गिरफ्तार सुबोध अग्रवाल ने लिया सीनियर आईएएस सुधांश पंत का नाम, बोले-जिन मामलों की जांच हो रही, उनमें 33 मामले इनके
News In Short
- गिरफ्तार सुबोध अग्रवाल ने वरिष्ठ आईएएस सुधांश पंत का लिया नाम।
- बोल, 600 करोड़ रुपये के 33 मामले पंत के एसीएस कार्यकाल के।
- सुबोध ने मीडिया से कहा कि मेरे कार्यकाल के सिर्फ चार ही मामले।
- सुबोध अग्रवाल को जल जीवन मिशन घोटाले में किया है गिरफ्तार।
- तीन दिन की रिमांड अवधि खत्म होने पर पेश किया अदालत में।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में चर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में गिरफ्तार रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल ने सोमवार को ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी। रिमांड अवधि समाप्त होने पर कोर्ट में पेश होने से पहले सुबोध अग्रवाल ने मीडिया के सामने वरिष्ठ IAS सुधांश पंत का नाम लेकर मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।
दो दिन का फिर रिमांड मिला
तीन दिन की रिमांड अवधि समाप्त होने पर जब एसीबी की टीम ने उन्हें जयपुर की एसीबी कोर्ट-एक में पेश किया तो अग्रवाल ने सीधे तौर पर पूर्व मुख्य सचिव सुधांश पंत का नाम लेते हुए जांच की दिशा पर सवाल उठाए। हालांकि एसीबी ने उनकी तीन दिन की और रिमांड मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने केवल दो दिन की रिमांड पर भेजने के आदेश दिए हैं।
मेरे खिलाफ केवल 4 मामले, 33 मामले सुधांश पंत के कार्यकाल के
अदालत परिसर के बाहर मीडिया से बातचीत में रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल ने कहा कि एसीबी की जांच में उन्होंने पूरा सहयोग किया है। एसीबी के सभी 125 से अधिक सवालों के जवाब दिए हैं। उन्होंने दावा किया, फाइनेंस कमेटी के जिन 37 प्रकरणों की बात हो रही है, उनमें से मेरे कार्यकाल के केवल 4 हैं। बाकी के 33 प्रकरण वरिष्ठ आईएएस सुधांश पंत के समय के हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन 33 प्रकरणों से जुड़ी कुल राशि लगभग 600 करोड़ रुपये है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जिसमें पैसा देकर गबन हुआ है, वहां जांच नहीं हो रही, बल्कि उन फाइलों को खंगाला जा रहा है जिनमें भुगतान तक नहीं हुआ।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि एसीबी ने सुबोध अग्रवाल को 960 करोड़ रुपये के कथित राजस्थान जल जीवन मिशन घोटालामें गिरफ्तार किया है। आरोप है कि जब वे पीएचईडी में अतिरिक्त मुख्य सचिव थे तो उन्होंने जेजेएम योजना के तहत दो कंपनियों श्री गणपति ट्यूबवेल और श्री श्याम ट्यूबवेल के खिलाफ शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया। इसके चलते ये दोनों फर्में ठेके हासिल करती रहीं। ये दोनों कंपनियां इरकॉन इंटरनेशनल कंपनी के जाली सर्टिफिकेट का इस्तेमाल करके करीब 960 करोड़ रुपये के ठेके हासिल करने का आरोपी है।
हालांकि, पिछली सुनवाई में पूर्व एसीएस सुबोध ने अदालत में दलील दी थी कि उनके कार्यकाल में केवल चार टेंडर अंतिम रूप दिए गए थे, जिनमें कोई वित्तीय अनियमितता सामने नहीं आई। उन्होंने यह भी दावा किया था कि एक टेंडर में कुछ मुद्दे थे, जिसे उन्होंने रोक दिया था। इस संबंध में एफआईआर दर्ज कराने का आदेश भी दिया था।
बचाव पक्ष का तर्क है कि सुबोध के कार्यकाल में 10 प्रतिशत से भी कम मूल्य के टेंडर मंजूर हुए, जबकि 95% से अधिक वर्क ऑर्डर तत्कालीन एसीएस सुधांश पंत की अध्यक्षता वाली वित्त समिति द्वारा स्वीकृत किए गए थे।
सुबोध अग्रवाल के 'चुप्पी' के सवाल
एसीबी ने अग्रवाल को 9 अप्रैल को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से ही एसीबी उनसे मैराथन पूछताछ कर रही है। एसीबी ने पूछताछ के लिए 125 सवालों की एक लंबी सूची तैयार की। इसके आधार पर तीन दिनों तक उनसे पूछताछ की गई।
पूछताछ के दौरान एसीबी ने तीन बार अग्रवाल से पूर्व मंत्री महेश जोशी के साथ उनके संबंधों को लेकर सवाल किया, लेकिन हर बार उन्होंने चुप्पी साधे रखी। जांच एजेंसी ने ई-टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों, फर्जी टेंडर, गलत सर्टिफिकेट और प्राइस वेरिफिकेशन में अनियमितताओं को लेकर भी उनसे विस्तार से पूछताछ की।
अभी और मामले भी जांच दायरे में
सूत्रों के अनुसार, एसीबी फिलहाल इस घोटाले से जुड़े एक मुख्य मुकदमे और एक ट्रैप मामले की गहराई से जांच कर रही है। मामला यहीं खत्म नहीं होता है, जयपुर में दो अन्य बड़े मामले एसीबी में लंबित हैं, तो वहीं डूंगरपुर में भी जल जीवन मिशन से जुड़ा एक मामला जांच के घेरे में है। सूत्रों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी और दस्तावेजों की कड़ियां जुड़ेंगी, राजस्थान के प्रशासनिक इतिहास के कुछ और 'काले पन्ने' बाहर आ सकते हैं।
हाईकोर्ट में भी लिया पंत का नाम
सुबोध अग्रवाल ने राजस्थान हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सुधांश पंत के कार्यकाल के टेंडरों की जांच की मांग कर रखी है। उनके अनुसार जब वे पद पर थे तब उन्होंने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र की शिकायतों पर जांच के आदेश दिए थे और विभागीय अधिकारियों द्वारा हरी झंडी मिलने के बाद ही टेंडरों को मंजूरी दी थी। जैसे ही इरकॉन की ओर से शिकायत मिली, उन्होंने तुरंत भुगतान रुकवाते हुए संबंधित एक्सईएन विशाल सक्सेना को निलंबित किया और एफआईआर दर्ज करवाई थी। अग्रवाल का कहना है कि एसीबी जानबूझकर उन तथ्यों की अनदेखी कर रही है जो अन्य अधिकारियों की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं
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