पाकिस्तान को लीक कर रहा था सैन्य ठिकाने की गोपनीय जानकारियां, आरोपी को12 दिन के रिमांड पर भेजा
News In Short
- वायुसेना के एमटीएस सुमित कुमार को पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया ।
- सुमित ने असम और बीकानेर के सैन्य ठिकानों की गोपनीय जानकारी पाकिस्तान के साथ साझा की।
- जासूसी के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल, अपनी पहचान छिपाने की कोशिश भी नहीं की।
- सुमित कुमार 2023 से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के संपर्क में था।
- कोर्ट ने 2 अप्रैल तक सुमित कुमार को पुलिस रिमांड पर भेज दिया, जांच जारी।
News In Detail
भारतीय वायुसेना में MTS (मल्टी टास्किंग स्टाफ) पद पर तैनात सुमित कुमार को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में सीजेएम कोर्ट जयपुर में पेश किया गया। यह वही शख्स है जिसने असम के डिब्रूगढ़ स्थित चबुआ एयरफोर्स स्टेशन जैसे अति संवेदनशील सैन्य ठिकाने की गोपनीय जानकारियां पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के साथ साझा की। कोर्ट ने उसे 2 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
वर्दी में छिपा था 'जासूस'
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि सुमित ने केवल असम के चबुआ एयरफोर्स स्टेशन की ही नहीं, बल्कि बीकानेर के नाल एयरफोर्स स्टेशन सहित देश के अन्य सैन्य ठिकानों की गोपनीय जानकारियां भी पाकिस्तान के साथ साझा कीं। यानी देश के अलग-अलण छोरों पर तैनात वायुसेना के अड्डों की गुप्त जानकारियां इस एक शख्स के जरिए सीमा पार पहुंच रही थीं।
जांच के दौरान पता चला है कि वह 2023 से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के संपर्क में था और रुपयों के लालच में देश के अति संवेदनशील सैन्य ठिकानों की गोपनीय जानकारियां साझा करता था। उसके द्वारा लड़ाकू विमानों की लोकेशन, मिसाइल सिस्टम की जानकारी और सैन्य अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़ी गोपनीय डिटेल भी लीक की गई।
कैसे पकड़ में आया ये जासूस?
यह पूरा नेटवर्क तब धराशायी हुआ जब जनवरी 2026 में जैसलमेर निवासी झबराराम को गिरफ्तार किया गया। झबराराम से पूछताछ के दौरान सुमित कुमार का नाम सामने आया। पता चला कि वह लगातार पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के संपर्क में है।
इसके बाद राजस्थान इंटेलिजेंस और एयरफोर्स इंटेलिजेंस (नई दिल्ली) की टीमों ने संयुक्त मोर्चा बनाया। आरोपी पर नजर रखी गई और सही समय पर चबुआ से उसे दबोच लिया गया। उसे सीधा जयपुर स्थित केंद्रीय पूछताछ केंद्र लाया गया, जहां कई एजेंसियों ने उससे पूछताछ की।
सोशल मीडिया बना था 'जासूसी का हथियार'
आरोपी ने जासूसी के लिए तकनीक का बखूबी इस्तेमाल किया। वह सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स से जुड़ा था। सबसे बड़ी बात यह कि उसने अपने नाम से जारी मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल हैंडलर्स के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाने में किया। यानी उसने अपनी पहचान तक नहीं छिपाई, शायद उसे लगा कि वर्दी उसके लिए सुरक्षा कवच है।
कोर्ट ने दिया रिमांड का समय
सीजेएम कोर्ट जयपुर महानगर-1 के जज प्रियशंकर सिंह के समक्ष राजस्थान इंटेलिजेंस की ओर से 12 दिन के रिमांड की मांग की गई। कोर्ट ने गंभीरता से सुनवाई करते हुए आरोपी सुमित कुमार को 2 अप्रैल तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया। अब सुरक्षा एजेंसियों के पास यह पता लगाने का समय है कि आखिर उसने अब तक कितनी जानकारी पाकिस्तान को पहुंचा दी और उसके और कौन-कौन से साथी हैं।
यह जासूसी का मामला भारतीय वायुसेना की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। वर्दी में छिपा यह 'जासूस' आखिर कितने दिनों तक पाकिस्तान को संवेदनशील जानकारियां उपलब्ध करवाता रहा, इसका खुलासा आने वाले दिनों में हो सकता है।
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