सांसद सीपी जोशी को फिर मिली अहम जिम्मेदारी, बने लोकसभा की याचिका समिति के सभापति

Jageshwar prasad | Apr 29, 2026, 17:46 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के भाजपा सांसद सीपी जोशी को लोकसभा की 15 सदस्यीय याचिका समिति का दोबारा सभापति नियुक्त किया गया है। यह समिति नागरिकों की शिकायतों और संसद में पेश याचिकाओं पर सुनवाई कर सरकार को निर्देश देती है।

News In Short

  • चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी दूसरी बार लोकसभा की याचिका समिति के सभापति मनोनीत।
  • जोशी के साथ मनोज तिवारी और कमलजीत शेहरावत सहित 14 सांसद बने समिति के सदस्य।
  • सभापति बनने पर जोशी ने पीएम मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का आभार जताया।
  • याचिका समिति को नागरिकों की समस्याओं पर सीधे मंत्रालयों से जवाब-तलब करने का हक।
  • जोशी सहकारी समिति संशोधन विधेयक की संयुक्त समिति के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

News In Detail

Chittorgarh: राजस्थान में चित्तौड़गढ़ सांसद और भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी को एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें लोकसभा की महत्वपूर्ण याचिका (पिटीशन) समिति का दोबारा सभापति मनोनीत किया गया है। इस मनोनयन पर सांसद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का आभार व्यक्त किया है।



15 सदस्यीय समिति का स्वरूप

सांसद जोशी के नेतृत्व वाली इस समिति में देश के विभिन्न क्षेत्रों से 14 अन्य सांसदों को सदस्य बनाया गया है। इस समिति के सदस्यों में मनोज तिवारी, कमलजीत शेहरावत, विष्णु दत्त शर्मा, राजू बिष्टा, एंटो एंटनी, सुखदेव भगत और डॉ. राजकुमार सांगवान सहित अन्य सदस्य शामिल हैं।



सी.पी. जोशी का संसदीय अनुभव

सीपी जोशी वर्तमान में केवल याचिका समिति के सदस्य ही नहीं हैं, बल्कि वे कई अन्य महत्वपूर्ण समितियों में भी सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। वे सार्वजनिक उपक्रम समिति (COPU) और ऊर्जा समिति के सदस्य हैं। इसके अलावा उन्होंने बहु-राज्य सहकारी समिति (संशोधन) विधेयक, 2022 की संयुक्त समिति के सभापति के रूप में भी अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दी हैं।



लोकसभा याचिका समिति

लोकसभा की याचिका समिति सीधे तौर पर आम नागरिकों से जुड़ी होती है। इसके मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:


आम जनता की सुनवाई: नागरिकों द्वारा संसद में उठाई गई याचिकाओं (Petitions) पर विचार करना।


जवाबदेही: याचिकाओं पर संबंधित मंत्रालयों और सरकार से राय मांगना।


समाधान: याचिकाओं के निपटान के लिए निर्देश देना और सदन में विस्तृत रिपोर्ट पेश करना।


अधिकारों की रक्षा: देश के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना और प्रशासनिक पारदर्शिता लाना।



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