भिवाड़ी में ऑयल टैंक ब्लास्ट से दो फैक्ट्रियां खाक, 5 कर्मचारी झुलसे, एक की मौत

Ashish Bhardwaj | Jun 05, 2026, 09:54 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान की उद्योग नगरी भिवाड़ी में दो फैक्ट्रियों में भीषण आग लग गई। इसमें पांच लोग गंभीर रूप से झुलस गए। इसमें से एक व्यक्ति की मौत हो गई। आग से जान बचाने के लिए दीवार फांदकर भागे कर्मचारी।

News In Short

  • भिवाड़ी में दो फैक्ट्रियों में भीषण आग लगी।
  • अग्निकांड में 5 कर्मचारी झुलसे, इनमें से एक की मौत हो गई।
  • आग ट्रांसफार्मर ब्लास्ट के बाद फैले ज्वलनशील तेल से भड़की।
  • आग से जान बचाने के लिए दीवार फांदकर भागे कर्मचारी

News In Detail

सुनील जैन@अलवर



राजस्थान के सबसे बड़े औद्योगिक केंद्र भिवाड़ी में बड़ा हादसा सामने आया है। एक फैक्ट्री में ट्रांसफार्मर ब्लास्ट के बाद ऑयल टैंक में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। इस धमाके की चपेट में आने से दो फैक्ट्रियां पूरी तरह धधक उठीं।



हादसे में पांच लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिनमें से तीन की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद दिल्ली रेफर किया गया है। इसमें से एक व्यक्ति की मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा मानकों और फायर एनओसी (Fire NOC) की जमीनी हकीकत की पोल खोलकर रख दी है।



ऑफिस में बैठे थे दोनों भाई, अचानक आग में घिरे

हादसे के समय रामको मेटल फैक्ट्री मालिक देवेंद्र यादव, उनके छोटे भाई हरपाल यादव और अन्य कर्मचारी ऑफिस में मौजूद थे। आग लगते ही फैक्ट्री में अफरा-तफरी मच गई। कर्मचारियों ने पीछे के दरवाजों और वैकल्पिक रास्तों से बाहर निकलकर जान बचाई, जबकि कुछ लोगों को दीवार फांदकर बाहर निकलना पड़ा।



इसी दौरान देवेंद्र यादव और हरपाल यादव आग की लपटों के बीच फंस गए और गंभीर रूप से झुलस गए। दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली रेफर कर दिया गया। आज सुबह उपचार के दौरान हरपाल यादव ने दम तोड़ दिया। मृतक हरपाल यादव पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट थे।



​ट्रांसफार्मर ब्लास्ट के बाद फैला तेल

​प्रत्यक्षदर्शियों और प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार हादसा भिवाड़ी स्थित रामको मेटल फैक्ट्री में हुआ। फैक्ट्री की पहली मंजिल पर लगे बिजली के ट्रांसफार्मर में अचानक शॉर्ट सर्किट के कारण जोरदार धमाका हुआ। इस ब्लास्ट की चिंगारी पास ही रखे करीब 5,000 लीटर क्षमता वाले विशाल ऑयल टैंक तक पहुंच गई।


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कुछ ही पलों में ऑयल टैंक में एक और भीषण विस्फोट हुआ, जिससे खौलता और ज्वलनशील तेल फैक्ट्री परिसर को पार करता हुआ मुख्य सड़क तक फैल गया। इस बहते हुए आग के दरिया ने बगल में स्थित कॉस्मेटिक उत्पाद बनाने वाली कंपनी 'एल्सओक एलएलपी' को भी अपनी चपेट में ले लिया। रामको मेटल में जहां लोहे की चादरें बनती हैं, वहीं एल्सओक में कॉस्मेटिक केमिकल होने के कारण आग ने चंद मिनटों में दोनों इमारतों को पूरी तरह से घेर लिया।





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​जान बचाने के लिए दीवार फांदकर भागे कर्मचारी

धमाके और आसमान छूती लपटों को देखकर दोनों फैक्ट्रियों में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। फैक्ट्रियों के भीतर काले धुएं का गुबार भर जाने से विजिबिलिटी शून्य हो गई। मुस्तैदी दिखाते हुए सुरक्षाकर्मियों और प्रबंधन ने महिला एवं पुरुष कर्मचारियों को पीछे के दरवाजों से बाहर निकालना शुरू किया। जान बचाने की कशमकश में कई श्रमिकों ने फैक्ट्री की ऊंची पिछली दीवारें तक फांद दीं।



​आग की लपटें इतनी तेज थीं कि दोनों फैक्ट्रियों के परिसर और बाहर खड़े कई दोपहिया व चार पहिया वाहन जलकर लोहे का ढांचा मात्र रह गए। सूचना मिलते ही भिवाड़ी, खुशखेड़ा और आसपास के औद्योगिक थानों से दमकल की दर्जनों गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकलकर्मियों ने कई घंटों की भारी मशक्कत के बाद आग पर बमुश्किल काबू पाया।



​पार्षद पति समेत 5 झुलसे

घायलों में यूआईटी सेक्टर-9 निवासी पार्षद पति देवेंद्र यादव, हरपाल यादव, दिनेश, ट्रैक्टर चालक छत्तर सिंह और एक अन्य राहगीर/कर्मचारी शामिल हैं। सभी को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने देवेंद्र यादव, हरपाल यादव और दिनेश की गंभीर स्थिति (क्रिटिकल बर्न) को देखते हुए उन्हें उच्च स्तरीय इलाज के लिए दिल्ली रेफर कर दिया। वहीं ट्रैक्टर चालक छत्तर सिंह का इलाज भिवाड़ी के ही एक निजी अस्पताल में चल रहा है। आज सुबह उपचार के दौरान हरपाल यादव ने दम तोड़ दिया।



5,000 फैक्ट्रियों में से सिर्फ 550 के पास Fire NOC

इस अग्निकांड ने भिवाड़ी-खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र की बदहाल सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही को एक बार फिर उजागर कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक:





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स्थानीय निवासियों और श्रमिक संगठनों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि महज 10-11% फैक्ट्रियों के पास ही वैध फायर एनओसी है, जबकि शेष इकाइयां बिना पुख्ता इंतजामों के धड़ल्ले से चल रही हैं।



इस हादसे के बाद अब जिला प्रशासन और रीको प्रबंधन पर फैक्ट्रियों की सुरक्षा जांच करने और बिना एनओसी चल रही इकाइयों पर सख्त कार्रवाई करने का दबाव बेहद बढ़ गया है। पुलिस और दमकल विभाग फिलहाल आग के सटीक कारणों और फैक्ट्रियों में मौजूद आंतरिक सुरक्षा उपकरणों की जांच में जुटे हैं।



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