क्यों भड़का इलेक्ट्रिशियन, जिसे मंत्री की PC में बत्ती गुल पर किया सस्पेंड
समझें क्या है पूरा मामला
- रेल मंत्री PC बिजली गुल मामले में इलेक्ट्रिशियन बाबूसिंह लगाया ने प्रताड़ना का आरोप।
- बाबूसिंह का दावा है कि वह घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे।
- उन्होंने मजदूर संगठनों को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है।
- बाबूसिंह ने कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण और एकतरफा बताया।
- विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई बता रहा है।
11 जून को जयपुर में भाजपा प्रदेश कार्यालय में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की प्रेस वार्ता के दौरान बिजली गुल हो गई थी। इस मामले में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर की जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (RVPNL) के इलेक्ट्रिशियन बाबूसिंह और 400 केवी जीएसएस (GSS), हीरापुरा के सहायक अभियंता (AEN) विपिन शर्मा को निलंबित किया गया।
अब निलंबित इलेक्ट्रिशियन बाबूसिंह ने मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए मजदूर संगठनों को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है।
बाबूसिंह का दावा, मैं वहां था ही नहीं
इलेक्ट्रिशियन बाबूसिंह ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि वे 400 केवी पावर हाउस, हीरापुरा में इलेक्ट्रिशियन प्रथम के पद पर कार्यरत हैं और उनका काम मेंटेनेंस है।
उनका कहना है कि 11 जून को शाम 4 बजे पावर हाउस पर ट्रिपिंग आई। इस ट्रिपिंग से उनका कोई संबंध नहीं था। वे उस समय वहां मौजूद भी नहीं थे।
इसके बावजूद उन्हें सीधे तौर पर दोषी ठहराकर एकतरफा तरीके से निलंबित कर दिया गया।
मानसिक रूप से परेशान हूं
बाबूसिंह ने मजदूर संगठनों के प्रदेशाध्यक्ष और प्रदेश महासचिवों को लिखे पत्र में कहा कि यह कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण और एकतरफा है।
उन्होंने लिखा कि इस कार्रवाई से वे मानसिक रूप से परेशान हैं। उन्होंने मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों से अनुरोध किया है कि वे उच्चाधिकारियों से संपर्क कर उन्हें न्याय दिलाएं।
राजनीतिक दबाव में कार्रवाई का सवाल
पूरे मामले में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। BJP कार्यालय में केंद्रीय मंत्री के सामने बिजली जाना एक ग्रिड फॉल्ट की घटना थी। लेकिन राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत जांच कमेटी बनाई गई और निलंबन हुआ।
अगर इलेक्ट्रिशियन बाबूसिंह का दावा सही है कि वे घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे, तो यह सवाल उठता है कि बिना जांच पूरी हुए निलंबन का आधार क्या था। विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई बता रहा है।
पहले क्या हुआ था?
11 जून को BJP प्रदेश कार्यालय में केंद्रीय मंत्री वैष्णव मोदी सरकार के 12 साल की उपलब्धियां गिना रहे थे। उसी दौरान 15 मिनट में तीन बार बिजली गुल हुई। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर खुद उसी कमरे में मौजूद थे।BJP कार्यालय में जनरेटर नहीं था। रेल मंत्री को टीवी कैमरों की रोशनी में संबोधन देना पड़ा।
ऊर्जा मंत्री ने घटना को गंभीर बताते हुए जांच के आदेश दिए थे। जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर बाबूसिंह और AEN विपिन शर्मा को निलंबित किया गया।
FAQ
- BJP ऑफिस बिजली कांड में किसे निलंबित किया गया?
ऊर्जा मंत्री की जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर RVPNL के इलेक्ट्रिशियन बाबूसिंह और 400 केवी जीएसएस हीरापुरा के सहायक अभियंता विपिन शर्मा को निलंबित किया गया।
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