DSP समेत 4 पुलिसकर्मियों पर FIR का आदेश रद्द, हाई कोर्ट ने कहा-बिना प्रारंभिक जांच सीधे केस दर्ज कराना गलत
Ashish Bhardwaj | Apr 09, 2026, 18:36 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने डीएसपी समेत चार पुलिस कर्मियों के खिलाफ बिना प्रारंभिक जांच के एफआईआर दर्ज करने के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बीएनएसएस के तहत अधिकारियों को अपना पक्ष रखने और वरिष्ठ अधिकारियों से रिपोर्ट लेना जरूरी है।
News In Short
- हाई कोर्ट ने डीएसपी समेत चार पुलिस कर्मियों के खिलाफ बिना जांच FIR आदेश किया रद्द।
- कोर्ट ने कहा, बिना जांच लोक सेवकों पर FIR, BNSS की धारा 175(4) का उल्लंघन।
- विशेष अदालत ने एक आदेश में चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR का दिया था निर्देश।
- इसमें विशेष अदालत ने क्रॉस-मुकदमों की पूरी पृष्ठभूमि को किया था नजरअंदाज।
- अब विशेष अदालत का आदेश रद्द, प्रारंभिक जांच अनिवार्य करना आवश्यक।
News In Detail
जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ ने श्रीगंगानगर की विशेष अदालत के उस आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें डीएसपी समेत चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। कोर्ट ने इस आदेश को यांत्रिक और कानून की भावना के विपरीत बताया।
क्या है पूरा मामला?
लेकिन जब पुलिस की जांच से टेकचंद संतुष्ट नहीं हुआ तो उसने DGP विजिलेंस को शिकायत की। वहां से भी मनमाफिक कार्रवाई न होने पर उसने सीधा रास्ता अपनाया और 1 नवंबर 2025 को विशेष अदालत में डीएसपी प्रशांत कौशिक, एसआई सरदार सिंह, एएसआई मनोहर सिंह और चालक किशन सिंह के खिलाफ परिवाद दायर कर दिया।
बिना किसी गहन जांच के विशेष न्यायाधीश ने 21 नवंबर 2025 को आदेश जारी कर श्रीगंगानगर के पुलिस अधीक्षक को इन चारों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दे दिया।
चार दिन बाद सामने आई सच्चाई
हाईकोर्ट ने क्यों कहा गलत?
BNSS की धारा 223 है लोक सेवकों के लिए सुरक्षा कवच
इन दोनों शर्तों के बिना कोई भी मजिस्ट्रेट सीधे FIR दर्ज करने का आदेश नहीं दे सकता। कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान इसलिए बनाया गया है ताकि ईमानदार अफसरों को उनके काम में बाधा न आए और कोई भी व्यक्ति बदला लेने के लिए झूठा केस दर्ज न करा सके।
विशेष अदालत का आदेश रद्द, नई सुनवाई के निर्देश
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