ईरानी घेराबंदी में फंसा राजस्थान का लाल, होर्मुज में जहाज हुआ जब्त, वीडियो संदेश में सुनाई गोलियों की अवाज

Jageshwar prasad | Apr 24, 2026, 18:57 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के श्रीगंगानगर के संजय महार मर्चेंट नेवी में उप-कप्तान हैं। वह ईरान के IRGC द्वारा जब्त किए गए जहाज एपामिनोडास में फंसे हुए हैं। उनका परिवार सरकार से कूटनीतिक हस्तक्षेप की गुहार कर रहा है।

News In Short

  • राजस्थान के संजय महार ईरान के IRGC द्वारा जब्त जहाज एपामिनोडास में फंसे।
  • ईरान ने नेविगेशन प्रणाली से छेड़छाड़ का आरोप लगाया और जहाज जब्त कर लिया।
  • संजय ने गोलियों की तड़तड़ाहट और ईरानी घेराबंदी की घटना वीडियो कॉल में साझा की।
  • 21 चालक दल के सदस्य में भारतीय, फिलीपीन, यूक्रेनी और श्रीलंकाई नागरिक शामिल।
  • संजय के परिवार ने भारत सरकार से कूटनीतिक हस्तक्षेप की गुहार की।

News In Detail

Sri Ganganagar: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में युद्ध के बीच राजस्थान के श्रीगंगानगर का एक परिवार गहरी चिंता में डूबा है। 15 साल से मर्चेंट नेवी में अपनी सेवाएं दे रहे श्रीगंगानगर के संजय महार (38) उन 21 जहाज चालक दल सदस्यों में हैं, जिन्हें ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने बंधक बना लिया है। संजय अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और समुद्री संघर्ष के बीच फंस गए हैं।



मुंद्रा पोर्ट आ रहा था जहाज, रास्ते में इंटरसेप्ट

लाइबेरिया के झंडे वाला कंटेनर जहाज 'एपामिनोडास' गुजरात के मुंद्रा पोर्ट की ओर बढ़ रहा था। बुधवार सुबह जब जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर रहा था, तभी ईरानी सेना ने इसे चारों तरफ से घेर लिया।



संजय महार ने जहाज से साझा किए गए एक वीडियो में बताया कि सुबह करीब 8 बजे अचानक भारी गोलीबारी शुरू हो गई। गोलियों की आवाज सुनते ही हम सभी अपनी जान बचाने के लिए जहाज के अंदर के केबिनों में छिप गए।



21 सदस्य, 5 देश और एक ईरानी स्कॉर्ट

जहाज पर संजय के साथ फिलीपींस, यूक्रेन, श्रीलंका और भारत के कुल 21 सदस्य सवार हैं। संजय पिछले 15 वर्षों से मर्चेंट नेवी में सेवाएं दे रहे हैं। महज 20 दिन पहले ही सऊदी अरब के लिए घर से विदा हुए थे। उन्होंने बताया कि जहाज तीन-चार दिनों से क्लियरेंस का इंतजार कर रहा था ताकि वह सुरक्षित भारत पहुँच सके, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।



ईरान का नेविगेशन से छेड़छाड़ का आरोप

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) का दावा है कि जहाज की नेविगेशन प्रणाली के साथ छेड़छाड़ की गई थी, जिससे समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो रहा था। इसी को आधार बनाकर उन्होंने जहाज को अपनी कस्टडी में लिया और उसे ईरानी तट की ओर ले गए।



पिता को मिला भरोसा कि मैं सुरक्षित हूं

संजय के पिता ने बताया कि उन्हें इस भयावह घटना की जानकारी मीडिया से मिली। हालांकि, संजय ने संपर्क कर परिवार को ढांढस बंधाया है कि वे फिलहाल सुरक्षित हैं। लेकिन, एक विदेशी सेना की गिरफ्त में होने के कारण अनहोनी का डर लगातार बना हुआ है।



संजय के भाई ने स्थानीय विधायक जयदीप बिहानी से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई है। परिवार की मांग है कि भारत सरकार तुरंत ईरानी दूतावास से संपर्क कर कूटनीतिक हस्तक्षेप करे। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री इस मामले को प्राथमिकता पर लें ताकि संजय सहित सभी भारतीय क्रू मेंबर्स की घर वापसी हो सके।



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