10 साल पुरानी सरकारी गाड़ियां दौड़ रहीं बेफिक्र, जनता की गाड़ियों पर चालान।
समझें क्या है पूरा मामला
- भरतपुर में पुराने वाहनों पर नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया।
- जिले में 35,887 ओवरएज वाहन अभी भी दर्ज हैं।
- सरकारी विभागों के 290 डीजल वाहन 10 साल से ज्यादा पुराने हैं।
- छह महीने में 83 चालान से 3.85 लाख रुपए जुर्माना वसूला गया।
- पुराने वाहनों पर कार्रवाई करने वाला तंत्र खुद नियमों में फंसा।
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी (NGT – National Green Tribunal) ने सख्त नियम बना रखे हैं। इसके तहत 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल और 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहनों के संचालन पर रोक है।
इन वाहनों को सार्वजनिक स्थानों पर खड़ा करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। लेकिन भरतपुर में इन्हीं नियमों की सबसे बड़ी अनदेखी खुद सरकारी तंत्र कर रहा है।
6 महीने में 83 चालान, साढ़े तीन लाख जुर्माना
पिछले छह महीनों में जिले में 83 चालान काटे जा चुके हैं। इन पर कुल 3.85 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा इस दौरान 666 वाहनों को एनओसी (NOC – No Objection Certificate) भी जारी की गई।
सरकारी विभागों के ही सैकड़ों वाहन पुराने
पड़ताल में सामने आया है कि जिले के सरकारी विभागों के 290 डीजल वाहन 10 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। इसके अलावा 236 सरकारी वाहन ऐसे हैं जिनके पास वैध फिटनेस प्रमाण पत्र तक नहीं है।
सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि जिन विभागों पर नियम लागू कराने की जिम्मेदारी है, उन्हीं के वाहन नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
जिले में दर्ज हैं 35 हजार से ज्यादा पुराने वाहन
परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक भरतपुर जिले में अब भी 35,887 ओवरएज वाहन दर्ज हैं। इनमें ट्रैक्टर, बस, कार, मालवाहन और 18 हजार से ज्यादा मोटरसाइकिलें शामिल हैं।
भरतपुर एनसीआर (NCR) क्षेत्र का हिस्सा है, इसलिए यहां एनजीटी के आदेश पूरी तरह लागू होते हैं। इसके बावजूद जिले में इतनी बड़ी संख्या में पुराने वाहन खड़े और संचालित हो रहे हैं। इनमें 17,206 डीजल वाहन और 18,681 पेट्रोल वाहन शामिल हैं।
आम जनता पर कार्रवाई, सरकारी वाहन बेफिक्र
परिवहन विभाग निजी वाहनों की फिटनेस, प्रदूषण और दस्तावेजों की नियमित जांच करता है। इसमें कमी मिलने पर सख्त कार्रवाई भी की जाती है।
लेकिन सरकारी वाहनों के मामले में पिछले कई सालों से कोई प्रभावी अभियान नहीं चलाया गया है। हैरानी की बात यह है कि कुछ सरकारी विभागों के पास तो 19 साल तक पुराने वाहन भी मौजूद हैं।
15 साल से ज्यादा पुराने वाहनों का आंकड़ा
आंकड़ों के मुताबिक जिले में 18,681 पेट्रोल वाहन 15 साल से ज्यादा पुराने हो चुके हैं। इनमें से 18,133 मोटरसाइकिलें कंडम हो चुकी हैं।
इसके अलावा 476 कारें भी तय समय सीमा पार कर चुकी हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 8 एम्बुलेंस भी ओवरएज श्रेणी में शामिल हैं। इनके अलावा 64 अन्य तरह के वाहन भी पुराने हो चुके हैं।
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