पंचायत-निकाय चुनाव टालने पर हाई कोर्ट सख्त, चुनाव आयुक्त को किया तलब

Mukesh Sharma | Jul 15, 2026, 17:33 IST
पंचायत-निकाय चुनाव
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव समय पर नहीं कराने पर हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने ओबीसी रिपोर्ट के इंतजार में चुनाव टालने की सरकार की अर्जी पर फटकार लगाई। साथ ही उन्होंने राज्य चुनाव आयुक्त को स्पष्टीकरण के लिए तलब किया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव टालने पर हाई कोर्ट सख्त दिखा।
  • चुनाव कराने में अक्षम हैं तो हटाकर किसी और को नियुक्त कर दें।
  • चुनाव आयुक्त और OBC आयोग के सदस्य सचिव व्यक्तिगत रूप से तलब।
  • ओबीसी आयोग रिपोर्ट के बिना आरक्षण वर्गीकरण मुमकिन नहीं, आखिरी मौका मिले।
  • याचिकाकर्ता बोले, समय पर चुनाव करवाना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी।

राजस्थान हाई कोर्ट ने निर्धारित समय सीमा में पंचायत और निकाय चुनाव नहीं करवाने पर बुधवार को नाराजगी जाहिर की। एक्टिंग चीफ जस्टिस एसपी शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित ने सरकार के चुनाव टालने की अर्जी पर यह नाराजगी व्यक्त की।



कोर्ट ने कहा कि कहा कि यदि राज्य चुनाव आयोग चुनाव नहीं करवा सकता तो हाई कोर्ट से किसी को चुनाव कराने के लिए अपॉइंट कर देते हैं।



कोर्ट ने सरकार को कहा है कि उन्हें सख्त आदेश देने को मजबूर नहीं किया जाए। कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग और ओबीसी आयोग की कार्यशैली को लेकर मौखिक टिप्पणी की। उसने कहा कि यदि इसके सदस्य सक्षम नहीं है तो उन्हें हटाकर सक्षम व्यक्ति को काम दीजिए।



कोर्ट ने अदालती आदेश की पालना नहीं करने पर गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह और ओबीसी आयोग के सदस्य सचिव को बुधवार को दोपहर दो बजे तलब किया है।



सरकार ने कहा-आखिरी मौका दीजिए

सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि चुनाव में ओबीसी का प्रतिनिधित्व जरूरी है। हम कोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं कर रहे हैं। लेकिन ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं आने से आरक्षण का वर्गीकरण नहीं हो पाया है।



राज्य ओबीसी आयोग की मांग पर उनका समय कई बार बढ़ाया जा चुका है। इस बार आयोग ने कहा है कि वह 14 अगस्त तक रिपोर्ट दे देगा। चुनाव टालते हुए सरकार को आखिरी मौका दिया जाए।



इस पर कोर्ट ने कहा कि क्यों बार-बार समय बढ़ा रहे हो। यदि आयोग काम करने मे सक्षम नहीं है तो उसे हटाओ।



चुनाव कराने की जिम्मेदारी आयोग की

याचिकाकर्ता गिर्राज सिंह देवंदा की ओर से एडवोकेट प्रेमचंद देवंदा ने कहा कि सरकार का यह प्रार्थना पत्र मेंटिनेबल ही नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 243 (क) में चुनाव कराने की जिम्मेदारी राज्य चुनाव आयोग की है।



कोर्ट आदेश की पालना करवाने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की थी। लेकिन वह उसमें पूरी तरह से विफल रहा है। इस पर कोर्ट ने राज्य चुनाव आयुक्त को व्यक्तिगत रुप से तलब करके स्पष्टीकरण मांगा हैं।



याचिकाकर्ता रहे पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की ओर से कहा गया कि कोर्ट 22 मई को ही कह चुका है कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं आती है तो उसका इंतजार किए बिना ही 31 जुलाई तक चुनाव करवाने हैं।



31 जुलाई तक चुनाव कराने के आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर,2025 को आयोग और सरकार को 15 अप्रेल तक निकाय-पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए थे।



इसके बाद कोर्ट ने 22 मई को 31 जुलाई तक चुनाव करवाने के आदेश दिए थे। लेकिन,आयोग ने अभी तक चुनाव कार्यक्रम भी घोषित नहीं किया है।



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