पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल ने घुटने टेके, जानिए गिरफ्त में आने के अलावा नहीं बचा था कोई रास्ता
News In Short
- पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल के बचाव के सारे रास्ते हो गए थे बंद।
- जल जीवन मिशन घोटाले में सुबोध गुरुवार को दिल्ली में हुए पेश।
- पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल अदालत से हो चुके थे भगौड़ा घोषित।
- एसीबी कोर्ट जयपुर ने स्थाई गिरफ्तारी वारंट भी कर दिए थे जारी।
- गिरफ्तारी वारंट रद्ध करने की अर्जी भी हो गई थी खारिज।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान के चर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में फरार चल रहे रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल के पास आखिरकार कानून के आगे घुटने टेकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के कड़े शिकंजे के बीच सुबोध ने गुरुवार को दिल्ली में खुद को जांच एजेंसी के हवाले कर दिया।
एसीबी ने उन्हें हिरासत में लेने के बाद जयपुर लाकर औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है। दिलचस्प बात यह है कि सुबोध की गिरफ्तारी से ठीक पहले ही एसीबी की विशेष कोर्ट ने उन्हें भगौड़ा घोषित करते हुए उनके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किया था।
डीजीपी को मेल कर दी सूचना
सुबोध अग्रवाल ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अंतिम समय तक तकनीकी और कानूनी रास्तों का इस्तेमाल किया। जब उन्हें अहसास हो गया कि अग्रिम जमानत मिलना नामुमकिन है और कोर्ट से उन्हें भगौड़ा घोषित कर दिया गया है तो उन्होंने अपने एडवोकेट के जरिए राजस्थान डीजीपी को एक ईमेल भेजा। इस मेल में उन्होंने जांच में शामिल होने की इच्छा जताई। साथ ही दिल्ली में एक निश्चित समय व स्थान का विवरण दिया। इसी सूचना के आधार पर एसीबी की टीम दिल्ली पहुंची और उन्हें हिरासत में लिया।
कोर्ट से नहीं मिली राहत, बढ़ती गई मुश्किलें
पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल गिरफ्तारी रोकने के लिए हाईकोर्ट से लेकर एसीबी कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन हर तरफ से उन्हें निराशा हाथ लगी।
उन्होंने एसीबी द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द करने की चुनौती दी थी, लेकिन सुनवाई से पहले ही उनके वकील ने खुद को केस से अलग कर लिया।
उन्होंने एसीबी कोर्ट में तर्क दिया था कि एफआईआर में उनका नाम नहीं है, 14 महीने तक उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया। उन्होंने दलील दी कि मामला दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है, इसलिए गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है।
एसीबी ने कोर्ट में पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि अग्रवाल पीएचईडी विभाग के मुखिया थे। भ्रष्टाचार के इस खेल में उनकी भूमिका प्रथम दृष्टया सिद्ध हो चुकी है। कोर्ट ने एसीबी के तर्क को सही मानते हुए उनकी अर्जी खारिज कर दी थी।
क्यों भगौड़ा घोषित हुए अग्रवाल?
एसीबी की विशेष कोर्ट ने 13 मार्च को ही सुबोध अग्रवाल समेत चार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। एसीबी की कई टीमें देशभर में उनकी तलाश में छापेमारी कर रही थीं, लेकिन वे लगातार अंडरग्राउंड रहे।
बुधवार को कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सुबोध अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता जितेंद्र शर्मा, मुकेश गोयल और संजीव गुप्ता को भगौड़ा घोषित कर दिया। इसके साथ ही उनकी संपत्ति कुर्क करने की कार्यवाही का रास्ता भी साफ हो गया था। इसी दबाव के चलते अग्रवाल ने सरेंडर करने का फैसला लिया।
क्या है पूरा घोटाला?
राजस्थान में जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रुपये के टेंडर जारी करने और पाइप लाइन बिछाने के काम में भारी अनियमितताएं पाई गई थीं। आरोप है कि घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया और फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर टेंडर हासिल किए गए। इसमें पीएचईडी के ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई थी। इसी साल मार्च में एसीबी ने इस मामले में 10 अन्य अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया था।
अब आगे क्या?
एसीबी सुबोध अग्रवाल को जयपुर मुख्यालय लेकर आई है, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। ब्यूरो यह जानने की कोशिश कर रहा है कि इस घोटाले की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसमें कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं। वहीं, अन्य फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है और जल्द ही उनकी संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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