IPS मनीष अग्रवाल पर चलेगा केस, 11 साल बाद मिली अनुमति, तीन लाख रुपए की घूसखोरी का मामला
News In Short
- आईपीएस मनीष अग्रवाल के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी मिली।
- उधमपुर पोस्टिंग के समय तीन लाख रुपए की घूस लेने का है आरोप।
- अभियोजन की मंजूरी को मिलने में 11 साल का लंबा समय लगा।
- मनीष अग्रवाल का कैडर 2014 में कश्मीर से चेंज कर राजस्थान हो गया।
- अब ACB आईपीएस के खिलाफ कोर्ट में पूरक चालान करेगी पेश।
News In Detail
Jaipur: भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिरे भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी मनीष अग्रवाल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। करीब 11 साल पुराने एक रिश्वत के मामले में अब उनके खिलाफ नया चालान पेश करने की आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अभियोजन की मंजूरी मिलने में ही एक दशक से अधिक का समय लग गया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला उस समय का है, जब मनीष अग्रवाल जम्मू-कश्मीर कैडर के अधिकारी थे। उधमपुर में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के पद पर तैनात थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत से छोड़ने के एवज में 3 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी।
मामले की जांच जम्मू-कश्मीर की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), जिसे पहले विजिलेंस ऑर्गेनाइजेशन जम्मू (VOJ) के नाम से जाना जाता था, ने की थी। जांच के बाद ब्यूरो ने पाया कि मनीष अग्रवाल पर लगाए गए रिश्वत के आरोप सही थे। इस संबंध में मार्च 2015 में एफआईआर (नंबर 10/2015) दर्ज की गई थी। विजिलेंस टीम ने रीडर युद्धवीर को शिक्षक से रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था।
फाइलों में दबी रही इंसाफ की गुहार
इस केस में कानूनी प्रक्रिया की कछुआ चाल भी चर्चा का विषय बनी हुई है। जम्मू-कश्मीर सरकार को इस मामले में निर्णय लेने में 4 साल का वक्त लगा। वहां के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने साल 2018 में चालान की मंजूरी दी थी।
राज्य की मंजूरी के बाद फाइल केंद्र सरकार को भेजी गई, जहां इसे मंजूरी मिलने में 7 साल और लग गए। कुल मिलाकर 11 साल बाद अब जाकर चालान पेश करने का रास्ता साफ हुआ है।
मनीष का राजस्थान से संबंध
मनीष अग्रवाल मूल रूप से जम्मू-कश्मीर कैडर के थे, लेकिन 2014 में उनका कैडर बदलकर राजस्थान हो गया था। यह बदलाव उनके एक अन्य आईपीएस अधिकारी से विवाह करने के बाद व्यक्तिगत आधार पर किया गया था। राजस्थान आने के बाद भी अग्रवाल विवादों से दूर नहीं रह सके।
राजस्थान में भी भ्रष्टाचार का मामला
मनीष अग्रवाल के खिलाफ यह कोई पहला भ्रष्टाचार का मामला नहीं है। इससे पहले वे राजस्थान में दौसा एसपी के पद पर तैनात रहते हुए भी भ्रष्टाचार के बड़े खेल में फंस चुके हैं।
उन पर आरोप था कि उन्होंने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे बना रही कंपनी के अधिकारियों से बिचौलियों के जरिए लाखों रुपये की रिश्वत मांगी थी।
राजस्थान एसीबी ने इस मामले की गहन जांच के बाद साल 2021 में उन्हें गिरफ्तार किया था। इस मामले में उनके खिलाफ पहले ही चालान पेश किया जा चुका है और वे जेल भी जा चुके हैं।
अब पेश होगा पूरक चालान
वर्तमान में केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर ACB अब मनीष अग्रवाल के खिलाफ कोर्ट में एक और पूरक चालान पेश करेगी। 11 साल पुराने इस मामले के पुनर्जीवित होने से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी लंबी देरी के बावजूद चालान की मंजूरी मिलना यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कानून का हाथ अंततः आरोपी तक पहुंच ही जाता है।
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