दिव्यांगजन प्रमाण पत्रों के लिए उठाए नए कदम, संभागीय मुख्यालयों पर बनेंगे सत्यापन बोर्ड

Ashish Bhardwaj | Jul 16, 2026, 15:23 IST
दिव्यांगजन प्रमाण पत्रों
राजस्थान में दिव्यांगजन प्रमाण पत्रों के लिए नए कदम उठाए गए हैं। अब सभी सात संभागीय मुख्यालयों पर सत्यापन बोर्ड बनाए जाएंगे। यह निर्देश हाई कोर्ट के 30 अप्रैल 2026 को आए फैसले की पालना में जारी हुए हैं।

ऐसे समझें पूरा मामला

  • राजस्थान में दिव्यांगजन प्रमाण पत्रों के लिए नए कदम उठाए गए।
  • ये कदम हाई कोर्ट के 30 अप्रैल 2026 को आए फैसले की पालना में उठाए।
  • प्रदेश के सभी सात संभागीय मुख्यालयों पर सत्यापन बोर्ड बनाए जाएंगे।
  • जांच रिपोर्ट से असंतुष्ट होने पर अपील बोर्ड में गुहार लगा सकेंगे दिव्यांगजन।

Jaipur: राजस्थान में दिव्यांगजन प्रमाण पत्रों में आ रही खामियों को दूर करने नए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। यह निर्देश हाई कोर्ट के 30 अप्रैल 2026 को आए फैसले की पालना में जारी हुए हैं।



​सभी 7 संभागों में विशेष दिव्यांगता सत्यापन बोर्ड

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी संभागीय मुख्यालयों पर विशेष दिव्यांगता सत्यापन बोर्ड बनाए जाएंगे। ये बोर्ड जयपुर, जोधपुर, अजमेर, बीकानेर, कोटा, उदयपुर और भरतपुर के मेडिकल कॉलेजों तथा उनसे संबद्ध प्रमुख अस्पतालों में बनेंगे।



ये बोर्ड दिव्यांगता की गहन जांच करेंगे। इस बोर्ड में कम से कम असिस्टेंट प्रोफेसर या उससे उच्च पद के विशेषज्ञ डॉक्टरों को शामिल किया जाएगा।



सरकार ने निर्देश दिए हैं कि ये सभी मनोनीत मेडिकल कॉलेज आवश्यक मानक उपकरणों से पूरी तरह सुसज्जित होने चाहिए। संबंधित अस्पतालों में हर श्रेणी की दिव्यांगता को प्रमाणित करने के लिए संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता रहनी चाहिए।



​भर्तियों में UDID कार्ड हुआ अनिवार्य

कार्मिक विभाग के इस परिपत्र के जरिए भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के लिए ये नियम लागू किए गए हैं:



​भर्ती में अनिवार्यता: सभी भर्ती एजेंसियां और नियोक्ता विभाग अब यह तय करेंगे कि आवेदन करते समय आवेदकों के पास एक वैध यूडीआईडी कार्ड अवश्य हो।



​विज्ञापनों में स्पष्ट उल्लेख: सभी भर्तियों के विज्ञापनों में भर्ती संस्थाएं स्पष्ट रूप से दिव्यांग आवेदकों के लिए स्पष्ट उल्लेख करेंगी। वे यह अंकित करेंगी कि दिव्यांगजन श्रेणी में चयनित अभ्यर्थियों की पात्रता का निर्धारण संभागीय बोर्ड की जांच के बाद ही मान्य होगा।



भले ही किसी अभ्यर्थी ने पहले से ही कोई प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया हो, उसकी अंतिम पात्रता का निर्धारण वर्तमान में प्रचलित मानकों के अनुसार गठित बोर्ड द्वारा ही किया जाएगा।



​असंतुष्टों के लिए अपीलीय बोर्ड का गठन

​अभ्यर्थियों और सेवारत कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा दी गई है। यदि कोई दिव्यांग अभ्यर्थी संभागीय मुख्यालय स्तर के बोर्ड की जांच से असंतुष्ट होता है तो उसे संभाग स्तर पर ही गठित अपीलीय बोर्ड के समक्ष अपील करने का अधिकार होगा।



इस अपीलीय बोर्ड की अध्यक्षता एडिशनल प्रिंसिपल या मेडिकल अधीक्षक करेंगे। इसके सदस्य प्रारंभिक सत्यापन बोर्ड के सदस्यों से उच्च पद धारित होंगे।



कार्मिक विभाग के निर्देशों के तहत पूर्व से कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों/अधिकारियों के लिए सत्यापन प्रक्रिया के लिए भी नियम स्पष्ट कर दिए गए हैं।



यदि दोबारा सत्यापन के दौरान पहले के प्रमाण पत्र और वर्तमान जांच में दिव्यांगता के प्रतिशत में कोई अंतर पाया जाता है तो ऐसे कर्मचारियों की योग्यता का निर्धारण चयन के समय प्रचलित दिव्यांगता मेडिकल मानकों के आधार पर ही किया जाएगा।



यदि कोई कर्मचारी इस निर्णय से असंतुष्ट रहता है तो वह भी अपीलीय बोर्ड के समक्ष गुहार लगा सकेगा। चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग इस संबंध में जल्द ही एक पृथक विस्तृत गाइडलाइन जारी करेंगे।



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