6 महीने में 31 प्रसूता मौतों के बाद जागी सरकार, तैनात हुए 87 हजार हेल्थ वर्कर

Jageshwar prasad | Jul 26, 2026, 09:40 IST
हाई रिस्क में 7788 गर्भवतियां, सरकार ने मैदान में उतारी हेल्थ टीमें
राजस्थान में 6 महीने में 31 प्रसूताओं की मौत के बाद सरकार ने 7,788 हाई रिस्क प्रसूताओं की पहचान की। जान बचाने 87 हजार हेल्थ वर्कर तैनात किए गए।

समझें क्या है पूरा मामला

  • 6 महीने में 31 प्रसूताओं की मौत के बाद हरकत में आई सरकार।
  • प्रसूता मौतों पर आया एक्शन प्लान, 87 हजार स्वास्थ्य कर्मी तैनात।
  • सर्वे के अनुसार राजस्थान में 7788 गर्भवतियां हाई रिस्क पर।
  • सीकर में सर्वाधिक 306 हाई रिस्क प्रसूताएं मिलीं, अलर्ट जारी।
  • एनीमिया बना प्रसूता मौतों की सबसे बड़ी वजह, 16 जिले रेड जोन में।

राजस्थान में पिछले छह महीने में 31 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। इसके बाद राज्य सरकार ने बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। अब हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान के लिए 87 हजार हेल्थ वर्कर मैदान में उतारे गए हैं।



सर्वे में कुल 7,788 प्रसूताएं ऐसी मिली हैं, जिन्हें हाई रिस्क श्रेणी में रखा गया है। कोटा, बांसवाड़ा और बीकानेर समेत कई जिलों में लगातार हुई मौतों के बाद यह सर्वे कराया गया।



किन जिलों में हुई सबसे ज्यादा मौतें?

आंकड़ों के अनुसार बांसवाड़ा में सबसे ज्यादा 6 प्रसूताओं की मौत हुई है। भीलवाड़ा और कोटा में 5-5, बीकानेर में 4, जोधपुर और सीकर में 3-3 मौतें दर्ज हुई हैं। डीडवाना में 2, जबकि चित्तौड़गढ़ और जयपुर में 1-1 प्रसूता की मौत हुई है।



इन मौतों में करीब 25 प्रसूताओं की तीसरी, चौथी या पांचवीं डिलीवरी थी। इन महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य 12 से 14 ग्राम से घटकर 1 से 3 ग्राम के बीच रह गया था। यह आंकड़ा हालात की गंभीरता को साफ दिखाता है।



हाई रिस्क महिलाओं की पहचान कैसे हो रही है?

आशा, एएनएम (Auxiliary Nurse Midwife) और सीएचओ (Community Health Officer) प्रदेश के 41 जिलों में गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं की गणना कर रही हैं। जिन महिलाओं की तीसरी, चौथी या उससे अधिक बार डिलीवरी होने वाली है, उन्हें विशेष रूप से चिह्नित किया जा रहा है।



रिपोर्ट के अनुसार आने वाले नौ महीनों में सरकारी अस्पतालों में कुल 65,214 गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी होनी है। इनमें से 7,788 महिलाएं ऐसी हैं, जिनकी यह तीसरी, चौथी या पांचवीं संतान होगी। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इन्हें समय रहते बचा लिया गया तो एक भी मौत नहीं होगी।



1000 डॉक्टरों की राय के बाद बनी रणनीति

मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव, सचिव और निदेशकों ने करीब 1,000 विशेषज्ञ डॉक्टरों से सवाल पूछा था। सवाल यह था कि अगर इलाज का प्रोटोकॉल सही अपनाया गया, तो मौतें कैसे हुईं। इसी चर्चा के आधार पर आगे की रणनीति तैयार की गई।



एम्स (All India Institute of Medical Sciences) और अन्य विशेषज्ञों के अध्ययन में सामने आया कि मरने वाली ज्यादातर प्रसूताएं भर्ती के समय तीसरी, चौथी या छठी-सातवीं डिलीवरी की स्थिति में थीं। इनमें से अधिकांश गंभीर एनीमिया से पीड़ित थीं और उनका हीमोग्लोबिन स्तर सामान्य से बेहद कम था।



87 हजार हेल्थ वर्कर मैदान में

इस अभियान के लिए राज्यभर में कुल 86,835 टीमें गठित की गई हैं। इनमें 10,049 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, 22,355 एएनएम और 54,431 आशा वर्कर शामिल हैं। यह सभी टीमें गांव और वार्ड स्तर पर हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की तलाश में जुटी हैं।



सीकर सबसे ज्यादा प्रभावित जिला

प्रदेश के 41 जिलों में से 16 जिलों को रेड जोन में रखा गया है, जहां हाई रिस्क महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है। इनमें सबसे ज्यादा 306 हाई रिस्क प्रसूताएं सीकर जिले में मिली हैं।



अजमेर, अलवर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, बीकानेर, चूरू, जयपुर प्रथम व द्वितीय, झुंझुनूं, जोधपुर प्रथम, करौली, कोटा, नागौर, पाली और उदयपुर प्रथम में भी 206 से 291 तक हाई रिस्क महिलाएं चिह्नित हुई हैं।



सबसे कम 71 हाई रिस्क महिलाएं फलोदी जिले में मिली हैं। हालांकि प्रदेश का कोई भी जिला ऐसा नहीं है, जहां हाई रिस्क गर्भवती महिला न मिली हो। आने वाले महीनों में सबसे ज्यादा प्रसव जयपुर और जालौर जिलों में होने की संभावना है।



मंत्री ने क्या कहा?

चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि प्रसूता मौतें रोकने के लिए हाई रिस्क गर्भवतियों पर खास फोकस किया जा रहा है। उनके अनुसार पूर्व में हुई ज्यादातर मौतें उन महिलाओं की थीं, जो दो से अधिक बार प्रसव के लिए भर्ती हुई थीं। कई महिलाएं पांचवीं, छठी या सातवीं संतान को जन्म देने वाली थीं।



श्रीगंगानगर में एक और मौत का मामला

श्रीगंगानगर में एक गर्भवती महिला की प्रसव से पहले ही किडनी फेल होने से मौत हो गई। समय पर इलाज न मिलने से गर्भस्थ शिशु की भी जान चली गई। नेहरा नगर निवासी पूजा को जिला अस्पताल गंभीर हालत में लाया गया था, जहां से उसे बीकानेर रेफर किया गया।



परिजनों के अनुसार पूजा को पहले एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में उसके प्लेटलेट्स सिर्फ 77 हजार पाए गए थे। इसके बाद अस्पताल ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां खून चढ़ाने के बाद उसकी तबीयत और बिगड़ गई और उसकी जान चली गई।



FAQ

  1. राजस्थान में 6 महीने में कितनी प्रसूताओं की मौत हुई है?
    प्रदेश में 6 महीने में कुल 31 प्रसूताओं की मौत हुई है। सबसे ज्यादा 6 मौतें बांसवाड़ा में दर्ज हुईं। इसके बाद भीलवाड़ा और कोटा में 5-5 मौतें हुई हैं।
  2. राजस्थान में हाई रिस्क प्रसूताओं की पहचान कैसे हो रही है?
    आशा, एएनएम और सीएचओ मिलकर गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं की गणना कर रही हैं। जिन महिलाओं की तीसरी या उससे अधिक बार डिलीवरी होने वाली है, उन्हें हाई रिस्क माना जा रहा है। कुल 7,788 महिलाएं इस श्रेणी में मिली हैं।
  3. प्रसूता मौतों की सबसे बड़ी वजह क्या सामने आई है?
    विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादातर मृतक महिलाएं गंभीर एनीमिया से पीड़ित थीं। उनका हीमोग्लोबिन स्तर सामान्य से घटकर सिर्फ 1 से 3 ग्राम रह गया था। बार-बार प्रसव भी एक बड़ा जोखिम कारक पाया गया है।

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