रितु बराला से गहलोत बोले- तेरी रगड़ाई हो रही, बिना संघर्ष पद पाने वाले काम नहीं कर सकते; पायलट को भी दी थी नसीहत

Saurabh Mishra | Oct 20, 2026, 13:57 IST
राजस्थान की सियासत में एक बार फिर रगड़ाई (संघर्ष) शब्द चर्चा का विषय बना है।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने NSUI नेता रितु बराला से कहा कि राजनीति में आगे बढ़ने के लिए रगड़ाई जरूरी है। इससे पहले वे सचिन पायलट को लेकर भी ऐसा बयान दे चुके हैं। गहलोत ने यह बात जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पर रितु के समर्थन में चल रहे धरने के दौरान कही।

राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर 'रगड़ाई' शब्द चर्चा में आ गया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस बार यह बात NSUI की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला (Ritu Barala) से कही। गहलोत ने उनसे कहा, 'अब तेरी रगड़ाई हो रही है न, ऊपर जाएगी तब देखना।' इसके बाद उन्होंने राजनीति में संघर्ष करने की सीख भी दी। खास बात यह है कि गहलोत इससे पहले सचिन पायलट के लिए भी 'रगड़ाई' शब्द इस्तेमाल कर चुके हैं। ऐसे में उनके नए बयान की कांग्रेस के सियासी गलियारों में चर्चा शुरू हो गई।



दरअसल, अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सोमवार रात रितु बराला के समर्थन में जयपुर पुलिस कमिश्नर के दफ्तर पहुंचे थे। यहां कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasara) की अगुआई में पार्टी कार्यकर्ता धरना दे रहे थे। इसी दौरान गहलोत ने रितु बराला से हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा, 'अब तेरी रगड़ाई हो रही है न, ऊपर जाएगी तब देखना।'



गहलोत के बयान की हो रही चर्चा

इसके बाद गहलोत ने अपनी बात को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि वे सालों से कहते आ रहे हैं कि राजनीति में बिना संघर्ष किए पद मिल जाए तो व्यक्ति ठीक से काम नहीं कर पाता। गहलोत ने आगे कहा कि आप (रितु) एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस फिर कांग्रेस तक धक्के खाओ, नारे लगाओ, टिकट के लिए धक्के खाओ, तब सफलता मिलेगी तो ठीक से काम कर पाओगे। उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि मेरी भी खूब रगड़ाई हुई है।



गहलोत की इन बातों का सीधा मतलब था कि राजनीति में आगे बढ़ने के लिए जमीन पर काम करना और मुश्किलों का सामना करना जरूरी है।



रितु बराला के लिए क्यों चल रहा है धरना?

बता दें कि बीते 13 अक्टूबर को दिल्ली में एनएसयूआई ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। इसी दौरान रितु बराला और एक महिला पुलिसकर्मी के बीच झड़प हो गई थी। आरोप है कि पुलिस रितु और उनके साथियों को जबरन बस में बैठाकर कनॉट प्लेस थाने ले गई थी। जहां रितु के साथ मारपीट की गई थी।



राहुल गांधी ने रितु के साथ की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस

इस घटना के एक दिन बाद यानी 14 अक्टूबर को रितु बराला ने राहुल गांधी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरी घटना बताई थी। इस दौरान राहुल गांधी ने रितु की ओर इशारा करते हुए कहा था कि ये शेरनी है।



रितु बराला कौन हैं?

रितु बराला झुंझुनूं की रहने वाली हैं। फिलहाल वे जयपुर में रहती हैं। वे राजस्थान यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति में भी सक्रिय रही हैं। इस घटना के विरोध में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पर धरना दे रहे हैं। उनकी मांग है कि महिला पुलिसकर्मी के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की जाए।



जीरो एफआईआर का मतलब है कि किसी भी थाने में शिकायत दर्ज कराई जा सकती। घटना दूसरे शहर या इलाके की हो, तब भी पुलिस एफआईआर दर्ज कर सकती। इसके बाद मामला संबंधित थाने को भेजा जाता है। सोमवार रात अशोक गहलोत भी धरने पर पहुंचे। उन्होंने रितु से बातचीत की और इसी दौरान राजनीति में संघर्ष का जिक्र छेड़ दिया।



गहलोत के बयान की सियासी चर्चा क्यों?

अशोक गहलोत ने रितु बराला से यह बात हल्के-फुल्के अंदाज में कही थी, लेकिन राजस्थान की राजनीति में 'रगड़ाई' शब्द का अपना पुराना किस्सा है। यही वजह है कि उनका बयान सामने आते ही इसे कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति से जोड़कर देखा जाने लगा।



गहलोत का कहना रहा है कि राजनीति में सिर्फ पद मिलना काफी नहीं है। नेता को छात्र राजनीति से लेकर संगठन तक काम करना चाहिए। धरने-प्रदर्शन में शामिल होना चाहिए और लोगों के बीच रहकर संघर्ष करना चाहिए। उनके मुताबिक, इस तरह काम करके आगे बढ़ने वाले नेता अपनी जिम्मेदारी बेहतर ढंग से निभा पाते हैं।



हालांकि, गहलोत की इस सोच पर पहले भी सवाल उठते रहे। विरोधी खेमे के समर्थक तर्क देते रहे हैं कि एक तरफ युवाओं को आगे बढ़ाने की बात होती है, लेकिन जब उन्हें जिम्मेदारी देने का मौका आता है तो संघर्ष की नसीहत दी जाती है।



सचिन पायलट के लिए भी कहा था- इनकी रगड़ाई नहीं हुई

अशोक गहलोत के 'रगड़ाई' शब्द की चर्चा पहली बार नहीं हो रही। इससे पहले वे सचिन पायलट को लेकर भी यह बात कह चुके। जुलाई 2019 में गहलोत ने पायलट के संदर्भ में कहा था, 'इनकी रगड़ाई नहीं हुई है।' उस समय इस बयान पर काफी विवाद हुआ था। पायलट समर्थकों ने भी गहलोत के इस बयान पर नाराजगी जताई थी।



इसके बाद राजस्थान कांग्रेस की राजनीति में 'रगड़ाई' शब्द काफी चर्चित हो गया था। जब भी गहलोत युवा नेताओं को संघर्ष करने की सीख देते हैं, उनकी पुरानी टिप्पणी फिर चर्चा में आ जाती है।



रितु से कही बात ने फिर याद दिलाया पुराना बयान

गहलोत ने इस बार रितु बराला को हल्के-फुल्के अंदाज में राजनीति में संघर्ष करने की सीख दी है, लेकिन उनकी इस टिप्पणी ने सचिन पायलट को लेकर दिए पुराने बयान की याद दिला दी। तब भी गहलोत ने राजनीति में रगड़ाई की बात कही थी। अब रितु से बातचीत में वही शब्द दोहराने पर सियासी चर्चा फिर शुरू हो गई है।

Tags:
  • अशोक गहलोत
  • रितु बराला
  • गोविंद सिंह डोटासरा
  • सचिन पायलट
  • जयपुर पुलिस
  • NSUI प्रदर्शन
  • NSUI
  • Ritu Barala
  • ashok gehlot