पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल ऐसे आए एसीबी की गिरफ्त में, जानिए दिल्ली से जयपुर लाने तक की कहानी

Ashish Bhardwaj | Apr 09, 2026, 17:17 IST
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Photograph: (the sootr)

राजस्थान एसीबी को चर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में बड़ी सफलता मिली है। उसने दिल्ली से पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें दिल्ली से जयपुर लाया गया है।

News In Short

  • एसीबी को चर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में बड़ी सफलता मिली।
  • दिल्ली से पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल गिरफ्तार कर लिए गए हैं।
  • सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तार के लिए कई राज्यों में छापेमारी हो रही थी।
  • सुबोध अग्रवाल को दिल्ली से जयपुर लेकर पहुंची एसीबी, पूछताछ जारी।
  • पूर्व आईएएस सुबोध के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी हो चुका था जारी।

News in Detail

Jaipur: राजस्थान में चर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में फरार चल रहे पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल गुरुवार को एसीबी की गिरफ्त में आ गए। बताया जाता है कि सुबोध अग्रवाल ने दिल्ली में एसीबी के समक्ष पेश हुए, जहां उन्हें जांच एजेंसी ने गिरफ्तार कर लिया। एसीबी उन्हें दिल्ली से जयपुर लेकर आई है। उनसे एसीबी मुख्यालय में पूछताछ की जा रही है।

पूर्व एसीएस सुबोध ने अपने एडवोकेट के जरिए राजस्थान डीजीपी को ईमेल करके अनुसंधान में शामिल होने की इच्छा जताई थी। इसके लिए उन्होंने दिल्ली में समय और स्थान भी बता दिया था। इस सूचना के आधार पर एसीबी टीम दिल्ली पहुंची और गिरफ्तार कर लिया।

एसीबी को तलाशी में नहीं मिली कामयाबी

एसीबी की विशेष कोर्ट ने 13 मार्च को पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल समेत 4 आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। अग्रवाल की गिरफ्तारी के लिए एसीबी की कई टीमें देश के विभिन्न हिस्सों में लगातार छापेमारी कर रही थी। हैरान करने वाली बात यह रही कि एसीबी उन्हें तलाश नहीं कर पाई। आखिरकार सुबोध अग्रवाल खुद जांच एजेंसी के समक्ष पेश हुए। इससे पहले मार्च में एसीबी ने 10 अधिकारियों को गिरफ्तार किया था।

लगातार तोड़ते रहे एसीबी का सुरक्षा घेरा

पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल की तलाश में एसीबी की टीमें लगातार दबिश दे रही थी, लेकिन सुबोध अग्रवाल किसी शातिर अपराधी की तरह बार-बार सुरक्षा घेरे को तोड़कर भागने में सफल हो रहे थे। जांच में सामने आया है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने अब तक 100 से अधिक वाहनों का इस्तेमाल किया है। इसमें पुलिस को चकमा देने के लिए सबसे ज्यादा सहारा ऑटो रिक्शा का लिया गया।

फरारी में ऑटो में भी करते रहे सवारी

एसीबी का कहना है कि फरारी के दौरान सुबोध अग्रवाल ने अपनी पहचान और लोकेशन छिपाने के लिए निजी लग्जरी गाड़ियों के बजाय सार्वजनिक और छोटे वाहनों को प्राथमिकता दी। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान बार-बार ऑटो रिक्शा बदले। उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी हो चुका था, इसलिए वे हवाई यात्रा नहीं कर सकते थे। रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों पर एसीबी की पैनी नजर होने के कारण सुबोध अग्रवाल ने सड़क मार्ग से छोटे वाहनों के जरिए ठिकाने बदलना शुरू किया।

सलमान के फार्महाउस तक पहुंची एसीबी

कुछ समय पहले पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल के हरियाणा के सोहना में एक उद्योगपति के फार्म हाउस पर छिपे होने की सूचना मिली थी। एसीबी की टीम ने जब वहां घेराबंदी की, लेकिन भनक लगते ही अग्रवाल वहां से एक ऑटो में बैठकर रफूचक्कर हो गए। इससे पहले एसीबी सुबोध की तलाश के लिए बॉलीवुड स्टार सलमान खान के पनवेल स्थित फार्म हाउस भी पहुंच चुकी है।

गिरफ्तार नहीं होते तो होती संपत्ति कुर्क

फरार आरोपियों पर नकेल कसने के लिए कानूनी शिकंजा कड़ा किया गया। एसीबी कोर्ट संख्या-1 ने 13 मार्च को सुबोध अग्रवाल समेत अधिशाषी अभियंता जितेंद्र शर्मा, निजी व्यक्ति संजीव गुप्ता और तत्कालीन एसई मुकेश गोयल के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए। यदि आरोपी आत्मसमर्पण नहीं करते तो एसीबी ने अदालत के माध्यम से उनकी संपत्ति कुर्क करने की तैयारी कर ली थी।

एसीबी ने परिवार को भी लिया रडार पर

एसीबी सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के लिए उनके पूरे परिवार पर भी दबाव बनाए हुए थी। उनका परिवार ब्यूरोक्रेसी में मजबूत पकड़ रखता है। उनके परिवार और रिश्तेदारों में 10 से अधिक आईएएस, आईपीएस और आईआरएस अधिकारी शामिल हैं। एसीबी सूत्रों का कहना है कि परिवार के रसूख के कारण भी सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के लिए अधिक मशक्कत करनी पड़ी।

फरारी का पुराना इतिहास

यह पहली बार नहीं है जब राजस्थान में कोई बड़ा अधिकारी इस तरह लंबे समय तक फटार रहा हो। सुबोध अग्रवाल से पहले पूर्व आईपीएस मधुकर टंडन बलात्कार के आरोप के बाद लंबे समय तक फरार रहे। इसी तरह पूर्व आईएएस बीबी मोहंती जयपुर में एक छात्रा से बलात्कार के मामले में लंबे समय तक कानून की पहुंच से बाहर रहे थे।

अपडेट जारी है....

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