7 साल से नहीं हो रहे थे कोर्ट में पेश, अब 8 पुलिसकर्मियों को किया भगोड़ा घोषित
News In Short
- धौलपुर कोर्ट ने 8 पुलिसकर्मियों को भगोड़ा घोषित कर स्थायी वारंट जारी किए।
- ये पुलिसकर्मी घर में घुसकर मारपीट, तोड़फोड़ और नकदी ले जाने के आरोपी हैं।
- पिछले 7 साल से कोई भी आरोपी पुलिसकर्मी अदालत में पेश नहीं हुआ था।
- सभी आरोपी धौलपुर जिले में तैनात रहे, फिर भी कोर्ट के आदेश की अवहेलना की।
- कोर्ट ने डीजीपी और भरतपुर रेंज आईजी को विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए।
News In Detail
राजस्थान के धौलपुर जिले में एक अदालत ने 8 पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें भगोड़ा घोषित किया है और उनके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किए हैं। ये पुलिसकर्मी कंचनपुर थाना क्षेत्र के जमालपुरा गांव में एक घर में घुसकर मारपीट करने, तोड़फोड़ करने और नकदी ले जाने के मामले में पिछले 7 साल से अदालत में पेश नहीं हुए थे।
बाड़ी एसीजेएम-2 कोर्ट की मजिस्ट्रेट चित्राक्षी सिंह ने 21 मई को अपने आदेश में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि सभी पुलिसकर्मी 7 सालों तक धौलपुर जिले में ही पदस्थापित रहने के बाद भी कोर्ट में पेश नहीं हुए। कोर्ट ने यह भी कहा कि इन पुलिसकर्मियों ने कोर्ट की ओर से जारी जमानती वारंट और गिरफ्तारी वारंट को गंभीरता से नहीं लिया और कोर्ट के आदेशों की अवहेलना की है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता एडवोकेट होतम सिंह खटाना ने अदालत को बताया कि 4 नवंबर 2015 को वह और उनका परिवार गांव जमालपुर में अपने घर पर थे। इसी दौरान दो गाड़ियों में कोबरा टीम और डीएसटी के साथ कंचनपुर थाना पुलिस गांव पहुंची। उस समय कंचनपुर के तत्कालीन थाना प्रभारी हरी सिंह मीणा भी उनके साथ थे।
शिकायतकर्ता ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने उनके भाई और ताई के साथ गाली-गलौज की और धक्का-मुक्की की। इसके साथ ही घर में रखा सामान तोड़ा और लूटपाट की। हालांकि मौके पर मौजूद थाना प्रभारी हरी सिंह मीणा ने उनको रोका और वापस भेज दिया।
थाने में नहीं हुई रिपोर्ट दर्ज
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने इस मामले को लेकर तत्कालीन थाना प्रभारी हरी सिंह मीणा से शिकायत की और थाने में भी रिपोर्ट दी। लेकिन धौलपुर जिले में कोबरा टीम एसपी के निर्देश पर काम करती है, इसलिए थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने बाड़ी एसीजेएम-2 कोर्ट में परिवाद दायर किया।
कोर्ट ने जारी किए थे वारंट, लेकिन कोई नहीं आया
बाड़ी एसीजेएम-2 कोर्ट ने मामले में 6 दिसंबर 2018 को संज्ञान लेते हुए आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ वारंट जारी किए थे। लेकिन इन वारंट जारी होने के बावजूद पिछले 7 साल से कोई भी पुलिसकर्मी कोर्ट में पेश नहीं हुआ।
इन पुलिसकर्मियों में विनोद शर्मा जो उस समय एएसआई और पीसीआर धौलपुर के प्रभारी थे, राकेश कुमार मीणा जो एएसआई थाना दिहोली में तैनात थे, प्रद्युम्न सिंह जो एएसआई चौकी जसुपुरा में थे, हरिओम मीणा जो एएसआई पुलिस लाइन में थे, विनोद कुमार जो हेड कॉन्स्टेबल थाना सरमथुरा में थे, जितेंद्र मीणा जो हेड कॉन्स्टेबल पुलिस लाइन में थे, रामनाथ जो कॉन्स्टेबल एडीएफ एएसपी ऑफिस बाड़ी में थे और राजपाल जो कॉन्स्टेबल कोबरा टीम में थे, शामिल हैं।
अब भगोड़ा घोषित कर स्थायी वारंट जारी
मामले की सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट चित्राक्षी सिंह ने पाया कि ये सभी पुलिसकर्मी 7 सालों तक धौलपुर जिले में ही तैनात रहे, फिर भी उन्होंने कोर्ट में पेश होना उचित नहीं समझा। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी राजकार्य में व्यस्त होने और कथित राजीनामा जैसे भ्रामक तथ्यों का आधार लेकर कोर्ट में पेश होने और गिरफ्तारी से बचते रहे।
इन्हीं कारणों से कोर्ट ने सभी 8 पुलिसकर्मियों को भगोड़ा घोषित करते हुए उनके खिलाफ स्थायी वारंट जारी कर दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने डीजीपी और भरतपुर रेंज आईजी को इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं।
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