साइबर ठगी हो रही है हाईटेक, म्यूल अकाउंट से लेकर क्रिप्टो तक पूरा नेटवर्क, पुलिस ने किया अलर्ट

Amit Baijnath Garg | Oct 20, 2025, 15:25 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में साइबर ठगी में म्यूल अकाउंट और एक्स वॉलेट से फर्जी ट्रांजेक्शन कर ठग रकम विदेश में ट्रांसफर कर रहे। इस तरह की घटनाओं से पुलिस ने सावधान रहने की सलाह दी।

Jaipur. राजस्थान में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और जांच एजेंसियों को धोखेबाजों की नई तरकीबें चौंका रही हैं। ठग अब बारीक तकनीकी मॉड्यूल पर काम कर रहे हैं, जिसके चलते खाता सीज होते ही वे रकम को पलक झपकते ही दूसरे म्यूल अकाउंट में शिफ्ट कर देते हैं। ये गिरोह लाइव मॉनिटरिंग ऐप से हर ट्रांजेक्शन पर निगरानी रखते हैं।



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भिवाड़ी में खुला नेटवर्क

भिवाड़ी पुलिस द्वारा गिरफ्तार एक म्यूल अकाउंट होल्डर से पूछताछ में पता चला कि आरोपी लगातार उन खातों को ट्रैक करते हैं, जिन पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। जैसे ही कोई खाता फ्रीज होता है, वे तुरंत पैसे को दूसरे खाते में डाल देते हैं।



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म्यूल अकाउंट कैसे बनते हैं?

गिरोह शुरुआत में सोशल मीडिया विज्ञापनों का सहारा लेता है। वे घर बैठे कमाएं जैसे आकर्षक ऑफर डालते हैं। लिंक खोलते ही व्यक्ति का मोबाइल नंबर और आईपी एड्रेस गिरोह के पास पहुंच जाता है। इसके बाद ठग करंट अकाउंट की जानकारी लेते हैं या नए खाते खुलवाते हैं।



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क्या ध्यान रखना है जरूरी

अनजान लिंक न खोलें। आईपी और नंबर ट्रेस होते हैं। घर बैठे कमाई ऑफर पर भरोसा न करें। 90 फीसदी स्कैम इन्हीं से शुरू होते हैं। अपना बैंक खाता किसी को उधार न दें। यह गिरोह का म्यूल अकाउंट बन जाता है। KYC लिंक से सतर्क रहें। तुरंत अकाउंट कंट्रोल दूसरे के पास जाता है। साइबर ठगी की राशि कहां जाती है? यह लोकल से क्रिप्टो तंत्र तक पूरा नेटवर्क फैला हुआ है।



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एक्स वॉलेट ऐप का उपयोग

जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह एक्स वॉलेट ऐप का उपयोग करता है। पैसे पहले विदेशी डिजिटल करेंसी में कन्वर्ट करते हैं, फिर बिटकॉइन में बदलते हैं। अंतिम चरण में ये क्रिप्टो दुबई करेंसी में बदल दी जाती है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए ट्रैकिंग करना बेहद कठिन हो जाता है।



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गिरोह की कड़ियां दिल्ली से यूएई तक

भिवाड़ी पुलिस की पूछताछ में आरोपी राशिद ने बताया कि वह हरिद्वार निवासी अमित शर्मा के लिए काम करता था। तकनीकी आधार पर पुलिस दिल्ली पहुंची, जहां से एक और आरोपी अंकित शर्मा पकड़ा गया। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह अब तक 122 करोड़ रुपए से अधिक की साइबर ठगी कर चुका है।



FAQ

  1. 1. साइबर ठगी (Cyber Fraud) सबसे ज्यादा कैसे होती है?
    ज्यादातर मामले सोशल मीडिया विज्ञापन, फर्जी कमाई के ऑफर और KYC लिंक के जरिए होते हैं। लोग लोभवश लिंक खोल देते हैं, जिससे वे फर्जी नेटवर्क में फंस जाते हैं।
  2. 2. म्यूल अकाउंट (Mule Account) क्या होता है?
    ऐसा बैंक खाता जिसे ठग फंड मूवमेंट के लिए इस्तेमाल करते हैं। कई बार असली खाताधारक को खुद पता नहीं होता कि उसका खाता ठगों द्वारा उपयोग किया जा रहा।
  3. 3. बचाव कैसे करें?
    किसी भी संदिग्ध लिंक, ऐप डाउनलोड या खाते के उपयोग की पेशकश को तुरंत मना करें। बैंक डिटेल शेयर करना कानूनी जोखिम भी खड़ा कर सकता है।


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