बीसलपुर का पीला पानी बना जलदाय विभाग के लिए पहेली, अब होगी जांच
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर में पीले पानी की वजह अब भी साफ नहीं हुई।
- रिपोर्ट में हानिकारक एल्गी को संभावित कारण बताया गया।
- राजस्थान विश्वविद्यालय करेगा पानी की वैज्ञानिक जांच।
- 9 साल में तीसरी बार सामने आई पीले पानी की समस्या।
- बीसलपुर से रोज 6500 लाख लीटर पानी की सप्लाई होती है।
बीसलपुर प्रोजेक्ट से जयपुर शहर में सप्लाई हुआ पीला पानी राजस्थान जलदाय विभाग के लिए अब भी एक पहेली बना हुआ है। विभाग ने अपनी लैब से इसकी जांच करवाई, लेकिन असली वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। मुख्यमंत्री कार्यालय यानी सीएमओ (CMO) को भेजी रिपोर्ट में पीले पानी की वजह हानिकारक एल्गी यानी काई को माना गया है। हालांकि यह अभी विभाग का प्रारंभिक आकलन है, अंतिम वैज्ञानिक पुष्टि होना बाकी है।
बीसलपुर प्रोजेक्ट पर 66 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद यह पिछले 9 साल में तीसरी घटना है। अब कारण जानने के लिए राजस्थान विश्वविद्यालय से वैज्ञानिक जांच कराई जा रही है।
9 साल में तीसरी बार पीला पानी
बीसलपुर बांध से पानी आपूर्ति और रखरखाव पर हर साल 66 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद पिछले 9 साल में यह तीसरी बार है जब गंदा पीला पेयजल सप्लाई हुआ है।
इस घटना ने विभाग और सरकार, दोनों की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बार-बार हो रही इस समस्या से आम जनता में भी चिंता बढ़ी है।
अब होगी वैज्ञानिक जांच
पीले पानी की सही वजह जानने के लिए विभाग ने अब साइंटिफिक स्टडी कराने का फैसला किया है। इसके लिए राजस्थान विश्वविद्यालय के वनस्पति विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है।
इस अध्ययन में बांध में मौजूद एल्गी समेत अन्य बायोलॉजिकल एक्टिविटीज की जांच की जाएगी। इसके अलावा विभाग अन्य सरकारी एजेंसियों से भी साइंटिफिक स्टडी करवाने की योजना बना रहा है।
विभाग के एडिशनल चीफ इंजीनियर अजय सिंह राठौड़ के अनुसार भविष्य में पीले पानी की सप्लाई रोकने के लिए विश्वविद्यालय से वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पानी में जमने वाली काई के सैंपल लेकर उसकी विस्तृत जांच की जाएगी।
किन सवालों पर टिकी है जांच
यह वैज्ञानिक जांच मुख्य रूप से तीन अहम सवालों पर केंद्रित रहेगी। पहला, बीसलपुर बांध में मौजूद एल्गी की वैज्ञानिक पहचान की जाएगी और यह देखा जाएगा कि इसमें कोई संभावित विषैला या हानिकारक शैवाल तो नहीं है।
दूसरा, नियमित मॉनिटरिंग की एक वैज्ञानिक प्रणाली को लेकर सुझाव मांगे जाएंगे। तीसरा, काई की मात्रा और प्रकार की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकी उपायों पर भी विचार किया जाएगा।
रोज 6500 लाख लीटर पानी की सप्लाई
बीसलपुर बांध से जयपुर सहित तीन जिलों में हर दिन करीब 6500 लाख लीटर पानी सप्लाई होता है। सूरजपुरा प्लांट में ट्रीटमेंट के बाद बालावाला सहित अन्य जगहों पर पानी का क्लोरीनेशन किया जाता है।
इस दैनिक पानी के ट्रीटमेंट और बिजली पर सालाना 66 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। इसमें से ऑपरेशन-मेंटेनेंस के लिए संबंधित एजेंसी को सालाना करीब 6 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाता है।
FAQ
- जयपुर में पीले पानी की सप्लाई की वजह क्या मानी जा रही है?
विभाग की रिपोर्ट में इसकी वजह हानिकारक एल्गी यानी काई को माना गया है। हालांकि यह अभी प्रारंभिक आकलन है, अंतिम पुष्टि वैज्ञानिक जांच के बाद होगी। इसके लिए राजस्थान विश्वविद्यालय को प्रस्ताव भेजा गया है। - पीले पानी की समस्या कितनी बार सामने आ चुकी है?
66 करोड़ रुपए सालाना खर्च होने के बावजूद पिछले 9 साल में यह तीसरी बार है जब पीला पानी सप्लाई हुआ है। इससे विभाग और सरकार की साख पर सवाल उठे हैं। अब स्थायी समाधान के लिए वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया गया है। - बीसलपुर बांध के पानी की जांच में क्या पता लगाया जाएगा?
जांच में बीसलपुर बांध की एल्गी की पहचान, इसके हानिकारक होने या न होने और नियमित मॉनिटरिंग के तरीकों पर काम होगा। इसके लिए काई के सैंपल लेकर जांच की जाएगी। आधुनिक तकनीकी निगरानी उपायों पर भी सुझाव मांगे जाएंगे।
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