राजस्थान भाजपा ने पंचायत-निकाय चुनाव समिति 8 दिन में बदली, घनश्याम तिवाड़ी की छुट्टी
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान भाजपा ने संभागीय चुनाव संचालन समिति में बड़ा फेरबदल किया।
- यह बदलाव पिछली सूची जारी होने के सिर्फ 8 दिन बाद हुआ।
- सांसद घनश्याम तिवाड़ी और पूर्व सांसद संतोष अहलावत को समिति से हटाया गया।
- पांच नेताओं के संभाग बदले गए, ताकि पक्षपात के आरोपों से बचा जा सके।
- 5 नए संगठनात्मक जिलों में भी जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की गई।
राजस्थान भाजपा ने पंचायत और शहरी निकाय चुनाव को देखते हुए संभागीय चुनाव संचालन समिति में फेरबदल किया है। यह फेरबदल पिछली सूची के सिर्फ 8 दिन बाद सामने आय। भारतीय जनता पार्टी ने 25 जुलाई को राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव संभागीय चुनाव संचालन समिति की पहली सूची जारी की थी। उस सूची में 21 नेताओं को 7 संभागों की जिम्मेदारी दी गई थी।
8 दिन में क्यों बदली सूची
भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को नई सूची जारी की। इस बार समिति में 22 नेता शामिल किए गए हैं। लेकिन पुरानी समिति में शामिल सांसद घनश्याम तिवाड़ी और पूर्व सांसद और पार्टी उपाध्यक्ष संतोष अहलावत को इस बार जगह नहीं मिली।
चर्चा है कि पहली सूची में स्थानीय नेताओं को उन्हीं के गृह संभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। इस पर पार्टी के भीतर सवाल खड़े हो रहे थे। कुछ नेताओं ने इसे पक्षपात बताया था। इसी आलोचना के बाद भाजपा ने रणनीति बदली। अब नेताओं को उनके अपने की बजाय दूसरे संभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इससे चुनाव में निष्पक्षता का संदेश देने की कोशिश की गई है।
किसे मिली नई जिम्मेदारी
नई समिति में सांसद अलका गुर्जर, पूर्व सांसद राजेंद्र गहलोत और पूर्व पार्टी उपाध्यक्ष प्रसन्नचंद मेहता को शामिल किया गया है। पार्टी नेताओं ने इसे सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया बताया है।
पांच नेताओं के बदले संभाग
इस बदलाव में पांच नेताओं के संभाग भी बदले गए हैं। कांग्रेस से भाजपा में आए लालचंद कटारिया को पहले जयपुर संभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। अब उन्हें अजमेर संभाग भेजा गया है।
राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी को भरतपुर से हटाकर अजमेर संभाग की जिम्मेदारी दी गई है। पूर्व विधायक शंकर सिंह राजपुरोहित को भरतपुर की जगह अब जयपुर संभाग मिला है।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी को अजमेर से हटाकर भरतपुर संभाग भेजा गया है। प्रदेश उपाध्यक्ष ज्योति मिर्धा को अजमेर की बजाय अब बीकानेर संभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
नए जिलों में जिलाध्यक्ष
इसके साथ ही राजस्थान भाजपा ने रविवार को 5 नए संगठनात्मक जिलों में जिलाध्यक्ष भी नियुक्त किए। पहले भाजपा के पास 44 संगठनात्मक जिले थे। राज्य में प्रशासनिक स्तर पर 8 नए जिले बनने के बाद पार्टी ने भी संगठन स्तर पर 5 नए जिले बनाए थे।
अब इन नए जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति कर दी गई है। सलूंबर में चंद्रशेखर जोशी, कोटपूतली-बहरोड़ में सुरेश सैनी और ब्यावर में आशीष सांड को जिलाध्यक्ष बनाया गया। इसी तरह डीग-कुम्हेर में सतीश बंसल और जयपुर ग्रामीण उत्तर में जितेंद्र शर्मा को यह जिम्मेदारी मिली है।
आने वाले पंचायत और निकाय चुनाव भाजपा के लिए संगठनात्मक मजबूती की परीक्षा माने जा रहे हैं। यही वजह है कि पार्टी बार-बार अपनी रणनीति में बदलाव कर रही है।
FAQ
- सवाल 1: राजस्थान भाजपा ने पंचायत-निकाय चुनाव समिति क्यों बदली?
जवाब: पुरानी सूची में भाजपा के स्थानीय नेताओं को अपने ही संभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। इस पर पक्षपात के आरोप लगे। इसी वजह से पार्टी ने संभाग बदल दिए। - सवाल 2: राजस्थान भाजपा की नई पंचायत-निकाय चुनाव समिति से किसे हटाया गया है?
जवाब: सांसद घनश्याम तिवारी और पूर्व सांसद संतोष अहलावत को नई समिति से बाहर रखा गया है। - सवाल 3: भाजपा ने कितने नए जिलों में जिलाध्यक्ष बनाए?
जवाब: भाजपा ने 5 नए संगठनात्मक जिलों में जिलाध्यक्ष नियुक्त किए हैं। ये जिले राज्य में हाल ही में बने प्रशासनिक जिलों के आधार पर बनाए गए थे।
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