EWS आरक्षण पर भाटी की यात्रा से गरमाई सियासत, केंद्रीय मंत्री शेखावत बोले- जल्द निकलेगा रास्ता
राजस्थान में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के आरक्षण को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो सकती है। शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने जिन नियमों को बदलने के लिए प्रदेश में यात्रा निकाली, अब केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी उन्हीं नियमों पर सवाल उठाए हैं।
शेखावत ने शनिवार, 17 अक्टूबर को जोधपुर में कहा कि EWS आरक्षण की पात्रता शर्तों में बदलाव को लेकर केंद्र सरकार के स्तर पर बातचीत चल रही है। हाल में इस मुद्दे पर बैठक भी हुई है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द कोई रास्ता निकलेगा।
शेखावत बोले- खेती की जमीन होने का मतलब अमीर होना नहीं
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देकर बड़ा कदम उठाया था। लेकिन इसकी कुछ शर्तों से खेती पर निर्भर परिवारों को परेशानी हो रही है। खासकर पश्चिमी राजस्थान में कई परिवारों के पास पांच एकड़ या उससे ज्यादा जमीन है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे आर्थिक रूप से मजबूत हैं।
रेगिस्तानी इलाकों में खेती बारिश पर निर्भर रहती है। कई जगह सिंचाई के साधन भी नहीं हैं। ऐसे में जमीन का रकबा बड़ा होने के बावजूद परिवार की कमाई बहुत कम हो सकती है।
शेखावत ने कहा कि इस मुद्दे को पहले भी सरकार के सामने उठाया गया था। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लंबित होने के कारण फैसला नहीं हो सका। अब उनके मुताबिक याचिका का निपटारा हो चुका है और सरकार सभी पहलुओं पर विचार कर रही है।
रविंद्र भाटी ने 25 सितंबर से शुरू की थी EWS सरलीकरण यात्रा
EWS के नियम बदलने की मांग को लेकर शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी पिछले कई सप्ताह से सक्रिय हैं। उन्होंने 25 सितंबर को बाड़मेर से EWS सरलीकरण यात्रा शुरू की थी।
यात्रा के दौरान भाटी ने पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों में लोगों से मुलाकात की। भाटी का कहना है कि राजस्थान जैसे राज्य में जमीन के आकार से किसी परिवार की आर्थिक स्थिति तय नहीं की जा सकती।
उनका तर्क है कि बाड़मेर और जैसलमेर के रेगिस्तानी इलाकों की पांच एकड़ जमीन की तुलना किसी ऐसे इलाके की पांच एकड़ जमीन से नहीं हो सकती, जहां सिंचाई के अच्छे साधन हैं और खेती से ज्यादा कमाई होती है।
भाटी ने उठाई थीं ये छह प्रमुख मांगें
अगस्त में केंद्र ने कहा था- बदलाव का प्रस्ताव नहीं, अब मंत्री ने दिए संकेत
इस मामले में केंद्र सरकार के दो अलग-अलग समय पर आए बयान भी महत्वपूर्ण हैं। 5 अगस्त 2026 को लोकसभा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने लिखित जवाब में बताया था कि EWS आरक्षण के मौजूदा प्रावधानों में संशोधन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
अब 17 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि पात्रता नियमों में बदलाव को लेकर सरकार में बातचीत चल रही है। हालांकि अगस्त का जवाब आरक्षण के व्यापक प्रावधानों से जुड़ा था, जबकि शेखावत ने पात्रता की शर्तों पर बात की है।
समझें, राजस्थान और केंद्र के EWS नियमों में क्या अंतर है
राजस्थान में सरकारी नौकरियों और राज्य के शिक्षण संस्थानों के लिए EWS की संपत्ति संबंधी शर्तें अक्टूबर 2019 में हटा दी गई थीं। लेकिन केंद्रीय नौकरियों और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों के लिए जमीन और मकान से जुड़ी शर्तें अब भी लागू हैं।
| नियम | राजस्थान की राज्य व्यवस्था | केंद्र की व्यवस्था |
|---|---|---|
| EWS आरक्षण | 10 प्रतिशत | 10 प्रतिशत तक |
| सालाना पारिवारिक आय | 8 लाख रुपए से कम | 8 लाख रुपए से कम |
| पांच एकड़ कृषि भूमि की रोक | हटाई गई | लागू |
| मकान और प्लॉट की तय सीमा | संबंधित संपत्ति शर्तें हटाई गईं | लागू |
इसका मतलब है कि राजस्थान में कोई उम्मीदवार राज्य के EWS नियमों के तहत पात्र हो सकता है, लेकिन केंद्रीय भर्ती में जमीन की शर्त के कारण उसे आरक्षण का लाभ नहीं मिले।
75 से ज्यादा विधायकों के समर्थन का दावा
रविंद्र सिंह भाटी ने अपनी यात्रा के दौरान दावा किया था कि EWS नियमों में बदलाव की मांग को प्रदेश के 75 से ज्यादा विधायकों का समर्थन मिला है। उनके मुताबिक इस संबंध में मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष को पत्र भी भेजे गए हैं।
भाटी चाहते हैं कि राजस्थान विधानसभा के जरिए केंद्र सरकार को नियमों में बदलाव का प्रस्ताव भेजा जाए। हालांकि 75 से ज्यादा विधायकों के समर्थन का यह आंकड़ा भाटी का दावा है।
पंचायत चुनाव के बीच EWS का मुद्दा क्यों अहम?
राजस्थान में पंचायत चुनाव के बीच EWS का मुद्दा राजनीतिक रूप से भी अहम हो गया है। रविंद्र सिंह भाटी की यात्रा से यह मांग पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों तक पहुंची है। अब केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के बयान से इस मुद्दे पर केंद्र सरकार का रुख भी चर्चा में आ गया है।
राजनीतिक तौर पर बड़ा सवाल यह है कि अगर EWS की शर्तों में बदलाव होता है तो उसका फायदा किन परिवारों को मिलेगा और क्या इसका असर पंचायत चुनाव के माहौल पर भी पड़ेगा?
राजस्थानी भाषा की मान्यता पर भी बोले शेखावत
जोधपुर में बातचीत के दौरान गजेंद्र सिंह शेखावत ने राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यह राजस्थान के लोगों की पहचान से जुड़ा मुद्दा है। वे वर्ष 1991 से इस मांग के साथ जुड़े हैं। शेखावत के मुताबिक विभिन्न भाषाओं को मान्यता देने के 32 से ज्यादा प्रस्ताव लंबित हैं। गृह मंत्रालय का संबंधित विभाग इस पर काम कर रहा है।