चायवालाज के फाउंडर की आखिरी रील ने भिगोई आंखें, कहा- सारी दुनिया भुलाए बैठा हूं

Jageshwar prasad | Aug 03, 2026, 18:44 IST
'चायवालाज' के संस्थापक रोहित शर्मा का निधन, आखिरी रील ने भिगोई आंखें
चायवालाज के फाउंडर ने शनिवार रात दौसा में घर पर आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने स्टार्टअप शुरू किया और 7 शहरों में चायवालाज के आउटलेट खोले। पिछले छह माह से वे आध्यात्म की ओर झुक गए थे और उन्होंने सभी आउटलेट बंद कर दिए थे।

समझें क्या है पूरा मामला

  • चायवालाज के संस्थापक रोहित शर्मा का निधन।
  • अयोध्या में बनाई रील बनी याद, परिजन भावुक।
  • रोहित ने दौसा में घर पर की थी आत्महत्या।
  • 17 साल में शुरू किया था चायवालाज स्टार्टअप।
  • 7 शहरों में थे आउटलेट, 6 माह पहले बंद किए।

चायवालाज के संस्थापक और लेखक रोहित शर्मा (30) ने शनिवार रात दौसा में घर पर आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने 17 साल की उम्र में स्टार्टअप शुरू किया और 7 शहरों में चायवालाज के आउटलेट खोले।



पिछले छह माह से वे आध्यात्म की ओर झुक गए थे और उन्होंने सभी आउटलेट बंद कर दिए थे। उन्होंने दो पुस्तकें भी लिखीं। मामले की जांच जारी है और कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है।



ये न सोचो कि मुझको प्यार नहीं

सारी दुनिया भुलाए बैठा हूं, ये न सोचो कि मुझको प्यार नहीं…। अयोध्या में करीब दो महीने पहले बनाई गई यह रील अब चायवालाज के संस्थापक और लेखक रोहित शर्मा की यादों का अहम हिस्सा बन गई है।



उनके निधन के बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है। रील को देखने वाले उनके दोस्त, शुभचिंतक और परिवार के सदस्य भावुक हो उठे हैं और इसे रोहित के साथ बिताए गए खूबसूरत पलों की याद के रूप में देख रहे हैं।



17 साल की उम्र में शुरू किया स्टार्टअप

रोहित शर्मा ने मात्र 17 साल की उम्र में स्टार्टअप शुरू किया था। जयपुर के मानसरोवर में पहला टी कैफे खोला। धीरे-धीरे उन्होंने कारोबार का विस्तार किया और जयपुर सहित 7 शहरों में चायवालाज के आउटलेट शुरू किए थे। उनकी नई सोच और काम करने का तरीका लोगों को पसंद आया था।



लेखक भी थे चायवालाज फाउंडर रोहित शर्मा

रोहित शर्मा ने तत्सुखे सुखित्वं और विरह नाम से दो पुस्तकें लिखीं। उनकी पुस्तक तत्सुखे सुखित्वं को पाठकों ने काफी सराहा। करीब चार वर्ष पहले रोहित को चायवालाज स्टार्टअप के लिए नेशनल MSME अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। उन्होंने प्रेमानंद महाराज को अपनी पुस्तक तत्सुखे सुखित्वं भेंट की थी।



आध्यात्म की ओर झुके, सभी आउटलेट बंद किए

परिजन और दोस्तों के अनुसार, रोहित छह माह से आध्यात्म की ओर झुक गए थे। उन्होंने अपने सभी चायवालाज आउटलेट बंद कर दिए थे और लेखन व धार्मिक यात्राओं में समय बिताने लगे थे। अयोध्या, बनारस और वृंदावन के आश्रमों में उनका आना-जाना बढ़ गया था।



पुलिस जांच में जुटी

दौसा कोतवाली थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। जान देने के कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ। डिप्टी SP धर्मेंद्र शर्मा का कहना है कि मृतक के पास कोई लिखित नोट बरामद नहीं हुआ है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, आने पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।



रोहित के पिता हितेंद्र मोहन शर्मा मेडिकल स्टोर चलाते हैं, जबकि उनकी पत्नी एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं। उनके परिवार में 7 वर्ष का एक बेटा भी है।



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