ईसरदा से रामगढ़ बांध आएगा पानी, 105 किमी की पाइप लाइन बिछाएगी सरकार
समझें क्या है पूरा मामला
- रामगढ़ बांध को भरने के लिए ईसरदा बांध से आएगा पानी।
- चैनल की जगह 105 किमी पाइप लाइन बिछाएगी सरकार।
- 2028 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट, पीने के पानी के लिए होगा इस्तेमाल।
- हाई कोर्ट ने AG को शपथ पत्र पेश करने के निर्देश दिए।
- बाणगंगा नदी क्षेत्र में 441 एनीकट, न्याय मित्र ने उठाया मुद्दा।
जयपुर के रामगढ़ बांध को पुनर्जीवित करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा प्रोजेक्ट पेश किया है। ईसरदा बांध से 105 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन के जरिए रामगढ़ बांध में पानी लाया जाएगा। यह प्रोजेक्ट 2028 तक पूरा होगा।
पहले चैनल के जरिए पानी लाने की योजना थी, लेकिन अब पाइप लाइन से पानी लाने का फैसला लिया गया है। हाई कोर्ट ने सरकार से सभी विभागों के शपथ पत्र मांगे हैं।
सुनवाई के दौरान अदालती आदेश के पालन में जिला कलेक्टर जयपुर, प्रमुख राजस्व सचिव, एसीएस जल संसाधन विकास विभाग, एसीएस सिंचाई व जेडीसी वीसी के जरिए पेश हुए।
पाइप लाइन से आएगा पानी
राज्य सरकार ने बताया कि पहले यह पानी चैनल के जरिए लाए जाने का प्लान था, लेकिन इसमें पानी को रास्ते में रोके जाने की संभावना थी। इसके चलते अब ईसरदा बांध से पानी पाइप लाइन के जरिए आएगा। यह पानी पीने के काम में आएगा।
एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा व जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने राज्य सरकार से सभी संबंधित विभागों की ओर से शपथ पत्र पेश करने को कहा है। इस शपथ पत्र में यह बताना होगा कि रामगढ़ बांध में पानी किस तरह से आ पाएगा।
बाणगंगा नदी पर एनीकट का मुद्दा
एजी ने अदालत को बताया कि रामगढ़ बांध में पानी लाने का प्रोजेक्ट लेकर आए हैं, इसकी रिपोर्ट पेश कर दी जाएगी। अदालत ने उनसे पूछा कि रामगढ़ बांध क्षेत्र में जो एनीकट हैं उनका क्या कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पूर्व आदेश के पालन में 2 मीटर से ज्यादा ऊंचाई के एनीकट हटा दिए थे। जिस पर न्याय मित्र अधिवक्ता डॉ. अभिनव शर्मा ने कहा कि बाणगंगा नदी, रामगढ़ बांध को भरने का मुख्य स्रोत थी, लेकिन बाणगंगा नदी के बहाव क्षेत्र में ही अतिक्रमण व एनीकट बने हुए हैं। पूर्व में 2018 की रिपोर्ट में भी 441 एनीकट होने की जानकारी है।
शपथ पत्र पेश करने का निर्देश
अदालत ने सभी पक्षों को सुनकर एजी को शपथ पत्र पेश करने का निर्देश देते हुए आगामी सुनवाई गुरुवार को तय की है।
गौरतलब है कि राजस्थान हाई कोर्ट ने 12 अगस्त 2011 को रामगढ़ बांध सहित प्रदेश के जल बहाव क्षेत्रों में अतिक्रमण मामले में स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेकर राज्य सरकार, जेडीए, नगर निगम सहित अन्य विभागों को विस्तृत आदेश दिया था।
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