बीकानेर में CBI की कार्रवाई, रेलवे कार्यालय में रिश्वत लेते पकड़े गए दो अधिकारी
समझें क्या है पूरा मामला
- बीकानेर के रेलवे कार्यालय में रिश्वत लेते हुए पकड़े गए दो अधिकारी।
- 48 करोड़ के टेंडर बिल पास करने की एवज में ले रहे थे 1.20 लाख रिश्वत।
- सीबीआई की कार्रवाई में पकडे गए घूसखोर, दो रेल कर्मियों पर गाज।
- कार्रवाई के बाद CBI ने जब्त किए नोट, अफसरों के आवासों पर भी छापे।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने राजस्थान के बीकानेर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने रेलवे विभाग के दो वरिष्ठ कार्मिकों - सीनियर सेक्शन ऑफिसर राजेंद्र चौधरी और उनके साथी राकेश - को 1.20 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
यह मामला 48 करोड़ रुपए के एक रेलवे टेंडर के बिल भुगतान से जुड़ा है। कंपनी के बिलों को बिना किसी अड़चन के क्लीयर करने के एवज में यह रिश्वत मांगी जा रही थी।
क्या है पूरा प्रकरण?
कोलकाता की एमआरटी (MRT) कंपनी को रेलवे का लगभग 48 करोड़ रुपए का एक प्रोजेक्ट मिला था। कंपनी ने काम पूरा कर बिल रेलवे कार्यालय में जमा किए थे, लेकिन बिलों का भुगतान नहीं हो रहा था।
आरोप है कि सीनियर सेक्शन ऑफिसर राजेंद्र चौधरी और कार्मिक राकेश इन बिलों को पास करने के लिए लगातार दबाव बना रहे थे और 1.20 लाख रुपए की रिश्वत की डिमांड कर रहे थे।
कंपनी की ओर से रिश्वत देने पहुंचे कार्मिक नवल किशोर को जैसे ही दोनों अधिकारियों ने पैसे लिए, सीबीआई ने उन्हें दबोच लिया।
सीबीआई ने कैसे बिछाया जाल?
सीबीआई की जयपुर शाखा की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई को रेलवे टेंडर भुगतान में घूसखोरी की शिकायत मिली थी। जांच में शिकायत सही पाई गई। इसके बाद सीबीआई ने विशेष टीम बनाकर रेलवे कार्यालय परिसर के आसपास सादा कपड़ों में जवान तैनात कर दिए।
जैसे ही 1.20 लाख रुपए का लेन-देन पूरा हुआ, सीबीआई टीम ने तुरंत दबिश देकर रासायनिक रंग लगे नोटों के साथ दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
सीबीआई ने दोनों आरोपियों के आवासीय परिसरों पर भी छापेमारी की है, ताकि उनकी आय से अधिक संपत्ति और अन्य चल-अचल संपत्तियों का ब्यौरा जुटाया जा सके।
48 करोड़ रुपए के इस टेंडर प्रोजेक्ट से जुड़ी तमाम फाइलें, बिल वाउचर और डिजिटल दस्तावेज भी सीबीआई ने कब्जे में ले लिए हैं। गिरफ्तार किए गए दोनों रेल कर्मचारियों को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहां से उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी।
आगे क्या होगा?
सीबीआई अब रिश्वत देने आए कंपनी प्रतिनिधि नवल किशोर से भी पूछताछ कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि इससे पहले भी इस प्रोजेक्ट में कोई अवैध लेन-देन हुआ था या नहीं। रेलवे विभाग में अन्य लंबित टेंडर बिलों की भी जांच शुरू कर दी गई है, जिससे विभाग में हड़कंप की स्थिति बन गई है।
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