पांच राज्यों के चुनाव में दिखा सत्ता का कौशल, घोटाले के घेरे में फिर आया पावरफुल चेहरा

Jinesh Jain | May 09, 2026, 17:24 IST
Photograph: (the sootr)
यह सप्ताह राजस्थान के लिए आत्ममंथन का रहा। एक तरफ जहां हमारे राजनीतिक रणनीतिकारों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, वहीं राज्य के भीतर भाषा की मर्यादा, कोचिंग संस्थानों की नैतिकता और प्रशासनिक भ्रष्टाचार ने व्यवस्था को आईना दिखाया।

राजस्थान की राजनीति की तासीर हमेशा से ही रेत जैसी रही है - कभी शांत तो कभी बवंडर की तरह उग्र। इस सप्ताह राजस्थान की चर्चा केवल जयपुर या दिल्ली के गलियारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसकी गूंज दक्षिण के केरल से लेकर पूर्व के असम और बंगाल तक सुनाई दी। यह सप्ताह राजस्थान के चार दिग्गज नेताओं की साख, कोचिंग संस्थानों की दावेदारी पर कड़ा प्रहार और प्रशासनिक शुचिता के पुनरुद्धार का गवाह बना।



चार चेहरे, चार कहानियां

पांच राज्यों के चुनाव में राजस्थान के चार प्रमुख चेहरों भूपेंद्र यादव, सुनील बंसल, सचिन पायलट और भंवर जितेंद्र सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर थी। इनके परिणामों ने न केवल राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय की, बल्कि यह भी बताया कि संगठन की शक्ति और रणनीति कैसे काम करती है।


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​पश्चिम बंगाल को अक्सर चुनावी हिंसा और कठिन राजनीतिक ध्रुवीकरण के लिए जाना जाता है, वहां भाजपा का 200 से अधिक सीटें जीतना किसी चमत्कार से कम नहीं था। इस ऐतिहासिक जीत के पीछे दो राजस्थानी शिल्पकार थे: भूपेंद्र यादव और सुनील बंसल। अलवर से सांसद और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपनी मौन कार्यशैली से तृणमूल कांग्रेस के किले में सेंध लगाई। वहीं, कोटपूतली के मूल निवासी सुनील बंसल ने यूपी के बाद बंगाल में अपनी संगठन क्षमता का लोहा मनवाया। इन दोनों की जुगलबंदी ने यह सिद्ध कर दिया कि राजस्थान के रणनीतिकार अब राष्ट्रीय राजनीति की धुरी बन चुके हैं।



कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने दक्षिण के बैकवाटर्स केरल में अपनी छाप छोड़ी। केरल में कांग्रेस की 10 साल बाद हुई शानदार वापसी का श्रेय काफी हद तक पायलट की सूक्ष्म प्रबंधन रणनीति को जाता है। उन्होंने न केवल रैलियों में भीड़ जुटाई, बल्कि कांग्रेस की पारंपरिक गुटबाजी को दरकिनार कर टिकट वितरण में जो संतुलन साधा, उसने नतीजों को कांग्रेस के पक्ष में मोड़ दिया। 14 में से 10 जिलों का सघन दौरा कर उन्होंने दिखा दिया कि वे केवल एक क्षेत्रीय नेता नहीं, बल्कि कांग्रेस के अखिल भारतीय 'संकटमोचक' के रूप में उभर रहे हैं।


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​सफलता की इन कहानियों के बीच असम से आई हार ने भंवर जितेंद्र सिंह के लिए चुनौती खड़ी कर दी। असम के प्रभारी के रूप में जितेंद्र सिंह से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन परिणाम प्रतिकूल रहे। हालांकि, इस हार के बाद उन्होंने अपनी जिम्मेदारी स्वीकारते हुए जो नैतिकता दिखाई, वह दुर्लभ है। मल्लिकार्जुन खरगे को अपना इस्तीफा सौंपकर उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि हार की जिम्मेदारी भी उतनी ही 'शाही' होनी चाहिए जितनी जीत की खुशी।



जेजेएम घोटाले में महेश जोशी की गिरफ्तारी

सप्ताह का सबसे बड़ा धमाका एसीबी (ACB) द्वारा पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी रहा। 960 करोड़ रुपए के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में यह कार्रवाई राजस्थान की राजनीति में भूचाल ले आई है।



​इस मामले की जड़ें जून 2023 में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के धरने से जुड़ी हैं। फर्जी दस्तावेजों (इरकॉन इंटरनेशनल के जाली सर्टिफिकेट) के आधार पर टेंडर हासिल करने वाली फर्मों और उनके संचालकों के साथ पूर्व मंत्री की कथित संलिप्तता ने प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इससे पहले पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया था कि जांच की आंच अब पावरफुल चेहरों तक पहुंच चुकी है।





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जुबान की फिसलन और सियासत की तपिश

​तिजारा भाजपा विधायक महंत बालकनाथ द्वारा एक सरकारी कर्मचारी (JEN छोटेलाल मीणा) को संबोधित करते समय 'नाई' जैसे जातिसूचक शब्द का प्रयोग करना इस सप्ताह का सबसे संवेदनशील सामाजिक मुद्दा रहा। ​एक जनप्रतिनिधि की भाषा उसके व्यक्तित्व और दल की विचारधारा का प्रतिबिंब होती है। बालकनाथ के इस बयान से सैन समुदाय में गहरा रोष व्याप्त हो गया।



खैरथल और अलवर में हुए प्रदर्शनों ने भाजपा की राज्य इकाई को बैकफुट पर ला दिया। हालांकि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने माफी मांगकर मामले को शांत करने की कोशिश की है, लेकिन पीड़ित समुदाय अब भी विधायक की ओर से सार्वजनिक माफी की मांग पर अड़ा है। यह घटनाक्रम सत्ता के गलियारों में एक पुरानी सीख को फिर से दोहराता है—पद की गरिमा शब्दों के चयन में निहित होती है।



कोचिंग हब का भ्रामक मायाजाल

राजस्थान के कोटा और सीकर देश के शिक्षा केंद्र माने जाते हैं। इस सप्ताह अपनी उपलब्धियों के कारण नहीं बल्कि भ्रामक विज्ञापनों के कारण चर्चा में रहे। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने कोचिंग संस्थानों द्वारा छात्रों और अभिभावकों के साथ किए जा रहे डेटा हेरफेर और भ्रामक दावों पर कड़ा रुख अपनाया है।



​कोटा के कोचिंग संस्थान मोशन एजुकेशन पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया। आरोप है कि संस्थान ने 91.2% सफलता का दावा किया, जबकि अधिकांश छात्र उनके नियमित कोर्स के थे ही नहीं। आई-एकलव्या ऑनलाइन कोर्स और टेस्ट सीरीज के छात्रों को अपना बताकर पेश करना एक बड़ा डिजिटल धोखा पाया गया।



​सीकर के करियर लाइन कोचिंग पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया। संस्थान 1650 चयनों का विवरण नहीं दे पाया और न ही छात्रों की लिखित सहमति पेश कर सका। अब किसी भी संस्थान को सफल छात्र का विज्ञापन करने पर उसका नाम, रैंक, फोटो के साथ कोर्स का नाम और अवधि स्पष्ट रूप से बतानी होगी। यह आदेश छात्रों के सटीक जानकारी प्राप्त करने के अधिकार की रक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।





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SI भर्ती परीक्षा-2021: दोबारा परीक्षा की राह

पेपर लीक के दंश से जूझ रहे राजस्थान के युवाओं के लिए एक बड़ी खबर आई। RPSC ने विवादों में रही एसआई और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2021 को अंततः रद्द कर दिया है। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद यह निर्णय लिया गया।



सितंबर 2026 में होने वाली इस पुनर्परीक्षा में कोई नया आवेदन नहीं लिया जाएगा। केवल वे 3,83,097 अभ्यर्थी बैठ पाएंगे जिन्होंने 2021 में परीक्षा दी थी। 16 से 30 मई तक आवेदन की प्रक्रिया होगी, जिससे पारदर्शी तरीके से परीक्षा का आयोजन सुनिश्चित किया जा सके। ​यह निर्णय उन मेहनती युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जिनका भविष्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया था।



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