rajasthan cyber crime साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश, एक्सिस बैंक का पूर्व कर्मचारी भी गिरफ्तार
Jaipur. साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों पर काबू पाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत राजस्थान के झालावाड़ जिले के भवानीमंडी थाना पुलिस ने एक गिरोह का पर्दाफाश किया, जो फर्मों के बैंक खातों की खरीद-फरोख्त कर करोड़ों रुपए की ऑनलाइन ठगी में शामिल था। पुलिस ने गिरोह के चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक्सिस बैंक का पूर्व कर्मचारी कन्हैयालाल बागरी भी शामिल है।
जांच में आया सामने
झालावाड़ के एसपी अमित कुमार ने बताया कि आरोपी फर्मों के करंट खातों को लाखों रुपए में खरीदते थे और इन खातों का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धन को ट्रांसफर करने के लिए करते थे। जांच में पाया गया कि आरोपियों की फर्मों "मेवाड़ा किराना एंड जनरल स्टोर" और "राधाकृष्णा ट्रेडिंग कंपनी" के खातों पर देशभर में 308 साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज की गई थीं।
साइबर नोडल थाना भवानीमंडी के कांस्टेबल तेजेंद्र सिंह को सूचना मिली थी कि आरोपी दिनेश माली और धीरेंद्र अपने बैंक खातों को म्यूल बैंक खातों के रूप में उपयोग कर रहे हैं। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।
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4 आरोपी गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों में दिनेश माली (22), कन्हैयालाल बागरी (38), निखिल नामा (20), और राजेश नागर (30) शामिल हैं। इन आरोपियों के पास से फर्मों के चेक बुक और एटीएम कार्ड भी बरामद किए गए हैं। इस सफलता को एसपी अमित कुमार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चिरंजी लाल मीणा और वृताधिकारी प्रेमकुमार के निर्देशन में अंजाम दिया गया।
राजस्थान बना साइबर फ्रॉड का अड्डा: चिंताजनक बात यह है कि राजस्थान में साइबर अपराध बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। पुलिस साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। झालावाड़ पुलिस और दूसरे स्थनों की पुलिस ऐसे मामलों का खुलासा कर रही है। इसके बावजूद इस तरह के अपराध बढ़ रहे हैं।
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FAQ
- 1.साइबर फ्रॉड गिरोह ने कितने रुपए की ठगी की थी?
पुलिस ने गिरोह के बैंक खातों का विश्लेषण किया और पाया कि इन खातों के माध्यम से करोड़ों रुपए की ठगी की गई थी। - 2. गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कौन-कौन शामिल हैं?
गिरफ्तार आरोपियों में कन्हैयालाल बागरी (पूर्व एक्सिस बैंक कर्मचारी), दिनेश माली, निखिल नामा, और राजेश नागर शामिल हैं। - 3.पुलिस ने इस गिरोह को कैसे पकड़ा?
पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी अपने बैंक खातों को म्यूल खातों के रूप में उपयोग कर रहे थे। सूचना और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने गिरोह का पर्दाफाश किया।