भजनलाल पर डोटासरा का वार, बोले- जिनके नाम एक बीघा खेती भी नहीं, वो किस आधार पर किसानों का उड़ा रहे मजाक
News In Short
- डोटासरा ने मुख्यमंत्री के पास कृषि भूमि नहीं होने को आधार बनाकर उन्हें घेरा।
- 25-30 दिन काम वाले बयान को अन्नदाताओं का अपमान और संवेदनहीन बताया।
- नेता प्रतिपक्ष जूली ने भी खेती को पूरे परिवार की साल भर की कड़ी मेहनत कहा।
- कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री से किसानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने पर माफी मांगी।
News In Detail
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उस बयान पर तीखा पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने किसानों के खेती का काम महज 25-30 दिन का बताया था। मुख्यमंत्री के चुनावी हलफनामे को हथियार बनाकर डोटासरा ने पूछा है कि जिस शख्स के पास खुद के नाम पर एक बीघा जमीन तक नहीं है, वो आखिर किस आधार पर खुद को किसान बताकर अन्नदाताओं के संघर्ष का मजाक उड़ा रहे हैं?
इस बयान के बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सुर में सुर मिलाते हुए मुख्यमंत्री को याद दिलाया है कि खेती केवल बुवाई और कटाई नहीं, बल्कि हाड़ कंपाने वाली सर्दी में रात भर जागकर खून-पसीना एक करने वाली तपस्या है।
कहां के किसान हो आप?
डोटासरा ने सीएम के चुनावी एफिडेविट को सार्वजनिक करते हुए कहा कि इसमें आपके नाम पर कृषि भूमि के रूप में मात्र 350 वर्ग मीटर का एक प्लॉट दर्ज है। यह जमीन एक बीघा भी नहीं होती, ऐसे में आपका खुद को किसान कहना समझ से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पद पर बैठकर इस तरह का बयान देना प्रदेश के लाखों किसानों का अपमान है।
एसी कमरों से मत लगाओ खेती-किसानी का हिसाब
डोटासरा ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को वातानुकूलित कमरों में बैठकर खेती का गणित समझाना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीन की हकीकत और दफ्तरों के आंकड़ों में जमीन-आसमान का फर्क होता है, जिसे मुख्यमंत्री शायद भूल चुके हैं।
अन्नदाता का अनादर है यह
डोटासरा ने जोर देकर कहा कि किसान की साल भर की मेहनत को महज 25-30 दिप में समेट देना न केवल हास्यास्पद है, बल्कि यह अन्नदाता के प्रति उनकी संवेदनहीनता को भी उजागर करता है। मुख्यमंत्री का यह नजरिया बताता है कि उन्हें धरातल पर होने वाली कृषि गतिविधियों की कोई समझ नहीं है।
साल भर मौसम की मार झेलता है किसान
डोटासरा ने कहा कि किसान हर मौसम में खेत में पसीना बहाता है। उसके कड़े संघर्ष और जज्बात को चंद दिनों से तौलना शर्मनाक है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री को अपने इस अहंकार भरे बयान के लिए तुरंत किसानों से माफी मांगनी चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने भी किया विरोध
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री खुद को किसान का बेटा कहते हैं, तो उन्हें पता होना चाहिए कि खेत तैयार करने में कितनी मेहनत लगती है। जूली ने कहा कि केवल बीज डालना और फसल काटना ही खेती नहीं है, बल्कि कड़ाके की ठंड में रात-रात भर सिंचाई के लिए जागना असली किसानी है।
एक दिन में नहीं होता कटाई का काम
जूली ने मुख्यमंत्री के ज्ञान पर सवाल उठाते हुए कहा कि फसल की जुताई, बुवाई, निराई-गुड़ाई, सिंचाई और कटाई एक लंबी प्रक्रिया है। उन्होंने हालिया ओलावृष्टि का जिक्र करते हुए कहा कि किसान की कटी हुई फसल खेतों में बर्बाद हो रही है, लेकिन सरकार को यह दर्द नजर नहीं आ रहा।
पूरा परिवार करता है काम
टीकाराम जूली ने कहा कि किसानी एक पारिवारिक यज्ञ है, जिसमें छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हाथ बंटाते हैं। किसान फसल की रखवाली के लिए खेतों में सोता है। मुख्यमंत्री का बयान इन सभी के त्याग का निरादर है।
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