भाषा की दिक्कत नार्को टेस्ट में बाधा नहीं, निचली कोर्ट का आदेश रद्द
News In Short
- हाईकोर्ट ने कहा - भाषा न आने के आधार पर नार्को टेस्ट से मना करना उचित नहीं।
- जरूरत पड़ने पर नार्को टेस्ट के दौरान दुभाषिये की सेवाएं ली जा सकती हैं।
- कोर्ट ने आईओ द्वारा केवल भाषा का हवाला देकर नार्को टेस्ट न करवाने को गलत ठहराया।
- हाईकोर्ट ने निचली कोर्ट के उस आदेश को रद्द किया जिसमें पुलिस की एफआर को मंजूरी दी गई थी।
- अदालत ने मामले की जांच डिप्टी स्तर के अधिकारी से कराने के निर्देश दिए हैं।
News In Detail
राजस्थान हाई कोर्ट ने हत्या से जुड़े एक आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि नार्को टेस्ट से इस आधार पर मना नहीं किया जा सकता कि विशेषज्ञ गवाह की भाषा नहीं जानता या गवाह को हिंदी भाषा नहीं आती।
जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने यह आदेश फेलीराम की आपराधिक याचिका पर दिया। कोर्ट ने इस मामले में पुलिस की एफआर (फाइनल रिपोर्ट) को मंजूर करने वाले निचली कोर्ट के आदेश को भी रद्द कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
मामले से जुड़े अधिवक्ता ने बताया कि प्रार्थी ने अपने भाई की हत्या होने पर 2015 में दौसा के रामगढ़ पचवारा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। जांच अधिकारी ने लचर जांच कर एफआर (फाइनल रिपोर्ट) पेश कर दी। निचली कोर्ट ने 23 सितंबर 2022 को उसे स्वीकार कर प्रार्थी की प्रोटेस्ट पिटिशन (विरोध याचिका) खारिज कर दी।
इसी आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि जांच अधिकारी ने प्रार्थी का नार्को टेस्ट करने के लिए प्रार्थना पत्र तो दिया था, लेकिन बाद में उस पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई।
हाई कोर्ट ने क्यों रद्द किया निचली कोर्ट का आदेश?
हाई कोर्ट ने निचली कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि मामले की जांच डिप्टी स्तर के अधिकारी से कराई जाए और वह जरूरत होने पर नार्को टेस्ट सहित जांच करते हुए अपनी रिपोर्ट निचली कोर्ट में पेश करे।
कोर्ट ने अचरज जताते हुए कहा कि प्राधिकारी ने इस आधार पर नार्को टेस्ट से मना कर दिया कि संबंधित व्यक्ति को हिंदी भाषा धाराप्रवाह नहीं आती है।
नार्को टेस्ट के लिए दुभाषिया की सुविधा
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि नार्को टेस्ट के लिए फोरेंसिक साइकोलॉजिस्ट, एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, सामान्य चिकित्सक और मनोचिकित्सक के साथ जरूरत होने पर दुभाषिए को भी शामिल किया जा सकता है।
कोर्ट ने साफ किया कि केवल भाषा की जानकारी न होने पर नार्को टेस्ट से मना नहीं किया जा सकता। अगर किसी व्यक्ति को हिंदी नहीं आती तो उसकी मातृभाषा या कोई अन्य भाषा के माध्यम से भी यह टेस्ट करवाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर दुभाषिए की मदद ली जा सकती है।
विशेषज्ञ की राय
विशेषज्ञों के अनुसार हाल के सालों में जटिल आपराधिक मामलों की गुत्थी सुलझाने के लिए जांच एजेंसियों ने नार्को टेस्ट पर जोर दिया है। नार्को टेस्ट से जांच एजेंसी का काम आसान हो जाता है और वे अभियुक्त तक पहुंच सकती हैं।
हालांकि नार्को टेस्ट के लिए व्यक्ति की सहमति जरूरी होती है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि जबरन नार्को टेस्ट करवाना व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
इस केस में क्या गलत हुआ?
मौजूदा मामले में जांच अधिकारी ने सहमति होने के बावजूद केवल भाषा और विशेषज्ञ न होने के चलते गवाह का नार्को टेस्ट नहीं करवाया। हाईकोर्ट ने इसे गलत ठहराया। कोर्ट ने कहा कि भाषा की बाधा को दुभाषिया के माध्यम से दूर किया जा सकता है। इसलिए इस आधार पर नार्को टेस्ट से इनकार करना उचित नहीं है।
अब क्या होगा?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब मामले की जांच डिप्टी स्तर के अधिकारी से कराई जाएगी। नया जांच अधिकारी जरूरत पड़ने पर नार्को टेस्ट सहित पूरी जांच करेगा और फिर अपनी रिपोर्ट निचली कोर्ट में पेश करेगा। इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि केवल भाषा की बाधा के चलते किसी भी जांच प्रक्रिया को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
FAQ
- राजस्थान हाई कोर्ट ने किस आधार पर नार्को टेस्ट को रोकने वाले प्रशासनिक निर्णय को पूरी तरह गलत ठहराया है?
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एक्सपर्ट को गवाह की भाषा न आने या गवाह को हिंदी धाराप्रवाह न आने के आधार पर नार्को टेस्ट से विधिक रूप से मना नहीं किया जा सकता। - सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार नार्को टेस्ट के दौरान भाषाई बाधा को दूर करने के लिए किसे शामिल किया जा सकता है?
न्यायालय के अनुसार, नार्को टेस्ट के मेडिकल पैनल में आवश्यकता पड़ने पर एक दुभाषिया (Interpreter) शामिल किया जा सकता है।
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FAQ
- राजस्थान हाई कोर्ट ने किस आधार पर नार्को टेस्ट को रोकने वाले प्रशासनिक निर्णय को पूरी तरह गलत ठहराया है?
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एक्सपर्ट को गवाह की भाषा न आने या गवाह को हिंदी धाराप्रवाह न आने के आधार पर नार्को टेस्ट से विधिक रूप से मना नहीं किया जा सकता। - सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार नार्को टेस्ट के दौरान भाषाई बाधा को दूर करने के लिए किसे शामिल किया जा सकता है?
न्यायालय के अनुसार, नार्को टेस्ट के मेडिकल पैनल में आवश्यकता पड़ने पर एक दुभाषिया (Interpreter) शामिल किया जा सकता है। - नार्को टेस्ट क्या है?
नार्को टेस्ट (Narco Test) एक फोरेंसिक और जांच प्रक्रिया है जिसका उपयोग पुलिस और जांच एजेंसियां किसी अपराधी या संदिग्ध से सच्चाई उगलवाने के लिए करती हैं। इस टेस्ट में संदिग्ध व्यक्ति को सोडियम पेंटोथल (Sodium Pentothal), सोडियम एमाइटल' (Sodium Amytal) या स्कोपोलामाइन (Scopolamine) जैसी दवाएं दी जाती हैं।
FAQ
- राजस्थान हाई कोर्ट ने किस आधार पर नार्को टेस्ट को रोकने वाले प्रशासनिक निर्णय को पूरी तरह गलत ठहराया है?
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एक्सपर्ट को गवाह की भाषा न आने या गवाह को हिंदी धाराप्रवाह न आने के आधार पर नार्को टेस्ट से विधिक रूप से मना नहीं किया जा सकता। - सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार नार्को टेस्ट के दौरान भाषाई बाधा को दूर करने के लिए किसे शामिल किया जा सकता है?
न्यायालय के अनुसार, नार्को टेस्ट के मेडिकल पैनल में आवश्यकता पड़ने पर एक दुभाषिया (Interpreter) शामिल किया जा सकता है। - नार्को टेस्ट क्या है?
नार्को टेस्ट (Narco Test) एक फोरेंसिक और जांच प्रक्रिया है जिसका उपयोग पुलिस और जांच एजेंसियां किसी अपराधी या संदिग्ध से सच्चाई उगलवाने के लिए करती हैं। इस टेस्ट में संदिग्ध व्यक्ति को सोडियम पेंटोथल (Sodium Pentothal), सोडियम एमाइटल (Sodium Amytal) या स्कोपोलामाइन (Scopolamine) जैसी दवाएं दी जाती हैं।