फर्जी डिग्री मामले में दो विश्वविद्यालयों पर कसेगा शिकंजा, एसओजी करेगी जांच

Ashish Bhardwaj | Jul 27, 2026, 13:58 IST
बैकडेट डिग्री मामला
राजस्थान में सरकारी भर्तियों में इस्तेमाल हुई कथित फर्जी बैकडेट डिग्रियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर पर रोक लगाई। अब SOG दो विश्वविद्यालयों की जांच तेज करेगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • फर्जी बैकडेट डिग्री मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच का रास्ता खोला।
  • SOG अब यूनिवर्सिटी और संदिग्धों से फिर कर सकेगी पूछताछ।
  • मामले में अब तक करीब 30 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
  • 300 से ज्यादा अभ्यर्थियों की भूमिका की जांच जारी है।
  • सत्य साई और हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी की डिग्रियां जांच के घेरे में।

राजस्थान में सरकारी भर्तियों में कथित फर्जी बैकडेट डिग्रियों के इस्तेमाल का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश और राजस्थान हाई कोर्ट के स्टे ऑर्डर पर रोक लगा दी है। इससे SOG की जांच फिर से आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। अब तक इस मामले में करीब 30 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। 300 से ज्यादा अभ्यर्थियों की भूमिका की जांच अभी चल रही है।



यह मामला अंतरराज्यीय फर्जी डिग्री रैकेट से जुड़ा है, जिसमें सरकारी शिक्षक, पीटीआई यानी पीटीआई (PTI – Physical Training Instructor) और अन्य प्रतियोगी भर्तियों में कथित तौर पर बैकडेट डिग्रियों के इस्तेमाल का आरोप है। इसमें मध्य प्रदेश की श्री सत्य साई यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंसेज और उत्तराखंड की हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी का नाम सामने आया है। अब राजस्थान पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसओजी (SOG – Special Operations Group) की जांच की रफ्तार तेज होने जा रही है।



रेवड़ियों की तरह बंटीं डिग्रियां

SOG की शुरुआती जांच में जो जानकारी सामने आई है, उसने राजस्थान की शिक्षा और भर्ती प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। SOG के अनुसार मध्य प्रदेश के सीहोर-भोपाल स्थित श्री सत्य साई यूनिवर्सिटी और उत्तराखंड की हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी से बीपीएड यानी बीपीएड (B.P.Ed. – Bachelor of Physical Education) सहित अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की डिग्रियां कथित रूप से भारी रकम लेकर बैकडेट में तैयार की गईं।



जांच एजेंसी का आरोप है कि इन कथित फर्जी डिग्रियों और मार्कशीट का इस्तेमाल राजस्थान में हुई पीटीआई भर्ती परीक्षा और अन्य तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्तियों में अंतिम चयन पाने के लिए किया गया। SOG के मुताबिक यूनिवर्सिटी प्रबंधकों और दलालों के गठजोड़ ने डिग्रियों का वितरण इस तरह किया, मानो ये सामान्य कागज हों। इससे वर्षों से मेहनत कर रहे वास्तविक अभ्यर्थियों का हक प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।



30 गिरफ्तारियां, 300 से ज्यादा जांच के दायरे में

राजस्थान SOG के इस अभियान में अब तक कई गिरफ्तारियां और जब्तियां हो चुकी हैं, हालांकि अदालती रोक के कारण मुख्य आरोपी अब तक जांच के दायरे से बाहर बने हुए थे। SOG टीम ने अब तक फर्जी डिग्री बेचने वाले कथित गिरोह के दलालों, एजेंटों और फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी पाने के आरोपी करीब 30 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है।



फिलहाल राजस्थान के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत या चयन सूची में शामिल 300 से ज्यादा ऐसे अभ्यर्थियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है, जिन पर इन दो विश्वविद्यालयों से बैकडेटेड डिग्री हासिल करने का आरोप है। यह अभी जांच का विषय है, दोष अभी सिद्ध नहीं हुआ है।



जनवरी 2026 में SOG ने मध्य प्रदेश स्थित यूनिवर्सिटी परिसर में छापा मारा था, जहां से 67 से ज्यादा संदिग्ध बीपीएड डिग्रियां, मुहरें, ब्लैंक मार्कशीट और हार्ड डिस्क बरामद हुई थीं।



अदालती स्टे से रुकी थी जांच

उच्च न्यायालयों से मिले अंतरिम संरक्षण के कारण SOG की जांच की कड़ियां रुक गई थीं। अब देश की शीर्ष अदालत ने इस जांच को फिर से बहाल कर दिया है।



मध्य प्रदेश और राजस्थान हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रबंधनों और संदिग्धों को गिरफ्तारी व जांच से जो अंतरिम संरक्षण दिया था, सुप्रीम कोर्ट ने उसे पूरी तरह निष्प्रभावी कर दिया।



सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित पक्षों को 24 अप्रैल 2026 को गिरफ्तारी से जो अंतिम संरक्षण दिया गया था, वह सिर्फ 18 मई 2026 तक ही प्रभावी था। इसके बाद भी हाईकोर्ट के हवाले से राहत जारी रखना कोर्ट ने अवैध माना।



सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई के लिए 7 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। तब तक SOG को जांच में पूरी छूट मिल गई है। यानी यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है और अंतिम फैसला आना बाकी है।



अब दोनों यूनिवर्सिटी के सिस्टम की जांच होगी

राजस्थान SOG के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक यानी एडीजी (ADG – Additional Director General) विशाल बंसल के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में अहम कदम है।



उनके मुताबिक मध्य प्रदेश और राजस्थान हाई कोर्ट के स्टे ऑर्डर हटने के बाद अब SOG टीम दोनों विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार, प्रशासनिक कर्मचारियों और कथित दलाल सिंडिकेट को समन भेजकर पूछताछ करेगी।



एडीजी के अनुसार SOG की जांच रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान सरकार ऐसे कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त करने और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे चलाने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू कर सकती है। यह भी अभी भविष्य की संभावित प्रक्रिया है, अंतिम कार्रवाई जांच पूरी होने के बाद ही तय होगी।



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