गंगवार बने देश के नए उच्च शिक्षा सचिव, क्यों खीरा सब्सिडी को लेकर रहे चर्चा में
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान कैडर के आईएएस नरेशपाल गंगवार को केंद्र में मिली नई जिम्मेदारी।
- पशुपालन मंत्रालय में सचिव गंगवार का ट्रांसफर उच्च शिक्षा मंत्रालय में किया गया।
- नई जिम्मेदारी ऐसे वक्त दी गई, जब परिवार को मिली सब्सिडी से गंगवार विवादों में हैं।
- गंगवार की पत्नी, बेटा और मां को 5 साल में 1.16 करोड़ की सरकारी सब्सिडी मिली।
- गंगवार की सफाई, मां (बिंदुमती) और बेटे (कुमार ऋत्विक) उन पर आश्रित नहीं।
राजस्थान कैडर के सीनियर आईएएस नरेशपाल गंगवार को अब केंद्र सरकार में उच्च शिक्षा सचिव बनाया गया है। उनकी नियुक्ति विनीत जोशी के स्थान पर की गई है। जोशी को पंचायती राज मंत्रालय में भेजा गया है।
1994 बैच के आईएएस गंगवार अभी केंद्र सरकार में डेपुटेशन पर हैं। वे वर्तमान में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में सचिव के रूप में कार्यरत थे।
गंगवार की यह नियुक्ति ऐसे समय की गई है, जब वे खीरे की खेती के लिए परिवार को मिली सरकारी सब्सिडी को लेकर विवादों में हैं। इस योजना में उनकी पत्नी, बेटा और मां को पांच साल में कुल 1.16 करोड़ रुपए की सब्सिडी मिली।
क्या है सब्सिडी का मामला?
यह सब्सिडी उत्पादन और कटाई के बाद प्रबंधन के माध्यम से वाणिज्यिक बागवानी का विकास योजना में दी गई। इसे केंद्रीय कृषि मंत्रालय का राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) संचालित करता है।
रोचक बात यह है कि गंगवार के सालाना संपत्ति विवरण (2021-22) में इस योजना के तहत केवल एक ही प्रोजेक्ट की जानकारी दी गई।
मां के नाम मिली 46.03 लाख की सब्सिडी
गंगवार की मां बिंदुमती को यह सब्सिडी जोबनेर तहसील के भैंसपुरा गांव में उनकी खीरे की खेती के लिए मिली। जनवरी 2025 में उनके बैंक खाते में 46.03 लाख की सब्सिडी जमा हुई।
बिंदुमती ने 8,880 वर्ग मीटर एरिया में खीरे की पैदावार की। इस प्रोजेक्ट की लागत 99.38 लाख दिखाई गई।
उन्हें जब यह सब्सिडी मिली, तब आईएएस गंगवार केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर तैनात थे।
बेटे ने भी उठाई 46.49 लाख की सब्सिडी
गंगवार के बेटे कुमार ऋत्विक को भी बागवानी योजना में सब्सिडी का फायदा मिला। उन्हें यह
सब्सिडी जोबनेर के ढाणी बोराज गांव में खीरे की खेती के लिए मिली।
मार्च 2023 में ऋत्विक के बैंक खाते में 46.49 लाख रुपए की सब्सिडी जमा हुई। उन्होंने कुल 8,736 वर्ग मीटर एरिया में खीरे की खेती की।
इस प्रोजेक्ट पर लागत 97.94 लाख रुपए आई। मजेदार बात यह थी कि गंगवार तब केंद्र में पर्यावरण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव थे।
सब्सिडी में पत्नी भी पीछे नहीं
मां और बेटे के साथ ही गंगवार की पत्नी डॉ. रंजीता सिंह ने सरकारी सब्सिडी ली। उनके नाम पर ढाणी बोराज गांव में खेत है।
वर्ष 2021-22 में उनके बैंक खाते में 24.36 लाख की सब्सिडी मिली। यह सब्सिडी खीरे की खेती के लिए प्राप्त् हुई।
रंजीता ने अपने खेत में 4,048 वर्ग मीटर एरिया में खीरे की खेती की। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत
49.31 लाख दिखाई गई। यह सब्सिडी मिली, जब गंगवार राजस्थान में कृषि उत्पादन आयुक्त के रूप में नियुक्त थे।
गंगवार ने संपत्ति विवरण में यह बताया
आईएएस गंगवार ने एक जनवरी 2026 में वित्तीय वर्ष 2024-2025 के लिए अपना संपत्ति विवरण सरकार को पेश किया।
इसमें उन्होंने अपनी पत्नी, मां, बेटे और बेटी के नाम पर ढाणी बोराज गांव में खसरा नंबर 1203/544 और 1205/544 के तहत कृषि भूमि घोषित की थी।
गंगवार ने संपत्ति विवरण में हवाला दिया कि इस भूमि पर राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) ने 50 लाख रुपए की कमर्शियल बागवानी परियोजना को मंजूरी दी है।
इसकी फंडिंग बैंक लोन और एनएचबी की सब्सिडी तथा खुद के हिस्से से की जा रही है। यह भी बताया कि कार्यालय-सह-आवास, वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, बाउंड्री वॉल का काम खुद की बचत के लगभग 40 लाख रुपए से किए जा रहे हैं।
गंगवार ने यह दी सफाई
आईएएस गंगवार ने यह मामला सुर्खियों में आने पर 'इंडियन एक्सप्रेस' से कहा था कि AIS (आचरण) नियम, 1968 की धारा 2(b) परिवार के सदस्य को परिभाषित करती है। इसके अनुसार केवल वही व्यक्ति (माता-पिता या बेटा/बेटी शामिल) इस परिभाषा में आते हैं, जो सरकारी सेवक पर पूरी तरह से आश्रित हों।
गंगवार ने कहा कि उनकी मां (बिंदुमती) और बेटे (कुमार ऋत्विक) उन पर आश्रित नहीं हैं। मेरे सेवा रिकॉर्ड में भी यह स्पष्ट उल्लेख है कि वे मुझ पर आश्रित नहीं हैं।
चूंकि वे AIS (आचरण) नियम, 1968 के अनुसार मुझ पर आश्रित नहीं हैं, इसलिए वार्षिक संपत्ति रिटर्न में उनसे संबंधित जानकारी भरना अनिवार्य नहीं है।
कैसे मिलती है सब्सिडी?
दरअसल, कमर्शियल बागवानी की विकास योजना राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत एक उप-योजना है।
इसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर बागवानी फसलों की कमर्शियल खेती को बढ़ावा देना है। इसके तहत तीन तरह की सब्जियां शिमला मिर्च, खीरा और टमाटर आती हैं।
फूलों की आठ किस्मों में एंथुरियम, ऑर्किड, गुलाब, लिलियम, गुलदाउदी, कार्नेशन, जिप्सोफिला और जरबेरा को भी इस योजना में लिया है।
प्रोजेक्ट की लागत का 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। इसकी अधिकतम सीमा प्रति परिवार 1 करोड़ रुपए तय की गई है।
इस योजना में किसान, स्वयं सहायता समूह, उत्पादक संघ, ट्रस्ट, सहकारी समितियां, कंपनियां, किसान उत्पादक संगठन, सहकारी विपणन संघ और कृषि उपज विपणन समितियां लाभान्वित हो सकते हैं।
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