉलर को क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था। बाद में इसे भारतीय रुपयों में बेच दिया जाता था। इस तरह पैसों का असली स्रोत छिप जाता था।
पहले से तैयार रखते थे स्क्रिप्ट
आरोपियों ने अलग-अलग तरह की ठगी के लिए अंग्रेजी स्क्रिप्ट तैयार कर रखी थी। ये स्क्रिप्ट नोटपैड और डेस्कटॉप पर सेव थीं। इससे बातचीत के दौरान वे अटकते नहीं थे और असली अधिकारी जैसे लगते थे।
आरोपियों को किया गिरफ्तार
पुलिस ने मोहित गुप्ता, राहुल सिंह और जैम्स अनिल मंडल को गिरफ्तार किया है। मोहित गुप्ता दिल्ली के द्वारका का रहने वाला है। राहुल सिंह करावल नगर, उत्तर पूर्वी दिल्ली से है। जैम्स अनिल मंडल कोलकाता, पश्चिम बंगाल का निवासी है। तीनों कुछ समय से भिवाड़ी में रहकर यह नेटवर्क चला रहे थे।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
भिवाड़ी थाने में आरोपियों के खिलाफ बीएनएस (BNS – Bharatiya Nyaya Sanhita) की धारा 336(3), 339, 318(4) और 319(2) के तहत केस दर्ज हुआ है। साथ ही आईटी एक्ट (IT Act – Information Technology Act) की धारा 66-सी और 66-डी भी लगाई गई है। पुलिस अब आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड और नेटवर्क की जांच कर रही है।
पुलिस की अपील
भिवाड़ी पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बैंक खाता, ओटीपी (OTP – One Time Password) या सिम कार्ड की जानकारी किसी से साझा न करें। पुलिस कभी भी वीडियो कॉल पर गिरफ्तार नहीं करती। साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें।
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