विधायक का कारनामा, गौ माता के नाम पर करोड़ों की सरकारी जमीन पर जमाया कब्जा
समझें क्या है पूरा मामला
- शाहपुरा विधायक का गोशाला की आड़ में करोड़ों की सरकारी जमीन पर कब्जा।
- आवंटन फाइल रद्द होने के बाद भी जमीन पर बना डाले टीन-शेड, लिया बिजली कनेक्शन।
- परिवार की संस्था बनाई, बेटे को अध्यक्ष, खुद सचिव, भतीजे-बेटे को अन्य पद।
- 5 हेक्टेयर चारागाह जमीन, एक्सप्रेसवे से सटी, बेहद कीमती, उस पर किया कब्जा।
- विधायक ने दावा किया - इस्तीफा दे दिया, लेकिन तारीख नहीं बता पाए, फोन काटा।
राजस्थान में गोशाला की आड़ में भाजपा विधायक लालाराम बैरवा ने बेशकीमती सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया है। यह जमीन प्रस्तावित केकड़ी-जयपुर-भीलवाड़ा-मांडल एक्सप्रेसवे से सटी हुई है।
रोचक बात यह कि भीलवाड़ा के शाहपुरा से विधायक बैरवा ने गोशाला के लिए जमीन आवंटन की फाइल सरकार में लगाई। नियम के अनुसार गोशाला तीन साल पुरानी होनी चाहिए। नियमों पर खरा नहीं उतरने पर कलेक्टर स्तर पर ही यह फाइल रद्द हो गई।
बैरवा ने आवंटन होने या नहीं होने की परवाह नहीं की। उन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया। उस पर टीन-शेड बना लिए। विधायकी रौब में बिजली कनेक्शन ले लिया। फिर जमीन के चारों ओर तारबंदी करके देव गोशाला सेवा संस्था का बोर्ड भी लगा लिया।
बाप-बेटों की जेबी गोशाला संस्था
विधायक बैरवा ने 21 अगस्त, 2025 को सहकारिता रजिस्ट्रार के यहां देव गोशाला सेवा संस्था शाहपुरा के नाम से एक संस्था रजिस्टर्ड करवाई।
यह संस्था पूरी तरह परिवार की थी। इसमें बेटे चिनार देवतवाल को अध्यक्ष बनाया गया। खुद विधायक लालाराम बैरवा सचिव थे।
इतना ही नहीं, बेटा जतिन देवतवाल को कोषाध्यक्ष और भतीजे कुंदन देवतवाल को सहसचिव बनाया। खास नजदीकी हुकमचंद कुमावत को उपाध्यक्ष, दिशांक गर्ग और राहुल बोहरा को सदस्य बनाया है।
कीमती चारागाह भूमि पर गड़ाई नजरें
बताया जाता है कि यह संस्था सिर्फ सरकारी जमीन पर कब्जा करने के लिए बनाई गई। इसके लिए
विधायक ने शाहपुरा से 2 किलोमीटर दूर माता जी का खेड़ा पंचायत की एक चारागाह जमीन को चिन्हित किया।
यह जमीन इसलिए बेहद कीमती है क्योंकि यहां से भविष्य में केकड़ी-जयपुर-भीलवाड़ा-मांडल एक्सप्रेसवे प्रस्तावित है। यह जमीन वर्तमान में बेशकीमती है।
नियम के कारण आवंटन से इनकार
रजिस्ट्रेशन होने के बाद विधायक की जेबी संस्था ने सरकार में एक अर्जी लगाई। इसमें शाहपुरा की आराजी संख्या 2543 रकबा 78.68 हेक्टेयर चारागाह जमीन में से 5 हेक्टेयर जमीन देव गोशाला के लिए आवंटन करने की मांग की गई।
राजस्थान भू-राजस्व ( गोशाला को भूमि आवंटन) नियम-1957 के नियम- 4 के तहत आवंटन के लिए कुछ शर्ते निर्धारित हैं। इसमें राजस्थान सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम-1958 और राजस्थान गोशाला अधिनियम-1960 के अधीन रजिस्ट्रेशन होने तथा गौशाला का तीन साल से संचालित होना जरुरी है।
भीलवाड़ा के अतिरिक्त जिला कलक्टर के पास इस गोशाला की जमीन आवंटन की फाइल आई तो उन्होंने ब्रेक लगा दिया। उन्होंने 25 फरवरी, 2026 को एसडीएम शाहपुरा और देव गोशाला सेवा संस्था को नियमों में छूट का कोई प्रावधान नहीं का हवाला दिया। इसके आधार पर संस्था को जमीन आवंटन नहीं होने की जानकारी दी।
विधायकजी ने कर लिया कब्जा
सूत्रों का कहना है कि विधायक लालाराम बैरवा ने आवंटन फाइल लगाते ही जमीन पर कब्जा करके तारबंदी कर ली।
टीनशेड बना लिए। बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन भी कर दिया। बताया जाता है कि जेईएन ने नियम के तहत कनेक्शन देने से मना कर दिया।
बात नहीं मानने पर विधायक ने उसे एपीओ करवा दिया। बाद में उसकी जगह आए दूसरे जेईएन से कनेक्शन करवा लिया। विवादित जमीन पर बोरिंग हो चुका है। पक्का निर्माण भी हो रहा है। जमीन पर संस्था का बोर्ड लगा हुआ है।
विधायक बैरवा बोले- हम दे चुके इस्तीफा
'द सूत्र' ने विधायक लालाराम बैरवा से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया। विधायक लालाराम बैरवा से जब पूछा कि उन्होंने बिना आवंटन चारागाह की जमीन पर कब्जा कैसे कर रखा है? इस पर उनका कहना था कि वह स्वयं, उनके दोनों बेटे और भतीजा संस्था से 8-9 महीने पहले इस्तीफा दे चुके हैं। लेकिन बार-बार पूछने पर वह कोई महीना या तारीख नहीं बता पाए।
विधायक से सरकारी जमीन पर गैर-कानूनी तरीके से टीन-शेड बनाने, बिजली कनेक्शन लेने, बोरिंग करवाने तथा पक्का निर्माण करवाने के बारे में भी सवाल किया। इस पर उनका कहना था सभी गोशाला चारागाह की जमीन पर ही चलती हैं।
लेकिन बैरवा ने सरकारी जमीन पर बिना आवंटन के गैर-कानूनी रुप से निर्माण करने के सवाल का जवाब नहीं दिया और फोन काट दिया। उधर, कलेक्टर जसमीत सिंह संधू और शाहपुरा एसडीएम सुनील कुमार मीणा ने फोन नहीं उठाया। उनका जब भी पक्ष आएगा तो प्रमुखता से लगाया जाएगा।
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