पूर्व विधायक ब्रह्मदेव कुमावत ने ली अंतिम सांस, पहली बार में बने थे संसदीय सचिव
समझें क्या है पूरा मामला
- पूर्व विधायक ब्रह्मदेव कुमावत का हार्ट अटैक से निधन।
- मसूदा से निर्दलीय चुनाव जीतकर पहली बार बने थे विधायक।
- 2008 में विधानसभा पहुंचे, गहलोत सरकार में रहे संसदीय सचिव।
- निधन की खबर से अजमेर और मसूदा क्षेत्र में शोक की लहर।
- कांग्रेस नेता कुमावत ने क्षेत्र की राजनीति में बनाई थी अलग पहचान।
अजमेर जिले के मसूदा से पूर्व विधायक ब्रह्मदेव कुमावत का 27 जुलाई को निधन हो गया। उन्हें दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। वे 2008 में निर्दलीय चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे।
जानकारी के अनुसार तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पहले बांदनवाड़ा से नसीराबाद उपजिला चिकित्सालय ले जाया गया।
वहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें अजमेर के जेएलएन (JLN – Jawaharlal Nehru) अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके निधन की खबर से पूरे मसूदा क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है।
वे अपने पीछे चार बेटों और भरे-पूरे परिवार को छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी मुन्नी देवी कुमावत का पूर्व में ही निधन हो चुका था। मसूदा क्षेत्र के विकास और स्थानीय लोगों से सीधे जुड़ाव के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।
बांदनवाड़ा में हुआ था जन्म
ब्रह्मदेव कुमावत का जन्म 30 नवंबर 1959 को अजमेर जिले की भिनाय तहसील के बांदनवाड़ा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम हरदेव कुमावत और माता का नाम सरजू देवी था।
उन्होंने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से हायर सेकेंडरी तक पढ़ाई की थी। शिक्षा पूरी करने के बाद वे पेशे से व्यापारी बन गए थे।
निर्दलीय जीतकर पहुंचे थे विधानसभा
ब्रह्मदेव कुमावत अजमेर संभाग में और खासतौर पर कुमावत समाज में एक प्रभावशाली नेता माने जाते थे। साल 2008 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस से टिकट नहीं मिला था। इसके बाद उन्होंने मसूदा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया।
उन्होंने इस चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन किया। उन्हें 42,170 वोट मिले। उन्होंने कांग्रेस के आधिकारिक प्रत्याशी रामचंद्र को हराकर पहली बार विधानसभा में जगह बनाई।
संसदीय सचिव भी रह चुके थे कुमावत
चुनाव जीतने के बाद ब्रह्मदेव कुमावत ने तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार को अपना समर्थन दिया था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उन्हें अपनी सरकार में संसदीय सचिव नियुक्त किया था। यह पद राज्य मंत्री के समकक्ष माना जाता है।
साल 2013 के चुनाव में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस यानी आईएनसी (INC – Indian National Congress) के आधिकारिक टिकट पर मसूदा से मैदान में उतरे थे। उस समय भाजपा की लहर के चलते उन्हें भाजपा प्रत्याशी सुशील कंवर से हार का सामना करना पड़ा।
पार्टी हित में छोड़ा था टिकट का दावा
साल 2018 के चुनाव के दौरान भी ब्रह्मदेव कुमावत ने टिकट के लिए दावेदारी पेश की थी। लेकिन कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद भी वे संगठन में सक्रिय रूप से काम करते रहे।
उनका पूरा राजनीतिक जीवन मसूदा क्षेत्र और कुमावत समाज के प्रति समर्पण से भरा रहा। उनके निधन से क्षेत्र की राजनीति में एक बड़ा खालीपन आ गया है
FAQ
- पूर्व विधायक ब्रह्मदेव कुमावत का निधन कैसे हुआ?
27 जुलाई को उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उनका निधन हो गया। - ब्रह्मदेव कुमावत कब और कैसे पहली बार विधायक बने थे?
वे 2008 के चुनाव में कांग्रेस टिकट न मिलने पर निर्दलीय मैदान में उतरे थे। उन्होंने 42,170 वोट हासिल कर कांग्रेस प्रत्याशी रामचंद्र को हराया। इसके बाद उन्हें संसदीय सचिव भी बनाया गया था।
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